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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    अभिनन्दन के लिए वरदान बनी कूटनीति

    By March 7, 2019 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान गुणगान करने वाले मासूम नहीं है। ये सभी पाकिस्तान की वास्तविकता जानते है। यहां भारत के किसी युद्धबंदी को रिहा करने का अधिकार प्रधानमंत्री को नहीं होता। ऐसे मसले वहां के सेना प्रमुख के नियंत्रण में रहते है।  इमरान का नेशनल असेम्बली में पूर्ण बहुमत नहीं है, इस कारण सेना पर उनकी निर्भरता कहीं ज्यादा है। सेना ने भी अभिनन्दन को छोड़ने का निर्णय भारत के साथ शांति सौहार्द बनाने के लिए नहीं किया था। भारतीय कूटनीति के चलते उनके पास कोई विकल्प ही नहीं बचा था।
       ऐसे में इमरान को शांति का मसीहा बताना हास्यस्पद है। ऐसा कहने वालों में वह चंद भारतीय शामिल है, नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के समय से मानसिक रूप से आहत चल रहे है। अभिनन्दन की पाकिस्तान में गिरफ्तारी को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत गंभीरता से लिया था। बताया जाता है कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए बड़ी सैन्य कार्यवाई का निर्णय ले लिया गया था। इसके लिए मिसाइलें तैयार रखी गई थी।
    भारत बड़ी और भीषण कार्यवाई के लिये ब्रम्होस मिसाइलें तैयार कर ली थी। अमेरिका को इसका अनुमान था। उसने पाकिस्तान को चेतावनी दी, जेनेवा संधि के पालन का निर्देश दिया। वैसे भी एफ सिक्सटीन के भारत के विरुद्ध प्रयोग के प्रयासों से अमेरिका नाराज था। पाकिस्तान ने इस्लामिक देशों, अमेरिका, रूस से मदद मांगी। किंतु सभी ने उसे अपनी चौखट से ही भगा दिया।
    भारत के मोदी विरोधी तत्वों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि पाकिस्तान ने पहले कभी इतने कम समय मे भारतीय युद्धबंदी को नहीं छोड़ा। इसमें वहाँ के प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं होती। इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि ऐसा इमरान के आने से हुआ। यह जेनेवा संधि का भी कमाल नहीं है। इसका तो पाकिस्तान हमेशा उल्लंघन करता रहा है। करगिल युद्ध के दौरान पायलट अजय आहूजा, कैप्टन सौरभ कालिया के साथ पाकिस्तान ने बर्बर व्यवहार किया था। पायलट नचिकेता को दबाव कई दिनों बाद छोड़ा था।
    प्रधानमंत्री ने इस संबन्ध में दो स्तर पर प्रयास किये। एक तो उन्होंने पाकिस्तान को सीधे चेतावनी दी कि अभिनन्दन को कोई नुकसान पहुचाया गया तो पाकिस्तान को गंभीर प्रयास करने होंगे। दूसरा यह कि कूटनीतिक प्रयास किये गए। वियना संधि को उठाया गया। इसमें युद्धबंदी को सुरक्षित छोड़ने का निर्देश है। पाकिस्तान चाहता था कि अभिनन्दन को अपनी जेल में रखकर भारत पर दबाब बनाया जाए। इसलिए उसने कहा कि भारत की सर्जिकल स्ट्राइक युद्ध नहीं है। लेकिन मोदी की चेतावनी और कूटनीति ने असर दिखाया। यह मोदी के नेतृत्व का प्रभाव था कि विश्व समुदाय ने अभिनन्दन को छोड़ने के लिए पाकिस्तान पर दबाब बनाया।  यही सब कारण है कि सफल सैन्य कार्यवाई के लिए सेना के साथ साथ राजनीतिक सत्ता के नेतृत्व की भी तारीफ की जाती है। सैनिक अपनी मर्जी से किसी देश की सीमा के पार जा कर सर्जिकल स्ट्राइक या युद्ध नहीं करते। इसके लिए नेतृत्व का निर्देश आवश्यक होता है।
