निरोगी काया चाहते हैं तो योग करें

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यदि आप अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य की काया निरोगी चाहते हैं तो नियमित योग करें। और वैसे भी हमें बचपन से सिखाया जाता है कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है। ये सच भी है क्योंकि हमारा शरीर एक मशीन के समान है। मशीन के किसी हिस्से में कोई खराबी आ जाए तो वो ठीक तरह से काम करना बंद कर देती है वैसे ही मानव शरीर के ठीक से काम करने के लिए उसके हर अंग का स्वस्थ रहना बेहद जरूरी है। योग ऐसा करने में सक्षम है। वयस्कों का योग करना सामान्य हो गया है।

हर दिन बढ़ते शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव को दूर करने के लिए योग बेहद जरूरी हो चला है। लेकिन अब बच्चों के लिए भी योग जरूरी होता जा रहा है क्योंकि स्कूल-कॉलेजों में बढ़ती प्रतिस्पर्धाओं के साथ बच्चों को तमाम तरह की अतिरिक्त गतिविधियों में हिस्सा लेना होता है। साथ ही बच्चों को अपने माता-पिता और शिक्षकों की अपेक्षाओं को भी पूरा करना होता है। ऐसे में एक बच्चे पर भी शारीरिक के साथ मानसिक दबाव भी होता है। ऐसे में बच्चों के लिए भी योग उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना वयस्कों के लिए। योग करने की अच्छी आदत बच्चों को बचपन से ही दे दी जाए तो बात ही कुछ और होगी, क्योंकि इसके अनेक फायदे हैं।

विज्ञान है योग : योग हमारे शरीर को शारीरिक, मानिसक, भावनात्मक, आत्मिक और आध्यात्मिक रूप से मजबूत बनाता है। इसीलिए योग को आम व्यायाम से ज्यादा तरजीह दी गई है। योग के दौरान बनाई गई मुद्राएं और आसन बच्चों के संपूर्ण विकास में भागीदार बनते हैं। मस्तिष्क से लेकर पैर तक और सांस लेने से लेकर आंखों की रोशनी तक के लिए योग फायदेमंद है।

अंगों की क्षमता समझने में मददगार : योग के समय बच्चे तमाम मुद्रा और आसन करते हैं। इससे बच्चे शरीर के विभिन्न हिस्सों की क्षमताओं के बारे में समझ पाते हैं। योग मुद्राएं बच्चों के शरीर को मजबूत और लचीला बनाती हैं और शरीर में शक्ति उत्पन्न करती हैं। जो बच्चे जन्म से ही शारीरिक रूप से कमजोर होते हैं उन्हें फिजियोथेरेपिस्ट योग थेरेपी अपनाने की सलाह देते हैं, जिससे उनका शरीर मजबूत होता है।

सांस लेने की प्रक्रिया में असरदार है योग : योग में प्राणायाम के दस से ज्यादा प्रकार होते हैं, प्राणायाम करने से बच्चों के श्वसन पण्राली और हृदय पण्राली को मजबूत होती है। प्राणायाम से बच्चों में तनाव, अस्थमा और हकलाने से संबंधित विकारों से छुटकारा मिलने में भी मदद मिलती है। लेकन प्राणायाम कराते वक्त इस बात का ज़रूर ख्याल रखें कि बच्चे की उम्र 8 साल से ज्यादा हो। 8 साल से छोटे बच्चों के फेफड़ों में हवा भीतर लेने वाली थैलियां पूरी तरह से संख्या नहीं ले पातीं। 8 वर्ष के बाद हवा थैलियां सिर्फ आकार लेती हैं और इनकी संख्या में कोई बदलाव नहीं होता।

प्रमुख प्राणायाम और उनके लाभ नाड़ीशोधन, भस्त्रिका, उज्जयी, सूर्य भेदन, शीतकारी, भ्रामरी, प्लाविनी, मूर्छा, कपालभाति और अनुलोम-विलोम। उज्जयी प्राणायाम- हकलाहट दूर करने में मददगार। मूर्छा प्राणायाम- तनाव कम करने में मदद करता है लेकिन हाई ब्लड प्रेशर और ब्रेन स्ट्रोक वालों के लिए वर्जित। नाड़ीशोधन प्राणायाम- चिंता एवं तनाव कम करने, शांति, ध्यान और एकाग्रता, शरीर में ऊर्जा का मुक्त प्रवाह करने और प्रतिरक्षा पण्राली को मजबूत करने में उपयोगी।

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