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    अतीत के झरोखें से: भारतीय रसोइयों में कभी होता था कठवत!

    ShagunBy ShagunJune 15, 2021 Featured No Comments3 Mins Read
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    Post Views: 1,429

    संजय श्रीवास्तव

    मैने एक दिन पहले 80 के दशक तक भारतीय परंपरागत रसोई की बात की थी. इसमें इस्तेमाल होने वाले सामानों की चर्चा की थी. हालांकि तब के रसोईंघर में इस्तेमाल होने वाले बर्तन भी अब गायब हो गए. बटुली से लेकर फूल की थाल तक. उसकी विस्तार से बात से पहले मैं आपको किचन के एक सामान के बारे में बता रहा हूं. जो कई तरह से इस्तेमाल होता था. बगैर इसके किचन कुछ अधूरा सा लगता था. क्योंकि ये एक नहीं कई कामों में इस्तेमाल किया जा सकता था.

    इसे कठवत कहते थे. लकड़ी की परात से लेकर थाल तक काम इससे लिया जाता था. कठवत बाजार में अलग अलग साइज में मिल जाता था. इसके छोटे रूप को कठौती भी कहा जाता था. कठवत में खा भी लिया जाता था. उसमें आटा भी सान लिया जाता था. अचार भी मसालों और तेल में लपेट कर रख लिया जाता था.

    किचन में रोटियां जब अक्सर बन जाती थीं तो इसे कठवत में कपड़ा बिछाकर थाली से ढंक दिया जाता था. कुल मिलाकर ये किचन में भिगोने के काम से लेकर खाने को रखने तक के काम आता था. अक्सर दही भी इसमें जमा ली जाती थी. इसमें जमाई गई दही बढ़िया जमती थी. लकड़ी होने के कारण ये उष्मा का कुचालक होता था यानि गरमी और ठंड का इस पर असर नहीं पड़ता था.

    यानि एक जमाने में रसोइयों की जान होता था कठवत. यह लकड़ी के मोटे तने को बीच से खोखला करके बनाया जाता था. कठवत छोटे और बड़े दोनो प्रकार की होती थीं. हालांकि बहुत से घरों में इसका इस्तेमाल खाने से जुड़ी कई चीजों के लिए किया जरूर जाता था लेकिन इसमें खाया नहीं जाता था, क्योंकि लकड़ी के समान मांझने से भी साफ नहीं माने जाते थे.

    आपने शायद वो कहावत सुनी होगी, कठौती में गंगा. कठौती को आप कठवत की बड़े कटोरे की तरह की बहन कह सकते हैं. इसमें दूध या पानी रखकर पिया जाता था. अक्सर किचन में तो ये होती ही थी. फकीरों और साधुओं के पास भी ये अनिवार्य तौर पर होती थी.

    पहाड़ों में गांवों में अब भी गेठी और शीशम की लकड़ियों से बने दूध और घी के बर्तन इस्तेमाल किये जाते हैं. मैदानों से लेकर पहाड़ों तक काष्ठकला जब बहुत प्रचलित थी, तब उसे बनाने वालों के पास एक बाजार था, लेकिन अब ना किचन में कठवत और कठौती नजर आएगी और ना ही इनका कोई बाजार रह गया है. हालांकि फ्लिककार्ट से लेकर अमेजन तक लकड़ी के ऐसे बर्तन एंटीक बर्तनों के तौर पर जरूर खरीदने के लिए उपलब्ध हैं.

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