अटल बिहारी वाजपेयी के शोक के शोरशराबे बीच राजीव गांधी की याद। राजीव गांधी की सौम्यता, सदाशयता और शालीनता की प्रशंसा अटल जी ने भी की थी। उनके इलाज के लिए राजीव गांधी ने उन्हें विदेश भेजा था। वाजपेयी जी ने राजीव गांधी की हत्या के बाद उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भावुक होकर यहां तक कहा था कि अगर वे जीवित हैं तो राजीव गांधी की वजह से।
दरअसल, प्रधानमंत्री रहते हुए राजीव गांधी को जब किसी तरह यह बात मालूम पड़ी कि वाजपेयी किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं और उन्हे विदेश में इलाज की ज़रूरत है। राजीव गांधी ने उन्हें भारत की तरफ से एक प्रतिनिधिमंडल के साथ संयुक्त राष्ट्र भेज दिया ताकि मौके का लाभ लेते हुए वह न्यूयॉर्क में अपना इलाज भी करवा सकें।
राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों को दुश्मन क़रार देने वाली नफ़रत की राजनीति के मौजूदा दौर में इस तरह की आपसी सौम्यता की बहुत ज़रूरत है।

हालाँकि राजीव गांधी का कार्यकाल भी विवादों से परे नहीं रहा। पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने अपनी आत्मकथात्मक किताब The Turbulent Years में खुल कर कहा कि अयोध्या रामजन्मभूमि का ताला खुलवाना राजीव गांधी की एक बड़ी भूल थी।
आज जब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस मंदिर मुद्दे पर बीजेपी की राजनीति के ख़िलाफ़ खड़ी है तो गांधी परिवार के कट्टर आलोचक बीजेपी सांसद सुब्रमण्यन स्वामी की यह टिप्पणी याद करना दिलचस्प होगा कि अगर राजीव गांधी दोबारा प्रधानमंत्री बनते तो अयोध्या में राम मंदिर बन गया होता।
प्रणव मुखर्जी ने अपनी किताब में यह भी लिखा कि शाहबानो प्रकरण से उनकी एक आधुनिक सोच वाले नेता की छवि धूमिल हुई थी।
राजीव गांधी की सरकार की शिक्षा नीति का हम लोगों ने छात्र जीवन के दौरान मुखर विरोध किया था। मोदी सरकार तो ख़ैर अब तक शिक्षा नीति लाई ही नहीं है।
– अमिताभ श्रीवास्तव







