शरीर में चेतना की उपस्थिति के कारण मनुष्य जीवित हैं

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गौतम बुद्ध का विज्ञान- बातें ज्ञान -विज्ञान की: गौतम चक्रवर्ती

आज से लगभग 2500 वर्ष या 563 ईसा पूर्व तथागत गौतम बुद्ध ने सर्व प्रथम इस बात का उल्लेख किया था कि हमारा शरीर मूलभूत चार तत्वो से निर्माण हुआ और ‘चेतना’ की उपस्थिति के कारण हम जीवित अवस्था में हैं, किसी ईश्वरीय शक्ति के कारण नहीं, यह दुनिया स्वयं संचालित है इसको चलाने वाला कोई नहीं लेकिन बुद्ध की इस वैज्ञानिक बातों को उस समय मनुष्यों ने गंभीरता से लेने के स्थान पर उसे दबाकर सभी धर्मों ने काल्पनिक ईश्वरीय शक्ति के रूप में स्वर्ग नरक को समाज में स्थापित कर दिया।

तथागत गौतम बुद्ध ने पहले इस बात का उल्लेख किया था कि हमारा शरीर चार तत्वों से बना है न कि किसी ईश्वरीय चमत्कार से, इस बात की पुष्टि आज के समय में वैज्ञानिक अपने शोधों के माध्यम से सिद्ध करते चले जा रहे हैं।

तथागत गौतम बुध के अनुसार हम मनुष्यों का शरीर के निर्माण में चार तत्व पृथ्वी, हवा, जल और अग्नि जैसे तत्वों की प्रधानता है।

अभी हाल ही वर्ष 2021 में “स्विटजरलैंन्ड जेनेवा वैज्ञानिक शोध संस्था” ने अपने शोध रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया कि यह दुनिया किसी ईश्र्वर ने नहीं बनाई है, बल्कि “कवाकॅ लेबोनेन” नामक कणों से निर्मित हुई है और इसी के कारण “ब्रह्मांड” यानि कि दुनिया की संरचना हुई है, दुनिया को निर्मित करने वाले इन कणों के शोध को वैज्ञानिक दुनिया की सबसे बृहदतम शोध बताते हैं।

दरअसल वैज्ञानिकों द्वारा यह खोज वर्ष 1980 में प्रारंभ किया गया था जिसमें विश्र्व के अनेकों वैज्ञानिकों की एक टीम कार्यरत थी, इस टीम में भारत के एक वैज्ञानिक “बलदेव राज डावर” के साथ विश्व के एक महानतम वैज्ञानिक “हीग बोशन” भी शामिल थे, उन्होंने इस परीक्षण को दोहराया जिसके परिणाम एक जैसा आने से यह सिद्ध होता है कि “कवाकॅ लेबेनोन” नाम के कणों ने एक प्रचंड शक्ति से पृथ्वी, जल, हवा, सूरज, चांद एवम वनस्पतियों को स्वयं निर्मित किया हैं, इसके पीछे कोई ईश्वर ईश्वरीय चमत्कार या करिश्मा नहीं है।

यह बात अवश्य ही आम आस्तिक या आस्थानवान लोगों के ह्रदय को आघात पहुंचा सकता है, लेकिन सत्य तो सत्य होता है, हां आध्यात्म हम मनुष्यों के मन को सुव्यवस्थित क्रिया कलापों की ओर प्रेरित करती है और यह एक अहसास करने मात्र की चीज है।

जब हम हमारे शरीर के निर्माण में छिपे उन चार तत्वों जैसे – पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि के इन घटकों की बात करते हैं तो उन में से -जल में हाइड्रोजन+ऑक्सीजन , वायु मे ऑक्सीजन+नाइट्रोजन, अग्नि में ऊष्मा, पृथ्वी में कार्बन+फास्फोरस+कैल्शियम+आयरन जैसे घटकों से निर्मित हैं। वैसे तथागत गौतम बुद्ध ने चार ही तत्वों की प्रधानता की बात का उल्लेख किया है।

उन्होंने इसमें पांचवें तत्व के विषय में उल्लेख क्यों नही किया? शायद यह बात एक शोध का विषय हो सकता है लेकिन यहां हम तथागत गौतम बुद्ध के द्वारा बताए गए उन्ही चार तत्वों को ही प्रधानता देंगे।

वैसे जहां तक हम सभी एक लम्बे समय से मनुष्य शरीर के निर्माण में पांच तत्वों की बात करते या सुनते चले आ रहें हैं वह पांचवा तत्व आकाश है और हम जब ऊपर उल्लेखित चारों तत्वों के निर्माण में उन घटकों का उल्लेख कर चुके हैं तो उसमे पांचवा तत्व आकाश है जो अभौतिक रूप में हमारा मन है। जैसे आकाश अनंत है ठीक उसी तरह हमारे मन की भी कोई सीमा नहीं है। जैसे आकाश अनंत ऊर्जाओं से परिपूर्ण है, ठीक उसी तरह मन की शक्ति की भी कोई सीमा नहीं है क्योंकि अभी आप अपने मन में अमुक जगह जाने की बात सोचिए आप वहां पलक झपकते ही वहां पहुंच जाते हैं यह कुछ और नही यह वही ऊर्जा है जिसमे इतनी गति होती है कि क्षण भर में एक स्थान से दूसरे स्थान पर हम पहुंच सकते हैं। दरअसल यही वह ऊर्जा है जो हम मनुष्यों के अंतस में दबी या सोयी हुई या सुसुस्त्त अवस्था में मौजूद रहती है।

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