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    Home»उत्तर प्रदेश

    विश्व स्तर पर अयोध्या की प्रतिष्ठा

    ShagunBy ShagunJanuary 21, 2024Updated:January 21, 2024 उत्तर प्रदेश No Comments9 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री

    त्रेता में निषाद राज को जब पता चला कि प्रभु राम का आगमन हो रहा है, तब उन्होंने पूरे क्षेत्र को सुसज्जित किया था. सबरी तो प्रति दिन राह को पुष्प को सुसज्जित करती थीं. उन्हें विश्वस था एक दिन प्रभु श्री राम अवश्य आयेंगे. वह कोई तिथि शास्त्र नहीं जानती थी. भक्ति में लीन रहती थी. अंततः उनकी प्रतीक्षा पूर्ण हुई थी. प्रभु राम की वापसी के लिए अयोध्या के लोगों ने चौदह वर्ष प्रतीक्षा की थी. प्रभु के आगमन की सूचना मिलते ही उन्होंने अयोध्या को सुसज्जित करना शुरू कर दिया था. उनके आगमन पर दीपोत्सव मनाया गया.

    योगी आदित्यनाथ को भी जन्मभूमि पर भव्य श्री राजमंदिर के निर्माण और उनकी प्राण प्रतिष्ठा का अनुमान रहा होगा. जबकि कुछ वर्ष तक लोगों ने इस सपने के साकार होने की आशा भी छोड़ दी थी. यूपीए सरकार ने तो श्री राम को लिखित रूप में काल्पनिक बताया था. सभी सेक्युलर पार्टियां भी अयोध्या में मन्दिर निर्माण की विरोधी रही है. इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार थी. निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाई गई. मन्दिर निर्माण रोकने के लिए दर्जनों वकील लगाए गए. ऐसे में सनातन पर अस्था रखने वाले निराश थे. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आशा की किरण दिखाई दी. योगी आदित्यनाथ को तो पूरा विश्वस था कि भव्य मन्दिर का निर्माण अवश्य होगा. इसके लिए उन्होंने भी मुख्यमंत्री बनने के बाद अयोध्या धाम को सुसज्जित करना शुरू कर दिया था. भव्य दीपोत्सव के साथ उन्होंने इसकी शुरुआत की. इसके प्रकाश से अयोध्या की उदासी का अंधकार दूर होने लगा था. योगी ने अयोध्या को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा करने का संकल्प लिया. उसके अनुरूप कार्ययोजना बना कर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया. अयोध्या का कायाकल्प शुरू हुआ. मन्दिर निर्माण के पहले ही अयोध्या आध्यात्मिक और भौतिक रूप से सुसज्जित हो चुकी थी.

    यह संयोग है कि नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ दोनों ही श्री राम जन्मभूमि आंदोलन में सहभागी थे. आंदोलन को सर्वाधिक उत्थान लाल कृष्ण अडवाणी की रथयात्रा से मिला था. नरेंद्र मोदी पूरी यात्रा में लाल कृष्ण अडवाणी के साथ थे. योगी आदित्यनाथ अपने सन्यास जीवन की तीन पीढ़ियों तक श्री राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे. लालकृष्ण आडवाणी ने राष्ट्र धर्म पत्रिका के विशेष संस्करण में भाव विभोर करने वाला लेख लिखा है. उन्होंने लिखा कि नियति ने तय किया था कि अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनाया जाएगा. उसने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुना।आडवाणी ने इस क्षण को लाने, रामलला का भव्य मंदिर बनाने और अपने संकल्प को पूरा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है। लिखा कि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी रथ यात्रा के दौरान उनके साथ थे। तब वह बहुत प्रसिद्ध नहीं थे, लेकिन उसी समय भगवान राम ने अपने मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए अपने भक्त मोदी को चुना था। जब प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर में भगवान राम की मूर्ति का अभिषेक करेंगे, तो वह हमारे भारत के प्रत्येक नागरिक का प्रतिनिधित्व करेंगे। मैं प्रार्थना करता हूं कि यह मंदिर सभी भारतीयों को श्री राम के गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करे।

    योगी आदित्यनाथ के पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के अध्यक्ष थे। जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण की योजना रचना गोरखनाथ धाम में बनती थी. योगी आदित्यनाथ भी उसमें शामिल रहते थे. श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन में गोरक्षपीठ का महत्वपूर्ण योगदान था. योगी आदित्यनाथ के पूज्य दादा गुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और पूज्य गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के अग्रणी मार्गदर्शक रहे. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि वह श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन से जुड़े रहे और प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने का उन्हें अवसर प्राप्त होगा।