    सैन्य कमांडर भी उसी के साथ बैठ कर रणनीति बनाते है। सफलता का श्रेय सेना के साथ साथ नेतृत्व को भी दिया जाता है। लेकिन भारत में विपक्ष के कुछ नेता नरेंद्र मोदी का सकारात्मक राजनीति व राष्ट्रनीति के अनुरूप नाम लेने से घबड़ाते है। उन्हें लगता है कि इससे मोदी की लोकप्रियता पहले के मुकाबले ज्यादा हो जाएगी। वैसे भी वह इस समय लोकप्रियता के शिखर पर है। विपक्ष का कोई भी नेता उनके आस पास भी नहीं है। इसलिए नेतृत्व को दरकिनार कर ये नेता अपने संकुचित विचारों का प्रदर्शन कर रहे है। ऐसा नहीं होता कि सेना उठे और दूसरे देश में सर्जिकल स्ट्राइक करके आ जाये। नेतृत्व इसके लिए रणनीति बनाता है, उसी के अनुरूप कूटनीतिक प्रयास करता है। नरेंद्र मोदी ने इन दोनों मोर्चो पर दिन रात मेहनत से कार्य किया। इसी का परिणाम था कि पाकिस्तान को कहीं से भी समर्थन नहीं मिला। अमेरिका ने फटकारा। श्रीलंका ब्रिटेन, फ्रांस, रूस ,यहां तक कि चीन ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर रोक लगाने को कहा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य अमेरिका, ब्रिटेन ,फ्रांस ने आतंकी अजहर मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने का प्रस्ताव किया है।
    यदि ऐसा हुआ तो उसे मिलने वाले धन पर रोक लगेगी। पाकिस्तान को हथियार देने पर अंकुश लगेगा। अमेरिका वैसे भी एफ सोलह के पाकिस्तान द्वारा प्रयोग से नाराज है। क्योंकि ये विमान अमेरिका ने उसे आतंकवाद पर निगरानी के लिए दिए थे। यह भारतीय नेतृत्व की मजबूती के प्रमाण है कि उसने इमरान के वार्ता के प्रयासों को दो बार इनकार कर दिया। मोदीं ने कहा कि वार्ता का समय निकल गया है, अब आतंक के खिलाफ कार्यवाई होगी। यह नेतृत्व की मजबूती के प्रमाण है कि भारतीय सेना के तीनों अंगों के प्रमुखों ने एक साथ पाकिस्तान को चेतावनी दी। कहा कि भारतीय सेना पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तैयार है। नेतृत्व का आदेश मिलते ही कार्यवाई शुरू हो जाएगी।
    रूस के राष्ट्रपति ने मोदी को फोन करके समर्थन का वादा किया।  मोदी ने अपने सभी दायित्वों का बखूबी निर्वाह किया है। कैसी बिडंबना है कि भारत के कई नेता अभिनन्दन को छोड़ने के लिए इमरान खान की तारीफ तो कर रहे है, लेकिन क्या मजाल कि वह अपने प्रधानमंत्री की कूटनीति को भी इसका श्रेय दें। यह वियना संधि का नहीं मोदी की कूटनीति का कमाल है। पाकिस्तान चाहता था कि अभिनन्दन को अपनी जेल में रोककर वह भारत पर दबाब बनाएगा। इसी लिए पाकिस्तान ने कहा था कि भारत की ओर से हुई सर्जिकल स्ट्राइक युद्ध नहीं थी। इस लिए वियना संधि अभिनन्दन मसले पर लागू नहीं होती। पाकिस्तान वैश्विक संधियों का कितना पालन करता है यह भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में देखा जा सकता है। उन्हें ईरान सीमा से गिरफ्तार किया गया, और आरोप लगाया गया कि वह पाकिस्तान में जासूसी कर रहे थे। उन्हें नियमानुसार कानूनी सहायता नहीं दी गई। उनका मामला अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में है। जहां भारतीय वकील के तर्क विश्व स्तर पर चर्चित है।
    इमरान को तारीफ करने वाले वही नेता है, जो नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर व्यंग व तंज करते थे।
    लेकिन आज संकट के समय इन विदेश यात्राओं की परख हो गई। भारत की तरफ से की गई सर्जिकल स्ट्राइक का दुनिया के किसी देश ने विरोध नहीं किया, अभिनन्दन को छोड़ने के लिए मोदी के आह्वान पर दबाब बनाया गया।

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