अन्नदाता को लालटेन युग में ले जाने की तैयारी, 260 से 350% तक बिजली मंहगी का प्रस्ताव

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  • एक मुश्त समाधान योजना, फ्री कनेक्शन योजना पर कई सौ करोड़ रूपये किया माफ, सरकार ने थपथपायी अपनी पीठ अब उसकी भरपाई चोर दरवाजे से टैरिफ में आरओई मांग कर करने की तैयारी, जिससे आदर्श उपभोक्ता भुगतेंगे खामियाजा। 
  • प्रदेश के ऊर्जा इतिहास का आज काला दिन प्रदेश के किसानों ने बिजली दर बढ़ोत्तरी के खिलाफ शक्ति भवन सहित प्रदेश की बिजली के मुख्यालय पर लालटेन टांगकर किया प्रदर्शन।
  • उपभोक्ता परिषद की प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से मांग पूरे मामले पर करें हस्तक्षेप और व्यापक बिजली दर वृद्धि करायें वापस।
  • सरचार्ज माफी योजना के तहत माफ की गयी धनराशि व फ्री कनेक्शन पर होने वाले व्यय के मद में सरकार से क्यों नहीं कार्पोरेशन से ली सब्सिडी

लखनऊ 30 अगस्त। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा पूरे प्रदेश में ग्रामीण व किसानों की बिजली दरों में 260 से 350 प्रतिशत वृद्धि के प्रस्ताव के विरोध में जहां पूरे प्रदेश के किसान व ग्रामीण उपभोक्ता आन्दोलित हैं। वहीं आज सबसे बड़ा दुर्भाग्य का दिन था, जब शक्ति भवन सहित पूरे प्रदेश के बिजली कम्पनियों के मुख्यालय पर हमारे प्रदेश के किसान यानी अन्नदाता लालटेन टांग कर धरने पर बैठे थे। किसानों का आरोप था कि जिस प्रकार से इस सरकार में किसानों व ग्रामीणों की बिजली दरों में कई सौ गुना की वृद्धि का प्रस्ताव दिया यदि पावर कार्पोरेशन में उसमें कामयाब हो जाता है तो आने वाले समय में उससे प्रदेश के अन्नदाता को लालटेन युग में ले जाने से कोई नहीं रोक पायेगा।

देश व प्रदेश का किसान अन्न पैदा कर सभी का पेट भरता है और आज पावर कार्पोरेशन के उच्चाधिकारी आंख मूंद कर प्रदेश के किसान व ग्रामीण जनता को तबाह करने में लगे हुए हैं। उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय से पूरे मामले पर हस्तक्षेप करते हुए ग्रामीण व किसानों की व्यापक बिजली दर वृद्धि प्रस्ताव को वापस लेने की मांग उठायी है।उ0प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा विगत दिनों पूरे प्रदेश में अधिभार माफी योजना लाई गयी, फ्री कनेक्शन योजना लाई गयी, जिससे कई सौ करोड़़ रूपये का अधिभार माफ किया गया। सरकार ने इस योजना पर अपनी पीठ थपथपायी अब इसकी भरपाई टैरिफ में आरओई (रिटर्न आफ इक्विटी) के रूप में पिछले दरवाजे से पावर कार्पोरेशन द्वारा किये की तैयारी है, यह कहां तक उचित है।

वास्तव में सरकार यदि चाहती तो इस पर सब्सिडी देकर इसका भार आदर्श विद्युंत उपभोक्ताओं पर न पड़ने देती और जब सरकार ने इस पर अपनी पीठ थपथपायी है और अपने 100 दिन की उपलब्धि में शामिल किया तो सब्सिडी देने का उसका नैतिक दायित्व बनता था, लेकिन ऐसा न करके सभी उपभोक्ताओं पर इसका भार डाला जा रहा है। पहली बार प्रदेश की बिजली कम्पनियों ने 16 प्रतिशत आरओई टैरिफ प्रस्ताव में मांगा है। इसी प्रकार सरकार द्वारा जो लगभग 5500 करोड़ सब्सिडी दी जाती है, उसमें भी 1000 करोड़ रूपया प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से इलेक्ट्रिीसिटी ड्यूटी के रूप में वसूल कर उसे सब्सिडी में कन्वर्ट कर दिया जाता है। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा सही मायने में बिजली कम्पनियों को बिजली चोरी रोककर, अपनी क्षमता बढ़ाकर, राजस्व वसूली करके, भ्रष्टाचार कम करके अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहिए न कि प्रत्येक वर्ष उपभोक्ताओं की बिजली दरों में व्यापक बढ़ोत्तरी करके।

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