शंख बजाने से कभी भी हृदय रोग नहीं होता

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घर के मंदिर में न रखें दो शंख

धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि घर के मंदिर में दो शंख नहीं रखना चाहिए। मंदिर में दो शंख रखना अशुभ माना जाता है। हिंदू धर्म में शंख का बहुत महत्व है। कोई भी पूजा शंख ध्वनि के बिना अधूरी मानी जाती है। पुराणों के अनुसार शंख की उत्पति समुद्र मंथन के समय हुई है। शंख के अनेक चमात्कारी लाभ हैं।

ब्रहृमवैव्रत पुराण के अनुसार पूजा करते समय शंख में जल रखने से और उस जल को पूजा स्थल पर छिड़कने से वातावरण शुद्ध होता है। शंख में गंधक और वैâलशियम होता है। इसलिए उस में रखा जल रोगमुक्त होता है। यह जल वायुमंडल में उन नकारात्मक शक्तियों को नष्ट करता है। शंख बजाने वाले व्यक्ति को कभी भी हृदय रोग नहीं होता है। इससे कंठ मधुर होता है।

चरक संहिता में भी शंख के अनेक बताएं गएं हैं। शंख से बनाई भस्म से पीलिया, पथरी और पेट के अनेक रोग दूर हो जाते हैं। योग शास्त्र में भी शंख मुद्रा का विशेष महत्व बताया गया है।

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