हैदराबाद: घूमते रह जाएंगे, मन नहीं भरेगा

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आदर्श प्रकाश सिंह

अपने देश का कोना-कोना ऐसी जगहों से भरा पड़ा है कि पर्यटक घूमते रह जाएंगे लेकिन शायद ही वे सारी जगहों के दर्शन कर सकें। दक्षिण हो या उत्तर भारत आप कहीं भी चले जाएं एक से एक नायाब दर्शनीय स्थल आपके इस्तकबाल के लिए तैयार हैं। पूर्वोत्तर के क्षेत्र की अपनी अलग पहचान है जहां कोलकाता इसका प्रवेश द्वार है तो पष्चिम में मुंबई की चकाचैंध पर पूरी दुनिया फिदा है। लेकिन यहां हम बात करेंगे दक्षिण भारत के एक बड़े षहर हैदराबाद की। गर्मियों में पहली बार इस षहर की यात्रा पर जाना हुआ। लखनऊ से रवाना होने से पहले ही मैंने एक मित्र से पता कर लिया था कि वहां देखने और घूमने की कौन सी जगहें हैं। रात 11 बजे के करीब जब हम हैदराबाद के राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे तो हल्की बारिश हो रही थी।
शहर जाते हुए रास्ते में 13 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस हाई वे से गुजरना भी एक नया अनुभव रहा। यह हाई वे पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव के नाम पर है। इस पर चार पहिया वाहन ही ले जाने की इजाजत है। टैक्सी चालक ने बताया कि पूर्व क्रिकेटर अजहरुद्दीन के बेटे की मौत कुछ वर्षों पहले बाइक पर स्टंट करते हुए हो गई थी। तभी से इस लंबे हाई वे पर दोपहिया वाहन चलाने पर पाबंदी है। चालक के बताने पर मुझे वह घटना याद आ गई जब महंगी बाइक चलाते हुए अजहर के पुत्र की मौत हुई थी।

शहर का मुख्य आकर्षण है हुसेन सागर झील

हैदराबाद शहर का मुख्य आकर्शण हुसेन सागर झील है। शाम होते ही वहां पर्यटकों का जमावड़ा लगने लगता है। रात में झील के पानी में रोशनी की झिलमिलाहट देखते ही बनती है। झील के चारो तरफ की सड़क नेकलेस रोड कहलाती है। इसे गले में पहने हुए हार की तरह समझा जा सकता है। झील के बीच एक टापू पर सफेद ग्रेनाइट पत्थर से बनी भगवान बु़द्ध की 18 मीटर ऊंची प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा एक दिसंबर 1992 को लगाई गई। बौद्ध गुरू दलाई लामा ने 2006 में इस प्रतिमा का अभिशेक किया था। स्टीमर बोट से वहां जाने व आने की व्यवस्था है। इसके लिए एक आदमी का टिकट 55 रुपये है। झील के एक कोने पर देश का बड़ा सा राश्ट्र ध्वज भी लहराता हुआ दिखा, ठीक वैसा ही जैसे लखनऊ के जनेष्वर मिश्र पार्क में लगा है। हुसेन सागर झील के नजदीक ही एक पहाड़ी पर बिड़ला मंदिर है।

चारमीनार है हैदराबाद की शान

तस्वीरों में या टीवी पर हैदराबाद की चारमीनार तो सबने देखी होगी लेकिन इसे नजदीक से देखना एक सुखद अनुभव है। 15 रुपये का टिकट लेकर संकरी सीढ़ियों से ऊपर जाकर इस ऐतिहासिक इमारत का स्पर्श भी किया जा सकता है। वर्ष 1595 के आसपास इसे मोहम्मद कुली कुतुबशाह ने बनवाया था। कुल 169 सीढ़ियां चारमीनार में हैं। यह इमारत हैदराबाद की प्रतीक है जैसे लखनऊ का रूमी गेट। बगल में ही मक्का मसजिद भी है। व्यस्त बाजार के बीच चारमीनार का इलाका वैसा ही लगता है जैसे लखनऊ का चैक या अमीनाबाद। चूंकि उस समय रमजान चल रहा था इसलिए पूरे इलाके में खूब रौनक थी।

