भाईचारे की मिशाल : नमाज छोड़ गाय को बचाने लगे हिन्दू के साथ मुस्लिम

0
720

उत्तर प्रदेश के बरेली में थाना सुभाषनगर थाना क्षेत्र में उस समय सद्भावना देखने को मिली जब नाले में गिरी गाय की जिंदगी को बचाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम इकट्ठे हो गए और गाय को बचाने के लिए जय श्रीराम और या अली की आवाज फिजा में गूंजती रही। यह आवाज तब तक गूंजती रही जब तक घायल गाय को गहरे नाले से निकाल नहीं लिया गया।

गाय को बचाने के लिए दौड़े दोनों समुदाय के युवकदरअसल मामला यह है कि पड़ोस से गुजर रहे एक मुस्लिम युवक को गाय के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। उसने देखा कि गाय घायल अवस्था मे नाले में है। युवक ने तुरंत मोहल्ले के युवकों को बुला लिया। हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय के युवक गाय को बचाने के लिए आए।

गाय की जिंदगी बचाने के लिए करनी पड़ी मेहनतगाय की जिंदगी बचाने के लिए हिन्दू-मुस्लिम लड़कों का विशेष योगदान रहा। मिली जानकारी के अनुसार थाना सुभाषनगर की पॉल कॉलोनी के पास से गुजर रहे जकी अब्बास नाम के व्यक्ति को गंदे नाले में घायल अवस्था मे गाय देखी। अब्बास उस समय पड़ोस की मस्जिद में नमाज के लिए जा रहा था। अब्बास ने नमाज नहीं पढ़ने का फैसला किया और अपने मोहल्ले को लड़कों के साथ गाय की जिंदगी बचाने में लग गए। वहीं इस काम में धीरज पाठक नाम के समाजसेवी अपने मित्रों के साथ पहुंच गए इस तरह दोनों पक्षों ने समाज मे आपसी भाईचारे का सन्देश दिया।

या अली और जय श्री राम के नारों से किया हर बाधा को पारगाय को बचाने का जब अभियान चल रहा था तब हिन्दू युवक जय श्रीराम के नारे लगाकर गाय को बचाने की कोशिश कर रहे थे वहीं मुस्लिम युवक भी या अली को यादकर गाय की जिंदगी बचाने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे थे। वहीं यह घटना लोगों के बीच सद्भावना की मिसाल पैदा कर गई। साथ ही गौरक्षा के नाम पर गुंडई करने वालों के लिए एक सबक भी।