चीन की खतरनाक चालबाजियां

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file photo

हाल ही में चीनी सैनिकों द्वारा अरुणाचल प्रदेश के सियांग जिले के तूतिंग क्षेत्र में एक किलोमीटर अंदर घुसकर सड़क बनाने की कोशिश का कोई वाजिब निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। इसे चीन की दुर्नीति के अलावा कुछ नहीं कहा जा सकता। हालांकि भारतीय सैनिकों ने उनको वापस जाने पर मजबूर कर दिया और इस समय उनका निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। आज की स्थिति में वहां भारतीय सुरक्षा बलों का कब्जा है। इससे तो हम राहत की सांस ले सकते हैं कि तूतिंग में डोकलाम जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई। किंतु जब भारतीय तिब्बती सीमा पुलिस ने उन्हें काम रोकने के लिए कहा तो उनका जवाब था, हम अपने क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उसके बाद सेना को वहां हस्तक्षेप करना पड़ा।

आखिर चीन ने ऐसा क्यों किया? ध्यान रखिए, जिस इलाके में ये सड़क बना रहे थे वह 3488 किलोमीटर वास्तविक नियंत्रण रेखा का हिस्सा नहीं है जिस पर मतभेद माना जाता है। वस्तुत: इस इलाके में पहली बार यह घटना हुई है। यह पहलू ज्यादा चिंताजनक है। यही नहीं जिस समय की यह घटना है उस समय हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से नई दिल्ली में सीमा विवाद पर बातचीत कर रहे थे। तो एक ओर बातचीत और दूसरी ओर ऐसी हरकत का क्या अर्थ हो सकता है? भारत को परेशान करने और दबाव में लाने के अलावा इसका कोई उद्देश्य हो ही नहीं सकता।

चीन ने पूरे अरुणाचल पर अपना दावा जताते हुए इसे दक्षिणी तिब्बत कहता है। इस घटना पर चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग की टिप्पणी में कहा भी गया कि हमने अरुणाचल प्रदेश के वजूद को कभी माना ही नहीं। वे कहते हैं कि सीमा मुद्दे पर हमारी स्थिति स्पष्ट एवं एक जैसी है तो इसका मतलब यही है कि जिन भागों पर चीन का दावा है वे चीन के ही हैं और इस सोच में कोई बदलाव नहीं है।

हालांकि भारतीय सीमा में घुसने और सड़क बनाने की सूचना से चीन ने इनकार किया है। पर उनके बयान से ही कुटिलता साफ झलक जाती है। जाहरि है, हम यह नहीं मान सकते कि चीन आगे से ऐसा नहीं करेगा। वह आगे भी इस तरह हमें उकसाने वाली कार्रवाई करता रहेगा। उसकी रणनीति अरुणाचल पर अपने दावे को बनाए रखने की है। सीमा विवाद पर वह बातचीत करेगा, लेकिन समाधान के किसी सूत्र से सहमत भी नहीं होगा। भारत को ऐसी स्थिति से निपटने के लिए हर क्षण तैयार रहना होगा। 

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