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    Home»ब्लॉग

    दीक्षा: अटल स्मृति के विविध आयाम

    By October 13, 2018Updated:October 13, 2018 ब्लॉग No Comments4 Mins Read
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    Post Views: 660
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    लखनऊ अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि रही है। उन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत यहीं से की थी। बाद में यहां से एमपी और फिर देश के पीएम बने।
    उनके निधन के बाद पहली बार आयोजित लखनऊ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उनका स्मरण किया गया। दीक्षा : अटल- स्मृति स्मारिका श्रद्धा सुमन  के रूप में उनको अर्पित की गई।
     स्मारिका के आमुख में अटल जी की पंक्तियों का उल्लेख है। ये चंद लाइने स्मारिका की सम्पूर्ण भावभूमि का निर्माण कर देती है-
    हार नहीं मानूगा,
    रार नहीं ठानुगा,
    काल के कपाल पर 
    लिखता मिटाता हूं।
    गीत नया गाता हूं।।
    अटल जी के लिए यह गीत मात्र नहीं जीवन दर्शन था। जिस पर वह सदैव चलते रहे,और गौरवपूर्ण इतिहास बनाकर नश्वर संसार से विदा हुए। उनकी आंतरिक,विदेश, आर्थिक,शिक्षा, दूरसंचार,स्वास्थ, आदि नीतियों का व्यापक फलक था। पर्यावरण, प्रकृति के प्रति गहरा लगाव था। कविताओं में सामाजिक, राजनीतिक चेतना थी। यह तत्व उनके व्यक्तित्व को विराट बनाने वाले थे।
    स्मारिका में अटल जी से संबंधित पन्द्रह लेख है। शैलेन्द्र नाथ कपूर ने भारतीय संस्कृति के प्रति उनके अनुराग का चित्रण किया है। वह श्रेष्ठ पुरुषों में थे। प्राचीन भारतीय संस्कृति से लेकर बौद्ध दर्शन तक उनका अध्ययन था। वैश्विक फलक पर वह उसको प्रकट करने में समर्थ थे। उमेश चन्द्र वशिष्ठ ने अटल जी के जीवन दर्शन को भारतीय शिक्षा से जोड़कर देखा है। अटल जी शिक्षा में प्राचीन धरोहर और अनुकूल आधुनिक विचारों का समन्वय चाहते थे।
    सूर्य प्रसाद दीक्षित ने अटल जी को उच्च कोटि के कवि रूप में देखा है। उनके काव्य भावपूर्ण होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते है। इसमें उनका सामाजिक दायित्व बोध भी समाहित है। अटल जी जनता पार्टी सरकार में विदेश मंत्री थे, फिर प्रधानमंत्री बने। दोनों ही रूप में उन्होंने राष्ट्रीय हित व स्वाभिमान पर आधारित विदेश नीति की स्थापना की। रहीस सिंह ने इसकी व्याख्या की है। एमके अग्रवाल ने अटल जी की आर्थिक नीति को देश को सकारात्मक सुधारों की दिशा में सफल माना है। वह लोगों को राहत देने और भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहे थे।
    डॉ सिद्धार्थ नाथ ने शारीरिक कष्ट के बाद भी उनकी जीवनी शक्ति को उत्कृष्ट बताया। इसी क्रम में संजीव कुमार ओझा ने अटल स्वास्थ के परंपरागत सूत्र का उल्लेख किया है। अटल जी आधुनिक सूचना एवं प्रौद्योगिकी में देश को पिछड़ता नहीं देख सकते थे। उनकी सरकार ने इसके लिए अनेक निर्णय किये। राष्ट्रीय दूर संचार नीति का निर्माण अहम फैसला था।
    अटल जी ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत पत्रकार के रूप में कई थी। के विक्रम राव ने इस संबन्ध में रोचक जानकारी प्रस्तुत की है। राजनीति में आने, प्रधानमंत्री बनने के बाबजूद पत्रकारिता से उनका लगाव बना रहा। उनके प्रेस नोट ,पत्रकार वार्ता में उनके इस रूप की बखूबी झलक मिलती थी। विक्रम राव ने उनके साथ अपने अनुभव भी साझा किए है। अटल जी के भाषण, कविता ,शब्द चयन का देश मुरीद था। अनुभूति और शब्दों के साधक के रूप में उन्हें हिमांशु सेन ने याद किया है।
    अटल जी की हाजिरजबाबी, हास्य व्यंग्य का कोई जोड़ नहीं था। संसद से लेकर जनसभा तक उनके कथन आज भी याद किये जाते है। पंकज प्रसून ने उनके हास्य बोध को रेखांकित किया है। बृजेन्द्र पांडेय ने इसी क्रम में भारतीय राजनीति के शाश्वत प्रश्न उठाये है। उन्होंने अटल जी की बहुदलीय सरकार से अनेक सारगर्भित बिंदु उकेरे है। अटल जी को प्रकृति से बहुत लगाव था। वह इसके संरक्षण के लिए सदैव जागरूक रहे। ध्रुवसेन सिंह ने विशेषज्ञ रूप में इसका विवरण दिया है। सर्वेश चन्द्र द्विवेदी ने अटल जी को राष्ट्राचेतना की प्रतिमूर्ति माना है। विशिष्ट व्यख्यान श्रृंखला के माध्यम से अटल जी के विविध आयाम की प्रस्तुति का यह उच्च स्तरीय प्रयास है।

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