रक्षाबंधन: भाई की लंबी उम्र के लिए कलाई पर बांधे प्यार की राखी

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रक्षाबंधन एक ऐसा त्यौहार है जिसका अपना एक विशेष महत्व है और इस त्यौहार के लिए भाई-बहन विशेष तौर पर इंतजार करते हैं। बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर रक्षा की उम्मीद करती हूं और भाई भी बहन की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प लेता है भाई बहन के इस खूबसूरत रिश्ते मैं प्यार जज्बात लड़ाई में मारपीट का समावेश समाया रहता है लेकिन जरूरत पड़ने पर यह बंधन धीरे धीरे और मजबूत हो जाता है।

बता दें कि सावन महीने की पूर्णिमा के दिन रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन जहां बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसकी लंबी आयु की कामना करती हैं, वहीं भाई बहनों को ताउम्र रक्षा का वादा करता है। सावन की पूर्ण‍िमा को भगवान शिव और चंद्रमा की पूजा की जाती है। इससे आयु का वरदान मिलता है। यही वजह है कि इस दिन बहनें इस दिन शिव और चंद्रमा की पूजा करती हैं और अपने भाई की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करती हैं।

बहन-भाई के स्नेह के इस त्योहार को पूरे देश में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान सूर्योदय से लेकर शाम 04:20 बजे तक रहेगा । ज्योतिष के अनुसार इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा नहीं हैं, भद्रा नक्षत्र सूर्योदय से पहले ही खत्म हो रहा है। यही नहीं इस बार करीब 11 घंटे तक राखी बांधने का मुहूर्त है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त:

मान्‍यताओं के अनुसार रक्षाबंधन के दिन अपराह्न यानी कि दोपहर में राखी बांधनी चाहिए। अगर अपराह्न का समय उपलब्‍ध न हो तो प्रदोष काल में राखी बांधना उचित रहता है। भद्र काल के दौरान राखी बांधना अशुभ माना जाता है। राखी बांधने का समय: सुबह 5 बजकर 59 मिनट से शाम 5 बजकर 25 मिनट तक (26 अगस्‍त 2018), अपराह्न मुहूर्त: दोपहर 01 बजकर 39 मिनट से शाम 4 बजकर 12 मिनट तक (26 अगस्‍त 2018)।

इन बातों का रखे ध्यान:

  • रक्षा सूत्र बंधवाते वक्त सिर पर रूमाल या कोई कपड़ा अवश्य रखें और बांधने वाली बहन का सिर भी ढंका होना चाहिए। राखी बांधते समय बहनें लाल, गुलाबी, पीले या केसरिया रंग कपड़े पहने तो अच्छा होता है।
  • सबसे पहले गणेश जी की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि हर शुभ काम करने से पहले गणेश जी की पूजा का विधान है। इसके बाद भाई को पूर्व या उत्तर दिशा में अपना चेहरा कर बैठना चाहिए।
  • राखी बांधते समय बहन को इस मंत्र का जाप करना चाहिए, जिससे भाई की उम्र लंबी होती है।

ॐ यदाबध्नन्दाक्षायणा हिरण्यं, शतानीकाय सुमनस्यमाना:।
तन्मस्आबध्नामि शतशारदाय, आयुष्मांजरदृष्टिर्यथासम्।।

यह कथाएं हैं प्रचलित: द्रौपदी और श्रीकृष्‍ण की कथा:

मान्‍यताओं के अनुसार महाभारत काल में कृष्ण और द्रौपदी का एक वृत्तांत मिलता है। जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई। द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उसे उनकी अंगुली पर पट्टी की तरह बांध दिया। यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। श्रीकृष्ण ने बाद में द्रौपदी के चीर-हरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया था।

सिकंदर और पुरू की कथा: 

मान्‍यताओं के अनुसार सिकंदर की पत्नी ने पति के हिंदू शत्रु पुरूवास यानी कि राजा पोरस को राखी बांध कर अपना मुंहबोला भाई बनाया और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया। पुरूवास ने युद्ध के दौरान सिकंदर को जीवनदान दिया। यही नहीं सिकंदर और पोरस ने युद्ध से पहले रक्षा-सूत्र की अदला-बदली की थी। युद्ध के दौरान पोरस ने जब सिकंदर पर घातक प्रहार के लिए हाथ उठाया तो रक्षा-सूत्र को देखकर उसके हाथ रुक गए और वह बंदी बना लिया गया। सिकंदर ने भी पोरस के रक्षा-सूत्र की लाज रखते हुए उसका राज्य वापस लौटा दिया।

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