    हम सभी श्रीराम के भव्य मन्दिर के निर्माण कार्य को देख रहे हैं और इस कार्यक्रम को सफल बनाने में यथासम्भव योगदान दे पा रहे हैं। प्रभु श्रीराम के भव्य मन्दिर का निर्माण हम लोगों के जीवन का ध्येय था। यह ध्येय पूज्य संतों के संकल्प के कारण सिद्धि में परिवर्तित हो पा रहा है। यह अकल्पनीय व अकथनीय है। भारत ही नहीं, बल्कि विश्व में भारत को मानवता की धरती कहने वाला हर व्यक्ति इस दिन की प्रतीक्षा कर रहा है और इस अभियान से जुड़ रहा है। योगी आदित्यनाथ के कथन पर प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आमन्त्रण अस्वीकार करने वालों को ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि जो प्रभु श्रीराम के महत्व को नहीं समझ रहा, वह भारत को नहीं समझ रहा। यह श्रेय और प्रेय का समय नहीं है। उपासना विधि में अन्तर है। सनातन धर्म पंथ और उपासना विधि नहीं है। हमारे यहां अनेक पंथ और उपासना विधियां हैं। लेकिन धर्म एक है, वह है सनातन धर्म। विश्व मानवता को जब भी संकट आया, भारत के सनातन धर्म ने आगे बढ़कर लोगां का हाथ थामा है।

    श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम राजनीतिक नहीं है। हर देश की अपनी पहचान होती है। उसका अपना एक गुण होता है। जैसे कोई सात्विक प्रकृति का होता है, कोई राजसिक प्रकृति का होता है, कोई तामसिक प्रकृति का होता है। सबके लिए अलग-अलग गुणधर्म शास्त्रों में बताए गए हैं, ऐसे ही देश का भी होता है। भारत एक ऐसा देश है, जहां पर आस्था को व्यक्ति सर्वोच्च महत्व देता है। अलग-अलग कालखण्ड में देश की राजनीतिक सीमा छोटी-बड़ी होती रही। लेकिन शास्त्रों में हजारों वर्ष पहले भारत की सांस्कृतिक सीमा को जिस रूप में रेखांकित किया गया.वही सांस्कृतिक सीमा आज हमारी राजनीतिक सीमा है। शंकराचार्य जी ने देश के चारों कोनों में एक-एक पीठ की स्थापना की। भारतवर्ष में द्वादश ज्योतिर्लिंगों की स्थापना की गयी। यह सभी चीजें दिखाती हैं कि भारत सांस्कृतिक रूप से आदिकाल से उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम में एक था। भारत की इस आस्था का सम्मान होना चाहिए।

    नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने अपने राजधर्म निर्वाह में साँस्कृतिक तत्व को भी समाहित किया. रामराज्य की भावना के अनुरूप सरकार गरीबों का कल्याण कर रही है. सभी वर्गां के लोगों के विकास के लिए कार्य किये जा रहे हैं। देश में सुरक्षा का एक बेहतर वातावरण दिया है। लोक कल्याणकारी योजनाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेण्ट के कार्य हो रहे हैं. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने अपने दायित्वों का निर्वहन किया. योगी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने भी अपने दायित्वों का निर्वहन किया है। सर्वाच्च न्यायालय ने साहसिक एवं ऐतिहासिक निर्णय दिया. इससे श्री राजमंदिर निर्माण का मुश्किल कार्य सम्भव हुआ. आज अयोध्या विश्व पटल पर प्रतिष्ठित हो रहा है. नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का लोकार्पण किया था। इस एयरपोर्ट के उद्घाटन के साथ ही दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद से एयर कनेक्टिविटी हुई. इसके बाद कोलकाता और बेंगलुरु के लिए एयर इण्डिया एक्सप्रेस की वायु सेवा प्रारम्भ हो गई है. अयोध्या में फोरलेन सड़क कनेक्टिविटी, डबल रेलवे लाइन कनेक्टिविटी, इंटरनेशनल एयरपोर्ट निर्माण तथा पवित्र सरयू नदी में क्रूज सेवा प्रारम्भ होना मात्र कल्पना थी। आज यह सभी कार्य वास्तविकता के धरातल पर उतर चुके हैं। यह सभी सुविधाएं अयोध्यावासियों को उपलब्ध हो रही हैं।

