अनंत सूत्र धारण करने की परंपरा, इसी दिन गणेशोत्सव का भी होता है समापन
डॉ. शैलजा शर्मा दीक्षित
लखनऊ। सनातन परंपरा में अनंत चतुर्दशी का विशेष महत्व है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी यानी अनंत चौदस शुक्रवार, 25 सितंबर को मनाई जाएगी। यह दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा, व्रत और अनंत सूत्र धारण करने के लिए विशेष माना जाता है। इसी दिन कई स्थानों पर गणेशोत्सव का समापन भी होता है और श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा का विधिवत विसर्जन करते हैं।
अनंत चतुर्दशी की सरल पूजा विधि
- अनंत चतुर्दशी के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और श्रद्धापूर्वक व्रत का संकल्प लें।
- घर के मंदिर या पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और शेषनाग का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें।
कैसे तैयार करें अनंत सूत्र
सूती या रेशमी धागे को हल्दी से रंगकर उसमें 14 गांठें लगाई जाती हैं। इसे अनंत सूत्र कहा जाता है। बाजार में मिलने वाला तैयार अनंत सूत्र भी पूजा में रखा जा सकता है।
पूजा में भगवान विष्णु को पीले फूल, रोली, चंदन आदि अर्पित करें। इसके बाद 14 गांठों वाले अनंत सूत्र की पूजा कर उसे श्रद्धापूर्वक धारण करें। परंपरा के अनुसार पुरुष दाहिने हाथ और महिलाएं बाएं हाथ में अनंत सूत्र धारण करती हैं। अंत में भगवान की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
14 गांठों का क्या है महत्व?
अनंत सूत्र में 14 गांठें होती हैं। धार्मिक परंपरा में इन्हें चतुर्दश लोकों और भगवान की अनंत सत्ता का प्रतीक माना जाता है। यह सूत्र भक्त को अपने व्रत, संकल्प और भगवान के प्रति श्रद्धा की याद दिलाता है।
सरल मंत्र
ॐ अनन्ताय नमः।
पूजा के दौरान भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप किया जा सकता है।
अनंत चतुर्दशी की प्रमुख कथा
पौराणिक परंपरा के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से अपने कष्टों से मुक्ति और राज्य की पुनः प्राप्ति का उपाय पूछा। श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत भगवान के व्रत का विधान बताया और इससे जुड़ी कथा सुनाई।
कथा के अनुसार, ब्राह्मण सुमन्त की पुत्री सुशीला का विवाह कौण्डिन्य ऋषि से हुआ था। सुशीला ने कुछ महिलाओं को अनंत भगवान की पूजा करते देखा और उनसे इस व्रत की विधि जानी। उसने श्रद्धापूर्वक पूजा की और अनंत सूत्र धारण किया।
कौण्डिन्य ऋषि ने जब उसके हाथ में बंधा सूत्र देखा तो उसका महत्व नहीं समझा और उसे उतार दिया। इसके बाद उनके जीवन में अनेक परेशानियां और आर्थिक संकट आने लगे। उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने अनंत भगवान की खोज और उपासना की।
भगवान श्रीहरि प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर अनंत व्रत की महिमा समझाई। कौण्डिन्य ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और उनके कष्ट दूर हुए।
कथा का संदेश
अनंत चतुर्दशी की कथा श्रद्धा, सत्य, नियम और समर्पण का संदेश देती है। यह पर्व जीवन में धैर्य बनाए रखने और ईश्वर के प्रति विश्वास मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
अनंत चतुर्दशी का महत्व
भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना।
परिवार के सुख, शांति और मंगल की प्रार्थना।
जीवन के संकटों में धैर्य और ईश्वर-विश्वास बनाए रखने का संकल्प।
अनंत सूत्र को भगवान के प्रति श्रद्धा और व्रत-संकल्प का प्रतीक मानना।
गणेशोत्सव के समापन पर भगवान गणेश का विधिवत विसर्जन।
विशेषज्ञ टिप्पणी:
डॉ. शैलजा शर्मा दीक्षित
होम्योपैथिक चिकित्सक, खाला बाजार, लखनऊ






