Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Friday, May 1
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»लखनऊ

    संगीत साधिका रानी रूपमती का हुआ नाट्य मंचन

    ShagunBy ShagunMarch 22, 2024Updated:March 22, 2024 लखनऊ No Comments6 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 4,348

    नाटक रानी रूपमती सुप्रसिद्ध दुर्ग मांडवगढ़ की संगीत को समर्पित अद्भुत प्रेम कथा

    लखनऊ, 22 मार्च: संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से संत गाड्गेजी महाराज प्रेक्षागृह, उ0 प्र0 संगीत नाटक अकादमी लखनऊ में नाट्य संस्था भरत रंग द्वारा नाटक रानी रूपमती का मंचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ लोक आयुक्त के उप सचिव अजय कुमार वर्मा तथा संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के सहायक निदेशक डॉ राजेश कुमार अहिरवार एवं सेवा भारती अवध प्रान्त के अध्यक्ष रवींद्र सिंह गंगवार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। ऐतिहासिक नाटक रानी रूपमती का लेखन एवं निर्देशन चन्द्रभाष सिंह द्वारा किया गया, जिसे मुख्य अतिथियों एवं गणमान्य दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया।

    नाटक रानी रूपमती सुप्रसिद्ध दुर्ग मांडवगढ़ की संगीत को समर्पित अद्भुत प्रेम कथा है। यह नाटक रूपमती व बाज बहादुर की अधूरी प्रेम कहानी है, जिसका कारण बना बादशाह अकबर।बायजीद खान जिसे लोग बाज बहादुर कहते थे मालवा का सुल्तान तथा रूपमती धर्मपुर के राजा यदुराय परभार की पुत्री थी जो कि माँ नर्मदा की समर्पित उपासिका है। बाज बहादुर व रूपमती के प्रेम का आधार व संवाहक संगीत है। दोनों ही उच्च कोटि के कलाकार है, प्रेम की पवित्रता गंभीरता व मर्यादा का पालन करते है। सामाजिक ताने बाने को बुनती कहानी की आत्मा संगीत है। बाज बहादुर व रूपमति रोजाना नर्मदा के किनारे संगीत की साधना करते है, जब ये बात फैलती है तो लोग उसके चरित्र पर उंगली उठाने लगते है। रूपमती के पिता राजा यदुराय परभार रूपमति का विवाह ठाकुर बल्देव सिंह के साथ तय कर देता है। रूपमति अपने कुल और पिता की मर्यादा के लिए विवाह करने को तैयार हो जाती है परन्तु बाज बहादुर का संगीत उसे अपनी तरफ बरबस खीचता है।

     

    रूपमति आख़िरी बार बाज बहादुर से मिलने नर्मदा के किनारे पहुचती है जहां पर उसका होने वाला दूल्हा रूपमति के पिता को लेकर पहुँच जाता है और भला बुरा कह कर विवाह करने से मना कर देता है। विवश होकर रूपमती का पिता रूपमती को अपने हाथों से जहर पीने के लिए देता है। रूपमती अपने पिता की आज्ञा मानकर उस जहर को नर्मदा मइया का प्रसाद समझ कर पीने के लिए तैयार हो जाती है, परंतु उसकी अंतरात्मा उसे रोकती है और वह धरमपुरी को छोड़ कर मांडव के लिए निकल जाती है।

    उधर मांडव में बाज बहादुर को सूचना मिलती है कि उनके वालिद सुजात खान की हालत नाजुक है, खबर पाकर बाज बहादुर कुछ सैनिकों के साथ सारंगपुर के लिए रवाना होता हैं संयोग से रूपमती और बाज बहादुर की मुलाकात रास्ते पर हो जाती है। बाज बहादुर को जब पता चला कि रूपमती अपना सब कुछ छोड़कर उनके पास मांडव रहने के लिए आ रही थी तो उन्हें अपने सैनिकों के साथ जहाज महल में रहने के लिए भेज देता है और खुद अकेले सारंगपुर के लिए निकल जाता है। बाज बहादुर के पिता सुजात खान के मरने के बाद रूपमति बाज़बहादुर के साथ मिलकत मालवा की प्रजा के हित में अनेकों काम करते है, नर्मदा से नहर खोदकर मांडव तक लाते है और पूरे ऊसर बंजर निवाड़ प्रान्त को हरा भरा बनाते है और साथ ही साथ संगीत की साधना भी करते है, मालवा की प्रजा रूपमति को रानी का दर्जा देती है चारो तरफ रूपमति की जय जयकार होने लगती है। इधर मालवा सूबेदार हाफ़िज खान मालवा का सुल्तान बनने का सपना देखने लगता है और वह अकबर के सिपहसालार बैरम खां औऱ अदहम खान के साथ मिलकर षणयंत्र करता है। संगीत सम्राट तानसेन को जब पता चलता है तो वह अकबर को समझाने का प्रयास करता है और कहता है कि बाज बहादुर एक कलाकार है और कलाकार का युद्ध से कोई लेना देना नहीं होता है।

     