    आगामी समय में अयोध्या टूरिस्ट डेस्टिनेशन के लिए देश का सबसे प्रमुख शहर होने जा रहा है। अयोध्या में स्थानीय श्रद्धालुओं की बहुत बड़ी संख्या है। देश विदेश से श्रद्धालु अयोध्या पहुंचेगे. सरकार उनकी सुविधा के लिए साधनों का विस्तार कर रही है. अयोध्या में प्रदेश सरकार आठ सौ एकड़ से अधिक भूमि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को उपलब्ध करा चुकी है।

    पार्किंग की सुविधा के साथ यहां आठ विमान एक साथ लैंड कर सकते हैं। भविष्य की सम्भावनाओं को ध्यान में रखते हुए नागर विमानन मंत्रालय द्वारा बनाई गई कार्य योजना के अनुसार प्रदेश सरकार प्रत्येक कार्य में सकारात्मक सहयोग प्रदान करेगी। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि नरेन्द्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश प्रत्येक क्षण विकास और प्रगति के नए आयाम प्राप्त कर रहा है। उत्तर प्रदेश देश की विकास और प्रगति को सुनिश्चित करने वाला प्रदेश है। जिस सुंदर अयोध्या नगरी का सपना प्रधानमंत्री ने देखा था उसका क्रियान्वयन मुख्यमंत्री ने किया है। अयोध्या में चैड़ी सड़कें, सुंदर साइन बोर्ड, लता मंगेशकर चैराहा के साथ-साथ सम्पूर्ण अयोध्या का कायाकल्प करने का कार्य किया गया. योगी आदित्यनाथ के विशेष आग्रह पर देश के विभिन्न राज्यों की कला व संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए इस विमानतल को श्री रामजन्मभूमि मंदिर का आकार प्रदान किया गया। विमानतल का नामकरण भगवान श्रीराम के जीवन विवरण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया गया।

    पांच अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे उत्तर प्रदेश में या तो स्थापित हो चुके हैं या होने जा रहे हैं। इनमें से अयोध्या धाम एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। मन्दिर परिसर के बाहर इन्फ्रास्ट्रक्चर सरकार द्वारा विकसित किया जा रहा है। वहां सड़कों का चौड़ीकरण, आधुनिक रेलवे स्टेशन का निर्माण,डबल रेल लाइन,नये अन्तरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का निर्माण, क्रूज सेवा प्रारम्भ करने का कार्य, मल्टी लेवल पार्किंग का निर्माण तथा मन्दिर परिसर के बाहर गेस्ट हाउस बनाने के कार्य जैसे विभिन्न निर्माण कार्य प्रदेश सरकार की पॉलिसी के अन्तर्गत कराये जा रहे हैं। आज ही अयोध्या से कोलकाता व बेंगलुरु के लिए वायु सेवा प्रारम्भ की गयी है। अब तक अयोध्या को पांच महानगर दिल्ली, मुम्बई, अहमदाबाद, कोलकाता व बेंगलुरु के साथ हवाई सेवा से जोड़ा जा चुका है।

    यह कार्य निरन्तर बढ़ता जा रहा है।अयोध्या में पंचकोसी, चौदहकोसी व चौरासीकोसी परिक्रमा भव्य रूप ले रही है। वहां के आश्रम व अन्य महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों को सजाया व संवारा जा रहा है। पूरी अयोध्या एक नई अयोध्या के रूप में स्थापित हुई है। अकेले अयोध्या में वर्तमान में इकतीस हजार करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट धरातल पर उतर चुके हैं या उन पर कार्य हो रहा है। अगले दस वर्षों में अकेले अयोध्या के लिए एक लाख करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट आ रहे हैं। अयोध्या सोलर सिटी के रूप में स्थापित होगी। अयोध्या, नये भारत की नई अयोध्या होगी, जो दुनिया की सबसे खूबसूरत और सबसे सुन्दरतम नगरी के रूप में स्थापित होगी। योगी ने कहा कि श्री रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम भारत के आत्म गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है। हमारा देश अपने स्वयं के गौरव की पुनर्प्रतिष्ठा कर रहा है।

    भूतल पर श्री रामलला की भव्य मूर्ति विराजमान होने जा रही है। शास्त्रोक्त पद्धति व विधि-विधान के साथ सभी कार्यक्रम प्रारम्भ हो चुके हैं। अयोध्या में योगी आदित्यनाथ ने पुराने पुल के पास स्थित कच्चा घाट पर सरयू जी में सौर ऊर्जा चालित बोट का शुभारम्भ किया।

    Shagun

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