इंडियन मैंगो के रख-रखाव के लिए बनाई साइट को सर्च करने में विदेशी दिखा रहे रूचि, 27 लाख से अधिक आये हिट

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  • एक वर्ष में 27 लाख से अधिक आये हिट, रूस, चीन के लोगों की संख्या ज्यादा, साइट पर आम व उनके रख-रखाव, रोगों से बचाव के बताये जाते हैं उपाय, हर सप्ताह किया जाता अपडेट

लखनऊ, 18 मार्च 2020: भारतीय आम और उनके रख-रखाव के लिए आईसीएआर-सीआईएसएच के जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वित्त पोषित परियोजना के तहत एक वर्ष पूर्व विकसित की गयी राष्ट्रीय आम डेटाबेस पर 27 लाख से अधिक हिट आये हैं।आम की भारतीय प्रजातियों, उसके स्वाद, आम के रख-रखाव के उपाय आदि की जानकारी देने वाली इस साइट पर विदेशियों ने ज्यादा रूचि दिखाई है। इससे विदेश में भारतीय आम के प्रति बढ़ती रूचि को दर्शाता है।

 

इस संबंध में केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान, लखनऊ के निदेशक शैलेन्द राजन ने बताया कि शुरुआत में देश के विभिन्न आम के बढ़ते क्षेत्रों के 10 भागीदारों ने देश के 393 प्रमुख आम के प्रमुख जिलों की जानकारी एकत्र करने के लिए काम किया। अब तक हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आम डेटाबेस के माध्यम से उपलब्ध कराए गए आम पर कुल 391 कृषि सलाह दी गयीं हैं।

उन्होंने कहा कि डेटाबेस मौसम की बदलती स्थिति के दौरान किसानों और विस्तार कार्यकर्ताओं के लिए सहायक है। यह वेबसाइट अन्य सूचनाओं के साथ आम पर ऑनलाइन साप्ताहिक कृषि सलाह प्रदान करती है। साप्ताहिक मैंगो एडवाइजरी में मौसम के पूर्वानुमान, आम की बीमारियों और कीटों के प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, खादों और उर्वरकों के उपयोग, इंटरक्रॉपिंग आदि की जानकारी शामिल है। नेशनल मैंगो डेटाबेस आईसीएआर- संस्थान द्वारा जारी किए गए सभी एग्रो एडवाइजरी की मेजबानी करता है और बनाते भी हैं। हर हफ्ते, एक बार मंगलवार को जानकारी को अपडेट किया जाता है।

उन्होंने बताया कि इसका सर्वाधिक अवलोकन रूसी संघ, आस्ट्रेलिया और चीन के लोगों ने किया है। इससे वहां भारतीय आमों के प्रति लोगों का ज्यादा रूझान दर्शाता है। आगे चलकर वहां भारतीय आमों का ज्यादा निर्यात की संभावना भी बन रही है। अमेरिकिकयों ने भी काफी संख्या में रूचि दिखाई है और साइट को सर्च किया और देखा है।

 

उन्होंने कहा कि आम के प्रति लोगों में बढ़ती रुचि के साथ-साथ उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को समझने के लिए वेबसाइट पर आगंतुकों का विश्लेषण एक महत्वपूर्ण तरीका है। शोधकर्ताओं ने सात लाख से अधिक बार साइट पर जाकर इस सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है और डेटाबेस से यह भी प्रकाश में आया कि लाखों लोग आम के बौद्धिक संपदा अधिकारों में रुचि रखते हैं। अंतरराष्ट्रीय आम के पल्प व्यापार में भारतीय योगदान महत्वपूर्ण है।

 

उन्होंने कहा कि हिट्स की संख्या 28 हजार बताती है कि कैसे व्यापारी भारत के पल्प निर्यात के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। आम की परम्परागत किस्में अभी भी मांग में हैं। लोग इन विशेष् पारंपरिक आमों का स्वाद लेना पसंद करते हैंI ये किस्में संरक्षक किसानों द्वारा संरक्षित हैं। वेबसाइट भारत के 450 से अधिक किसानों की जानकारी है, किसान कई दशकों से आम की विविध विरासत के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।

मूल्य संवर्धित पदार्थों में आम का उपयोग बढ़ रहा है। खाना पकाने में रुचि रखने वाले आगंतुकों को विभिन्न उत्पाद बनाने के लिए डेटाबेस से सैकड़ों व्यंजन की रेसेपी मिल सकते हैं और 18 हजार से अधिक हिट इस दिशा में बढ़ती रुचि दर्शाते हैं। आम का प्रसंस्करण भी उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण बन गया है। यह डेटाबेस में उपलब्ध प्रसंस्करण इकाइयों की आगंतुकों की वेब जानकारी के विश्लेषण से स्पष्ट है।

उन्होंने कहा कि https://mangifera.res.in पर आम से संबंधित अद्यतन जानकारी उपलब्ध करायी जाती है और हर सप्ताह मंगलवार को इसे अपडेट किया जाता है। आईएमडी का पूर्वानुमान सात दिन पहले का होता है और मुख्य रूप से हितधारक एवं आम के किसानों के उपयोग करने के लिए इस जानकारी का उपयोग कर रहे हैं।

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