सीमैप ने शुरू किया दो दिवसीय आन लाइन प्रशिक्षण
केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ द्वारा आयोजित दो दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन बुधवार को सीमैप के निदेशक डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने किया। दो दिन चलने वाले इस कार्यक्रम में बुंदेलखंड के 14 जिलों के किसानों ने भाग लिया। डॉ. प्रबोध कुमार त्रिवेदी ने कहा कि सुगंधित पौधों की खेती, प्रसंस्करण तथा विपणन विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण जरूरी है। प्रशिक्षित किसान हमेशा उन्नतशील खेती करने के लिए अग्रसर रहेगा और वह खेती से ज्यादा लाभ ले सकता है।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड को एरोमेटिक हब बनाने हेतु सीमैप एवं तीन अन्य प्रयोगशालाओं जैसे सीएसआईआर-आईआईआईएम, जम्मू, एफएफडीसी, कन्नौज तथा बुंदेलखंड विश्वविध्यालय के द्वारा यह परियोजना चलाई जा रही है। इस परियोजना से बुंदेलखंड के किसानों की आर्थिक स्थित को बदलने के लिए सगंध फसलों की जानकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से मिल रही है । उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के 14 जिलों में लगभग 900 एकड़ से अधिक का क्षेत्र सुगंधित पौधों से आच्छादित किया जा चुका है और 20 आसवन इकाइयों को किसानों के क्लस्टर बनाकर किसानों के खेतों पर स्थापित किया जाएगा। खेती के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं भंडारण की भी जानकारी किसानों से साझा कि गई ताकि राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्तायुक्त उत्पादों का उत्पादन किया जा सके।
डॉ. आलोक कालरा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया एवं औषधीय एवं सगंध पौधों के राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। डॉ. आर.के. श्रीवास्तव , कोआर्डिनेटर, डीबीटी प्रोजेक्ट ने परियोजना की गतिविधियों के बारें में जानकारी दी तथा भविष्य में के जाने वाली योजनाओं के बारें में बताया।
आज के तकनीकी सत्र में एस.वी. शुक्ला, निदेशक, एफएफडीसी, कन्नौज ने वैश्विक परिदृश्य और भारत में आवश्यक तेलों की बाजार क्षमता विषय पर किसानों से चर्चा की। इसके पश्चात, डॉ. संजय कुमार ने नीबूघास तथा पामरोजा के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियाएँ को किसानों से साझा की। इस क्रम में इंजी. सुदीप टंडन ने सगंध फसलों की प्राइमरी प्रोसेसिंग एवं उनके भंडारण करने की तकनीकियों को किसानों से साझा की । ई मनोज सेमवाल ने कार्यक्रम का संचालन किया।