    तानसेन युद्ध से पहले खुद मांडव जाकर बाज बहादुर की परीक्षा लेने और वहां की स्थिति का जायजा लेने की आज्ञा मांगता है, अकबर तानसेन की बात मानकर मांडव जाने देता है। तानसेन बाज बहादुर और रूपमती से मिलता हैं और हर तरह से परीक्षा लेकर पठान और मुगलों के बीच जो बैर था उसे मित्रता में बदल देता है। जब यह बात हाफ़िज़ खान और अदहम खान को पता चलती है तो दोनों मिलकर मांडव से लौटते वक्त तानसेन को गिरफ्तार कर लेते है और अकबर तक खबर पहुंचते हैं कि बाज बहादुर ने तानसेन को गिरफ्तार कर लिया और वह दिल्ली पर चढ़ाई करने वाला है। अकबर गुस्से में आकर अदहम खान को मांडव पर चढ़ाई का आदेश देता है। मालवा की सेना युद्ध के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थी और मालवा का सूबेदार खुद मुगलों के साथ मिलकर मांडव में हमला कर देता है, रानी रूपमती बाज बहादुर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर युद्ध करती है अंत में रानी रूपमती गिरफ्तार कर ली जाती है और घायल बाज बहादुर छीप जाता है। अदहम खां की रूपमति पर नियत खराब हो जाती है वह रूपमति के साथ निकाह करने के लिए उस पर दबाव डालता है।

    इधर सुल्तान बाज बहादुर रूपमती तक संदेश पहुंचना है कि वह तीन दिन तक उसका इंतजार करें वह तीसरे दिन सूरज डूबने से पहले मालवा पर हमला करेगा तीसरा दिन बीतने को होते हैं बाज बहादुर को उम्मीद होती थी की बुरहानपुर, खानदेश, व असीरगढ़ की फौजे उसका साथ देंगी परन्तु मुगलों के ख़िलाफ़ कोई साथ नहीं देता। बाज बहादुर अकेले ही मांडव के लिए निकलता है। रूपमति तीन दिन तक इंतजार करती है सूरज डूबने को होता है वह दुल्हन के रूप में बैठे- बैठे सारी उम्मीद छोड़कर कर हीरा चाट कर अपनी जान दे देती है। बाज बहादुर रूपमती के पास पहुंचता तो है परंतु तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

    अदहम खान और बाज बहादुर पर युद्ध होता है और जब बाज बहादुर को पता चलता है कि रूपमती अब नहीं रही तो उसके हाथ से तलवार गिर जाती है और आदम खान पीछे से बहादुर पर तलवार से वार कर देता है तभी अकबर वहां पहुंच जाता है जिसे की तानसेन द्वारा सच्चाई बताई जा चुकी होती है। अकबर सैनिकों को आदेश देता है कि अदहम खान को गिरफ्तार कर ले । अकबर अफसोस जाहिर करता है कि उसकी वजह से हिंदुस्तान के दो बेजोड़ कलाकार इस दुनिया से कुच कर गए।

    डेढ़ घंटे से अधिक अवधि के नाटक ने अपनी कहानी और कलाकरों के अभिनय से दर्शकों को बाधें रखा। नाटक में जूही कुमारी, बृजेश कुमार चौबे, निहारिका कश्यप, सुन्दरम मिश्रा, प्रणव श्रीवास्तव, करन दीक्षित, कोमल प्रजापति, अनामिका रावत, अभय प्रताप सिंह, शशांक तिवारी, पीयूष राय, श्रेयांश यादव, प्रदीप मिश्रा, ज़ौरेज़ कलीम शुभम कुमार, कंचन शर्मा आदि कलाकरों ने अपनी-अपनी बेहतरीन भूमिका निभाई वहीं सह-निर्देशन सुन्दरम मिश्रा प्रकाश संयोजन मो0 हफीज , पार्श्व संगीत चन्द्रभाष सिंह, सेट जामिया शकील एवं शिवरतन, मेकअप सचिन गुप्ता का रहा।

    Shagun

    Keep Reading

    The residents of Banda are filled with pride upon seeing Banda's name ranked among the very best in the world!

    विश्व में बांदा का अव्वल दर्जे में नाम देख गर्व में बांदावासी!

    ‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन

    ‘सेल्स’ अब सिर्फ बिजनेस नहीं, जीवन का जरूरी कौशल है! मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की नितीन ढबू की किताब का विमोचन

    Grand Launch of 'Gudiya Ka Byah'—an Engaging Radio Play for Children

    बच्चों के लिए दिलचस्प रेडियो नाटक ‘गुड़िया का ब्याह’ का भव्य विमोचन

    Public toilet to be constructed soon at Bhoothnath Market!

    लखनऊ : भूतनाथ मार्केट में जल्द बनेगा पब्लिक टॉयलेट!

    'Raat': Sleep is broken, but life drags on - A review of Hare Prakash Upadhyay's story.

    ‘रात’ : नींद टूटती है, लेकिन जीवन घिसटता रहता है – हरे प्रकाश उपाध्याय की कहानी पर एक समीक्षा

    Sahir and Amrita's Untold Love Story on Stage! 'Wo Afsana' Staged to Rousing Acclaim in Lucknow.

    साहिर-अमृता की अनकही प्रेम-कहानी मंच पर! ‘वो अफसाना’ का लखनऊ में धमाकेदार मंचन

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts

    जानो तो बुद्ध की सहजता सबसे सहज वरना अति जटिल

    April 30, 2026
    From the Tennis Court to the World of AI: Elysia Nicolas Launches ‘BookKards’ in Collaboration with Meta India

    टेनिस कोर्ट से AI की दुनिया तक: Eylsia Nicolas ने Meta India के साथ मिलकर लॉन्च किया ‘BookKards’

    April 30, 2026
    Inferno on the Return from Vaishno Devi: A Family Wiped Out in an Instant on the Alwar Expressway

    वैष्णो देवी से लौटते वक्त आग का तूफान: अलवर एक्सप्रेसवे पर एक पल में खत्म हुआ परिवार

    April 30, 2026
    Joke of the Day: Trump's Mess

    जोक ऑफ़ द डे : ट्रम्प का रायता

    April 30, 2026

    भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन: स्वच्छ भविष्य की ओर एक ठोस कदम

    April 30, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading