दोस्ती की क़द्र भी करें

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समय के साथ बदल रहे हैं दोस्ती के मायने भी

दोस्ती अच्छी होती हैं। दिल की हर वो बात जो हम माता-पिता या भाई-बहन से नहीं कर पाते दोस्तों के साथ बांटते हैं। इनके साथ हमारा ज्यादा वक्त बीतता हैं। कई बार उनकी आदतें हमारे जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। किशोर और युवा अवस्था में सबसे ज्यादा दोस्त बनते हैं। ऐसे में जाने-अनजाने हम वेवजह दबाब में आ ही जाते हैं। किशोर अवस्था बेहद ही नाजुक दौर मानी जाती हैं। यह ऐसी अवस्था हैं जहां मानसिक ही नाजुक दौर मानी जाती हैं। यह ऐसी अवस्था हैं जहां मानसिक और शारीरिक बदलाव हो रहे होते हैं। इस समय भावनात्मक और बौद्धिक बदलाव से भी किशोर गुजरते हैं। यही उम्र होती है जब दोस्तों का दबाव भी बनने लगता है।

मगर बात जब दोस्ती की हो, तो इसके दोनों पहलू सामने आते हैं, सकारात्मक और नकारात्मक। अच्छे दोस्त जीने की सही दिशा तय करते हैं। उनकी संगति में हर कोई पढ़ने-लिखने के प्रति गंभीर होता हैं। रचनात्मक चीजें करता हैं। अपनी जिम्मेदारियां निभाता हैं। माता-पिता का सम्मान करता हैं। इस लिहाज से देखें, तो हम उम्र दोस्ती सही है।

लेकिन समय के बदलाव के साथ-साथ दोस्ती के मायने बदल गए हैं। अब दोस्ती के नकारात्मक पहलू सामने आने लगे हैं। दोस्तों के दबाव में किशोर ही नहीं युवा भी जिद करने लगे हैं। घर के हर सदस्य से बेतुकी बातें करने लगें हैं। बड़ों का सम्मान तो कहीं गुम हो गया है। दोस्तों के गलत प्रभाव में आकर गलत रास्ते पर चलने लगे हैं। कई बार तो दोस्ती के दबाव में अवसाद और हीन भावना घर कर लेती हैं। बच्चों पर यह प्रभाव आसानी से देखा जा सकता है।

जिंदगी में दोस्त का होना जरूरी हैं। क्योंकि व्यक्तित्व के विकास और पढ़ाई में, हर जगह इनकी भूमिका होती हैं। भाई-बहन से ज्यादा वक्त बच्चे दोस्तों के साथ बिताना पसंद करते हैं। इसलिए यह जरूरी हैं कि आप दोस्ती का सही मतलब समझें। कौन से दोस्त आपके लिए अच्छे हैं। कई बार गलत दोस्ती में पड़कर किशोर और युवा गलत रास्ता अपना लेते हैं। उन्हं ऐसे दोस्तों से सतर्क रहना चाहिए। अगर वह कोई ऐसे काम के लिए कह रहे हैं जो आपको पसंद नहीं, तो उन्हेंसाफ तौर पर मना कर सकते हैं। दोस्तों के कपड़े, एक्सेसरीज, गैजेट्स देखकर किशोर-किशोरियां देखा-देखी करते हैं। उन्हं देखकर वैसा ही करने की जिद करते हैं। इन सब बातों पर ध्यान रखना जरूरी हैं कि आपके लिए क्या सही हैं क्या गलत।

हमेशा दोस्तों से ऐसी बातें सीखें तो आपके लिए अच्छी हो। दोस्तों का दिखावटीपन खुद पर अमल न करें। श्रुति अपने परिवार में सबकी चहेती थी। मगर दोस्तों के चक्कर में पड़कर वह हर दिन एक नई मांग करने लगी। जिस कारण घर में सब उससे नाराज रहने लगे। दोस्तों के फेर में पड़ी श्रुति में सब उससे नाराज रहने लगे। दोस्तों के फेर में पड़ी श्रुति कर रवैया बदलने लगा। कहीं आप भी दोस्तों के चक्कर में पड़कर अच्छे-बुरे का फर्क तो नहीं भूल रहे? हमेशा दोस्तों के दबाव से बचना चाहिए।
दोस्तों के दबाव में अक्सर हीन भावना घर कर लेती हैं।

बाहर दोस्तों को अच्छे कपड़े पहनता देख या उनके महंगे गैजेट, महंगी बाइक देखकर हीन भावना आने लगती हैं। ऐसे दोस्तों में बचें। अगर आपके दोस्त इन्हें लेकर ताने मारते हैं, तो इनमें दूर रहें। ऐसे दोस्त आपका भला नहीं चाहते। इनसे दोस्ती तोड़ लेने में भलाई है। सच्चे दोस्त आपका कभी मजाक नहीं बना सकते। वे हमेशा आपकी भलाई चाहेंगे। जो चीज आपको पसंद नहीं आ रही, उसे ना कहना सीखें। आपका सच्चा दोस्त उस ना की भी कद्र करेगा।

अक्सर कोचिंग क्लासेज में पहनावे को लेकर आपस में दोस्त टिप्पणी करते हैं, पर ऐसे में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप यहां पढ़ने के लिए आए हैं, फैशन शो में नहीं। अच्छे और सच्चे दोस्त बेहद मुश्किल से मिलते हैं। वे आपको अच्छे बुरे में फर्क पहचानना बताते हैं कभी आपका मजाक नहीं बना सकते।

6 COMMENTS

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