आर.टी.ई. फीस प्रतिपूर्ति मामले में, शासन को झटका!

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लखनऊ 29 अगस्त 2019: आर.टी.ई. फीस प्रतिपूर्ति मामले में उच्च न्यायालय की ओर से शासन को बड़ा झटका लगा है। बता दें कि एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स द्वारा शिक्षा का अधिकार (आर.टी.ई.) अधिनियम की धारा 12(2) के अन्तर्गत प्राइवेट स्कूलों की फीस प्रतिपूर्ति हेतु दाखिल याचिका की सुनवाई उच्च न्यायालय के सामने हुई, जिसमें उच्च न्यायालय ने इस मामले में अभी तक शासन द्वारा जवाब दाखिल न करने पर असन्तोष जाहिर करते हुए शासन को अपना जवाब 1 अक्टूबर 2019 तक दाखिल करने के लिए आखिरी मौका दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने जवाब न दाखिल करने की दशा में सम्बन्धित अधिकारी पर रू0 25,000/- जुर्माना लगाने का आदेश दिया है।

उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों माननीय श्री एम. एन. भण्डारी एवं माननीय न्यायमूर्ति श्री आलोक माथुर की इस पीठ ने यह भी कहा कि निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति आर.टी.ई. अधिनियम की धारा 12(2) के अन्तर्गत निर्धारित नियम के अनुसार ही होनी चाहिए। इस केस की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर 2019 को होगी।

एसोसियेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता अतुल कुमार ने बताया कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत निजी स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति शासन द्वारा अधिनियम की धारा 12(2) के तहत पिछले 6 वर्षों से नहीं दी जा रही है, जिसके लिए एसोसिएशन ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी, जिसमें शासन अपना जवाब नहीं दाखिल कर रहा है। यही कारण है कि निजी स्कूल आर.टी.ई. अधिनियम के अन्तर्गत दाखिले लेने में आनाकानी करते रहे हैं।

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