गोलकोंडा किला में रखा था कोहिनूर हीरा

शहर के बाहरी इलाके में स्थित गोलकोंडा का किला देश का तीसरा सबसे बड़ा किला है। लंबे समय तक यह किला कुतुबशाही राजाओं के आधिपत्य में रहा। कुतुबशाही वंष के सात राजाओं ने 1518 से 1617 तक इस किले पर राज किया। एक पहाड़ी पर इस किले का निर्माण 1143 में हुआ। उस समय यह वारंगल के काकतीय राजा का इलाका था। राजा प्रताप रुद्रदेव को एक गड़ेरिए ने यह किला बनाने का सुझाव दिया था। गोला का अर्थ गड़ेरिया या चरवाहा और कोंडा का मतलब है पहाड़। इसीलिए इसका नाम गोलकोंडा पड़ा। सुल्तान अबदुल्ला कुतुबशाह के जमाने में कृश्णा नदी के पास कोहिनूर हीरा पाया गया था जिसे लाकर यहीं पर रखा गया था। 1656 में औरंगजेब ने गोलकोंडा पर हमला किया था। कुतुबशाही के अंत के बाद गोलकोंडा पर मुगलों का शासन आरंभ हुआ। किले में नौ द्वार हैं। शाम को सात बजे से किले के अंदर लाइट एवं साउंड का एक घंटे का शो होता है। एक टिकट का दाम 80 रुपये है। इसमें अमिताभ बच्चन की आवाज में किले का इतिहास बताया जाता है।

धरोहरों से भरा पड़ा है सालार जंग म्यूजियम

हैदराबाद के निजाम और राजा महाराजाओं से जुड़ी हर चीज इस संग्रहालय में रखी गई है। इसे राजा की पोषाक, बचपन की तस्वीरें, मेज कुर्सियां, सोफे, हाथी दांत के सामान आदि इतनी संख्या में हैं कि पूरा संग्रहालय देखने के लिए काफी समय लेकर जाना ठीक रहेगा। करीब 30 कमरों में अलग-अलग श्रेणी बनाकर चीजें रखी गई हैं। षिल्पकारी का बेहरीन नमूना यहां देखा जा सकता है। ऐतिहासिक धरोहरों में जिन लोगों की रुचि है उन्हें इसका भ्रमण अवश्य करना चाहिए। टिकट प्रति व्यक्ति 20 रुपये है। अंदर मोबाइल से फोटो लेना चाहते हैं तो 50 रुपये का शुल्क अलग से देना होगा।

मौज मस्ती की जगह रामो जी फिल्म सिटी

रामो जी फिल्म सिटी जाए बिना हैदराबाद दर्शन अधूरा कहा जाएगा। यह ऐसी जगह है कि जिसे देखने के बाद आप यहां बार-बार आना चाहेंगे। दक्षिण भारत के बड़े मीडिया समूह इनाडु के मालिक रामो जी का यह इलाका 1660 एकड़ में फैला हुआ है। गिनिज वल्र्ड रिकाॅर्ड ने इसे दुनिया के सबसे बड़े फिल्म स्टूडियो काम्प्लेक्स का दर्जा दिया है। न्यूज चैनल ई-टीवी का मुख्यालय भी इसी परिसर में है। एक आदमी का जनरल टिकट 1100 रुपये है। स्पेशल टिकट 2200 रुपये का है। सुबह 9 बजे से शाम साढ़े 5 बजे तक आप घूम सकते हैं। परिसर इतना बड़ा है और देखने के लिए इतनी ढेर सारी चीजें हैं कि पूरा दिन लग ही जाता है। प्रवेश करने के बाद उनकी बस आपको अंदर यूरेका पार्क ले जाकर छोड़ देगी। वहां से दूसरी बसें मिलती रहेंगी और आपको तमाम वे लोकेशन दिखाएंगी जहां फिल्मों की शूटिंग होती है। जयपुर का हवामहल है तो एक ही भवन में एयरपोर्ट व अस्पताल है। धारावाहिक महाभारत की शूटिंग का सेट भी हमने अंदर जाकर देखा। जेल और रेलवे स्टेशन का माडल भी अंदर है। एक्षन थिएटर में आप देख सकते हैं कि फिल्म कैसे बनाई जाती है। उसमें साउंड इफेक्ट कैसे डाला जाता है। मूवी मैजिक में जादू और स्टंट शो देख सकते हैं। इसके अलावा बर्ड पार्क में खूबसूरत तोते व अन्य चिड़ियों का देख सकते हैं। अंदर होने वाले कई तरह के शो का टिकट नहीं लगता। बसों का किराया और यह शुल्क उसी 1100 में शामिल है। बीच-बीच में बस पर गाइड भी बताता रहता है कि यहां अमुक फिल्म की शूटिंग हुई थी। यानी पूरी तरह मनोरंजन की एक अलग दुनिया की सैर का यहां अवसर मिलता है।

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