जिस डॉक्टर ने ये पर्चा लिखा है उसको सलाम, और जिस मेडिकल स्टोर वाले ने दवा दी उसको 21 तोपों की सलामी

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गरीबों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करने का यह कौन सा तरीका है जो दवाओं के नाम अबूझ पहेली भरे शब्दों में लिखा जाये और पढ़ने वाला पढ़ भी न पाए, क्या यह मरीजों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ नहीं, क्या आज की ज़िंदगी में हम सब गैर ज़िम्मेदार हो गए हैं ? डॉक्टरी भाषा में लिखे ये शब्द न हम पढ़ पा रहे हैं और न आप! जबकि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का स्पस्ट आदेश है कि मरीजों के पर्चे पर साफ़ शब्दों में लिखा जाये, लेकिन फिर भी डॉक्टर्स इसे सीरियस नहीं लेते।

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