सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की प्रतिध्वनि

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की अभी अनुकूल परिस्थिति नहीं है, फिर भी अयोध्या में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रतिबिंब दिखाई देते है, उंसकी प्रतिध्वनि सुनी जा सकती है। दक्षिण भारत में निर्मित श्रीराम की भव्य मूर्ति के अनावरण ने ऐसे ही वातावरण का निर्माण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या में संबोद्धन भी इसी भावना के अनुरूप था। श्रीराम संग्रहालय, विश्व के अनेक स्थानों पर होने वाली रामलीलाओं के कलाकारों का सम्मान, कोदण्ड मूर्ति पर डाक टिकट, महंत नृत्यगोपालदास के इक्यासीवें जन्मोत्सव आदि कार्यक्रमों ने यहां के माहौल को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से ओतप्रोत कर दिया। क्योंकि इसमें केवल उत्तर और दक्षिण भारत की झलक के साथ साथ अन्य देशों के रामभक्तों की सहभागिता थी। यह प्रमाणित हुआ कि भारतीय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की सीमाएं बहुत व्यापक है।
योगी आदित्यनाथ ने इसी के प्रति गर्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति को विस्मृत कर कोई राष्ट्र आगे नहीं बढ़ सकता। केंद्र में जब से नरेंद्र मोदी की सरकार बनी है, तब से देश का गौरव बढ़ रहा है। इसका अनुभव किया जा सकता है। हम अपनी जड़ों से जुड़ रहे हैैं, अपनी संस्कृति को गर्व के साथ अपना  रहे हैं। देश में सकारात्मक सोच की सरकार है, जो आस्था एवं विरासत के साथ देश को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।
यह भी मानना पड़ेगा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार केंद्र के प्रयासों में सहयोगी की भूमिका का बखूबी निर्वाह कर रही है। यह सहयोग सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की गौरव गाथा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र की विकास और कल्याणकारी योजनाओं को भी प्रदेश में बेहतर ढंग से लागू किया गया है। इतना ही नहीं कई क्षेत्रों में तो राष्ट्रीय स्तर के कीर्तिमान भी स्थापित हुए। प्रयागराज कुंभ भव्य व दिव्य आयोजन की सराहना पूरे विश्व में हुई है। सैकड़ों देशों के प्रतिनिधि यहां आए थे। इसके पहले मारिसश के प्रधानमंत्री बड़े भक्तिभाव से प्रयागराज कुंभ में आये थे। लेकिन जल स्वच्छ न होने के कारण उन्होंन स्नान नहीं किया था। इस बार उनकी यह मनोकामना पूरी हुई, क्योंकि कुंभ में अनवरत स्वच्छ जल का प्रवाह हो रहा था।
नमामि गंगे योजना भी फलीभूत हो रही है। योगी ने कुंभ में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वच्छता कर्मियों का पद प्रक्षालन किए जाने को इतिहास की अद्भुत घटना बताया। प्रधानमंत्री ने यह साबित किया कि भारतीय समाज में राजा रंक के बीच भेद नहीं रहा है, न ही अस्पृश्यता के लिए कोई जगह है। राम की पावन जन्मभूमि से सबके सुख और सबके मंगल का ऐसा संदेश जाना चाहिए, जिससे भव्य राममंदिर निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो सके। समाज के बारे में जो अंत:करण से सोचेगा, देश उसके साथ खड़ा होगा।
योगी ने तुलसी स्मारक भवन में कोदंड राम की प्रतिमा का अनावरण किया, रामजन्मभूमि एवं हनुमानगढ़ी का दर्शन किया। इसके अलावा राम की पैड़ी के विकास कार्य, भजन सत्संग स्थल तथा बस स्टेशन के निर्माण का निरीक्षण किया। काष्ठ कला की दुर्लभ कृति कोदंड राम की प्रतिमा को कर्नाटक के कावेरी कर्नाटक स्टेट आर्ट्स एवं क्राफ्ट एम्पोरियम से खरीदा गया है। इसे बंगलुरू के एम राममूर्ति व एम भूपति ने बनाया है।
यह मात्र मूर्तिकला नहीं है, बल्कि इसमें निर्माण कर्ताओं की भावना भी समाहित है। इसीलिए यह इतनी भव्य बनी है। यह सांस्कृतिक राष्ट्रभाव का प्रमाण है। राम भारत ही नहीं विश्व के अनेक देशों में पूज्य है। अयोध्या में ठुमक चलत रामचन्द्र के बालरूप से लेकर राजा राम तक की पूजा होती है। मिथिला में राम वर है, माता सीता उनके साथ है। वन गमन के मार्ग पर वह वनवासी रूप में है, दक्षिण भारत में, यह कह रघुपति चाप चढ़ावा, वह धनुषधारी है, क्योंकि यहां वह रावण से युद्ध की तैयारी करते है। इसी धनुर्धारी रूप को दक्षिण में कोदण्ड कहा गया। उनके धनुष का नाम कोदंड था। इसके अलावा विश्व के पचासों देशों में रामकथा और रामलीला प्रचलित है।
अयोध्या में योगी आदित्यनाथ ने कैरेबियन देशों की रामलीला यात्रा, अयोध्या की पुरातात्विक रिपोर्ट, थारूओं की कला संस्कृति एवं अवध की लोक चित्रकला पुस्तक का लोकार्पण किया। जिसमें रामकथा की विस्तृत व अनोखी जानकारी मिलती है। अनेक देशों में उत्सव की भांति रामलीला का आयोजन किया जाता है। अयोध्या शोध संस्थान में हस्तशिल्प में राम संग्रहालय की स्थापना की गई है, जिसमें अब तक राम पर आधारित धातु, वस्त्र, काष्ठ, चर्म, टेराकोटा आदि शिल्पों में देश और विदेश की लगभग पच्चीस सौ कलाकृतियां संग्रहीत है।योगी ने भारतीय डाक विभाग द्वारा प्रतिमा पर विशेष कवर का भी अनावरण किया।
यह कहा जा सकता है कि केंद्र में नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद अयोध्या को उसके गौरव के अनुकूल विकसित किया जा रहा है। मोदी सरकार ने राम सर्किट के निर्माण को प्रारंभ कराया। अयोध्या सहित श्रीराम से जुड़े प्रत्येक स्थान इससे जुड़ेंगे। योगी आदित्यनाथ की यहाँ के विकास में विशेष रुचि है। वह यहां धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने की योजनाएं लागू कर रहे है। अयोध्या की दीपावली वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित हो रही है। रामकथा और रामलीला की विश्वव्यापी जानकारी यहाँ उपलब्ध कराई जा रही है।

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