चालान नहीं जागरूकता की जरुरत

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file photo

सड़कों पर सुरक्षित चलना आज देश भर में एक गंभीर समस्या है। कहने के लिए तमाम कानून हैं और पुलिस के अलावा ट्रैफिक पुलिस का भी सृजन इसे सुनिश्चित करने के लिए किया गया है, लेकिन हकीकत यह है कि समस्या अपने मूल स्वरूप से हर दिन के साथ कहीं और अधिक बढ़ती जा रही है।

लेकिन हकीकत यह है कि आम लोगों से सर्वाधिक गहन रूप से जुड़ी यह समस्या लोगों की गलती को सामने लाती है तो विभागों की कमियों को भी उभारती है। दरअसल सड़क सुरक्षा के कई पक्ष हैं और इसलिए इसके बारे में विभिन्न व्यवस्थाएं भी की गई हैं, पर विचित्र बात यह है कि इसका जिक्र उठाए जाने पर हेलमेट लगाने की जरूरत को छोड़कर अन्य किसी नियम तथा जरूरत का बेहद कम जिक्र होता है। कारवाई भी इसी को लेकर अधिक की जाती हैं।

यही कारण है कि हाल ही में मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन के बाद हालाँकि सभी तरह के उल्लंघन को लेकर दंड की राशि बढ़ाई गयी, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में हेलमेट का मामला ही रहा! इस तरह के एक पक्षीय रूप से या निर्दोष को किसी न किसी मामले में फंसाकर अपराधी घोषित करने में पुलिस के ज्यादा सक्रिय रहने की छवि बनती है, और वह भी एक तरह की बड़ी समस्या ही है।

ऐसे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह कहना कि चालान नहीं जागरूकता पर जोर देने की जरुरत है। यह मात्र एक बयान नहीं बल्कि पुलिस महकमे के लिए एक सफल दिशानिर्देश सिद्ध हो सकता है वयस्कों द्वारा वाहन चलाने या दो पहिया वाहन पर दो या दो से अधिक लोगों को बैठाने के मामले में हो या विभिन्न आयु श्रेणियों के लोगों द्वारा शराब पीकर फर्राटा गाड़ी दौड़ाने की बात हो या सीट बेल्ट लगाकर गाड़ी चलाने की बात हो! जुर्माना ठोक देना ही हल नहीं हो सकता! बल्कि इसके लिए लोगों की मानसिकता भी बदलनी होगी। अनुचित को उसी रूप में स्थापित करना होगा। यह धारणा कतई नहीं पनपने देनी चाहिए कि कुछ ले देकर काम चल जाएगा बल्कि यह बताना होगा कि काम चल भी जाए तब भी खतरा बना रहेगा।

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