मुख्यमंत्री आवास में बाल सुपोषण उत्सव

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
एक सितंबर को मुख्यमंत्री आवास का दृश्य अभूतपूर्व था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं सन्यासी है, लेकिन समाज की भलाई के लिए भी समर्पित है। अवसर था बाल पोषण उत्सव। उत्सव जैसी ही रौनक। उत्साहित बच्चे, चुनरी ओढ़े गर्भवती माताएं,। केवल बधाई गीत नहीं हुए, इसके अलावा उत्सव की उमंग थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नन्हें बच्चों को स्वयं भोजन परोसा। भोजन भी पूरी तरह पौष्टिक। सहजन की सब्जी, सहजन के पराठे, स्वीट डिस में पौष्टिक लड्डू, परोसने वाले सन्यासी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। ये बच्चे जब बड़े होंगे, तब उन्हें इस उत्सव के महत्व की अनुभूति होगी। फिर भी उन्हें आज स्वच्छता और पौष्टिक आहार के महत्व की जानकारी अवश्य मिली।
एक नन्हे बच्चे के जन्मदिन ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। योगी आदित्यनाथ के साथ उसने दलिया व पौष्टिक आहार से बने केक को काटा। योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक भारत श्रेष्ठ भारत का सन्देश दिया है। भारत तभी श्रेष्ठ बनेगा जब यहां के सभी बच्चे स्वस्थ होंगे। जिस देश का बचपन कुपोषण का शिकार हो, वह मजबूत नहीं बन सकता। इसके लिए सभी विभागों को सम्मलित प्रयास करना होगा। योजनाओं का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। लेकिन इसके लिए जन सहभागिता आवश्यक है।
इसी के अंतर्गत राष्ट्रीय पोषण माह का उद्घाटन किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ढाई वर्ष पहले तक जापानी बुखार की जटिल समस्या थी। लेकिन पिछले दो वर्ष में संबंधित विभागों ने अभियान चलाया। इसके बल पर यह लड़ाई जीती गई है। योगी पिछले पच्चीस वर्षों से इस बुखार को रोकने की आवाज उठाते रहे है। लेकिन उन्हें लगा कि यह समस्या के लिए बचाव जरूरी है। उनकी सरकार के प्रयासों से इस समस्या पर लगभग नियंत्रण कर लिया गया है। इतना ही नहीं योगी सरकार ने डेंगू, मलेरिया पर भी नियंत्रण लगाया है।
फिर भी योगी आदित्यनाथ मानते है कि कुपोषण होगा तो बच्चे कमजोर होंगे। कमजोर होंगे तो बीमारी होगी। स्वच्छता नहीं रहेगी तब भी बीमारी फैलती है। इन समस्याओं को दूर करने का सरकार प्रयास कर रही है। इस पोषण माह के लिए कार्यक्रम निर्धारित किये गए है। इनपर अमल से कुपोषण की समस्या दूर होगी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए अभियान योगी सरकार में प्रभावी रूप में साकार होते है। ऐसे कई कदमों से उत्तर प्रदेश का विकास सुनिश्चित हुआ। इसी के साथ यहां के निवासियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी आई है। पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया अभियान शुरू किया था। उसी समय यह अनुमान लगाया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस अभियान में उत्तर प्रदेश की भागीदारी व हिस्सेदारी सुनिश्चित करेंगे। अनुमान सही साबित हुआ।
योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पांच कालिदास में राष्ट्रीय पोषण माह के तहत बाल सुपोषण उत्सव की शुरुआत की। इसमें विशेष रूप से छोटे बच्चे और गर्भवती माताएं शामिल हुई। समारोह में ही इन बच्चों और माताओं को पोषक भोजन परोसा गया। वस्तुतः इस माध्यम से पूरे प्रदेश को बाल सुपोषण का सन्देश दिया गया। इसमें गर्भावस्था के प्रथम एक हजार दिवस में पोषण की जानकारी दी गई। इसके बाद नवजात की ऊपरी पोषक,अनीमिया से बचाव,स्वस्छ्ता और दस्त नियंत्रण संबन्धी जानकारी दी गई। इसी के साथ बच्चों का अन्नप्राशन भी हुआ। शिशु के जीवन में प्रारंभिक दो वर्ष अति महत्वपूर्ण होते है। इसके पहले गर्भवती माता को भी पूर्ण पोषण मिलना चाहिए। माताओं में अनीमिया की समस्या आम बात है। इसका भी समय रहते निदान होता होना चाहिए।
कुपोषण का कारण केवल निर्धनता नहीं होती। उचित आहार न लेने से धनी वर्ग में भी कुपोषण की शिकायत रहती है।
सितंबर माह पूरे प्रदेश में पोषण माह के रूप में मनाया जाएगा। एक दिन पहले ही योगी योगी आदित्यनाथ ने वीडियो कांफ्रेंस अधिकारियों को इस संबन्ध में निर्देश दिए थे। उन्होंने ने कहा कि अंतर्विभागीय अधिकारियों को समन्वय कर इस पोषण माह को कारगर व सफल बनाने के निर्देश दिए। अंतर विभागीय समन्वय से संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम बहुत सफल रहा। पोषण माह को जन जागरूकता के साथ क्रियान्वित करें।
प्रदेश का हर बच्चा, गर्भवती महिला कुपोषण मुक्त स्वस्थ हो। पोषण माह के कार्यक्रमों में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल के उपयोग, स्वास्थ्य के प्रति सजगता, पौष्टिकतायुक्त आहार के सेवन, साक्षरता व स्कूल चलो अभियान, नैतिकता व अच्छे संस्कारों को अपनाने आदि विषयक समन्वित कार्यक्रम प्रभावी रूप से क्रियान्वित किए जाएं। जिसमें जन सहभागिता अधिक से अधिक हो। पोषण माह के लिए हर दिन के कार्यों की गाइडलाइन बनाई गई है। जिसके तहत सितंबर के प्रथम सप्ताह में पुरूषों की भागीदारी को अधिक से अधिक रखने पर बल होगा।
छोटे बच्चों व गर्भवती महिलाओं के पोस्टिक आहार, शिक्षा, उनके स्वस्थता, साफ सफाई के लाभों के प्रति पुरुष जानेंगे व जागरूक होंगे। तब वह स्वच्छ से परिवार में आगे बढ़कर सहयोग और अन्य भूमिका निभाएंगे। दूसरे सप्ताह को किशोरी सप्ताह के रूप मे मनाया जाएगा। जिसमें किशोरियों को आयरन गोली के उपयोग, सही आहार लेने विषय पोषण रैली, बाल सुपोषण उत्सव आदि कार्यक्रम होंगे। तीसरे सप्ताह को बाल सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा। जिसमें बच्चों के शारीरिक मानसिक विकास के बारे एवं उसके लिए आवश्यक खानपान, रहन सहन, शिक्षा आदि विषयक कार्यक्रम होंगे।
इसके साथ माह के अंतिम चौथे सप्ताह को माता सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा। जो गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य-पोषण पर केंद्रित होगा और उनके साथ गर्भस्थ शिशु के अच्छे स्वास्थ्य व जीवन के लिए जागरूकता विषयक कार्य होंगे। पूरे माह के कार्यक्रमों में मुख्यतः जागरूकता रैलियां, गोष्ठी, घर-घर संपर्क, सामूहिक बाल खान-पान, पोषण वर्कशॉप, पोषण मेला आदि कार्यक्रम होंगे।

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