नौ माह में पूरी करनी होगी यूपी बोर्ड की पढ़ाई

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव का असर इस बार माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी) बोर्ड पर सबसे ज्यादा देखने को मिला है। पहले बोर्ड परीक्षा में देरी हुई। जिसके कारण रिजल्ट भी देरी से आया। अब इस बार यूपी बोर्ड का नया शैक्षिक सत्र ( 2017-18 ) 12 माह की जगह नौ माह का ही होगा। इन नौ महीनों में ही सभी स्कूलों को बच्चों की तैयारी भी करानी है। साथ ही सभी कोर्स भी समय से पूरा कराना है। तीन महीने कम होने से बच्चों पर पढ़ाई का अतिरिक्त बोझ बढ़ना स्वभाविक है। वहीं शिक्षकों पर पढ़ाने की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। इस साल विधानसभा चुनाव के कारण शैक्षिक सत्र की शुरुआत एक जुलाई से होगी तो वहीं अगले साल 2018 की शुरुआत एक अप्रैल ही की जाएगी। जिसके चलते इस साल का शैक्षिक सत्र तीन महीने कम हो गया है। इससे बच्चों के साथ शिक्षकों की मुश्किलें भी बढ़ेंगी।
छह महीने का कोर्स चार महीने में कराना होगा पूरा
कालीचरण इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. महेंद्र नाथ राय बताते है कि शैक्षिक सत्र का समय कम होने से शिक्षकों और छात्रों पर जबरदस्त बोझ बढ़ेगा। जो कोर्स हर बार छह महीने में पूरा करना होता है, वह इस साल उसे तीन से चार महीने में पूरा करना होगा। आगे आने वाले त्यौहार जैसे, दीवाली, दशहरा, रक्षा बंधन, नवरात्र को मिलाकर अन्य छुट्टियां निकल जाती है। जिसके चलते पहले से ही कोर्स के लिए बच्चों और शिक्षकों के पास कम समय ही होता है। इस बार तो आधा समय ही होगा, जिसमें बच्चों पर कोर्स पूरा करने का तनाव होगा और शिक्षकों को कोर्स पूरा करवाने की जिम्मेदारी निभाने का तनाव होगा। वहीं राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आरपी मिश्रा बताते है कि बच्चों पर तो पढ़ाई का बोझ रहेगा ही इसके साथ ही शिक्षकों की परेशानी भी बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा समस्या हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों को होगी। उनका कोर्स सभी स्कूलों को कम से कम छह महीनें में पूरा करना होगा। तभी फरवरी में होने वाले बोर्ड परीक्षा से पहले कम से कम एक महीने पहले से बच्चों को रिवीजन कराया जा सके।
कोर्स पूरा करना बड़ी चुनौती
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा बताते हैं कि इस साल नगर निकाय का चुनाव भी होना है, ऐसे में निकाय चुनाव के कारण शैक्षिक सत्र बिगड़ा तो तय है। ऐसे में इस साल शिक्षकों और छात्र दोनों के लिए इस बार सेशन कठिनाई भरा है। अगर नगर निकाय चुनाव डेढ़ या दो महीने तक चलते है तो इसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी। ऐसे में वह कोर्स पूरा कराएंगे या फिर चुनाव की ड्यूटी करेंगे।

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