गुजरात मॉडल से प्रेरणा

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल में गुजरात मॉडल बहुत प्रसिद्ध हुआ था। इसकी चर्चा भारत ही नहीं विदेशों तक थी। कई देशों ने तो भूकंप आपदा प्रबन्ध की कुशलता देखने के लिए अपने विशेषज्ञों की टीम भेजी थी। तब आनंदी बेन पटेल गुजरात कैबिनेट की सदस्य थी। उन्होंने भी अपने मंत्रालय में अनेक सकारात्मक प्रयोग किये थे। इनकी भी प्रशंसा हुई थी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आनन्दी बेन गुजरात की मुख्यमंत्री बनी थी।

मुख्यमंत्री रहते हुए भी उन्होंने कई कदम उठाए थे। नरेंद्र मोदी के कार्यो को आगे बढ़ाया था। इस समय आनन्दी बेन उत्तर प्रदेश की राज्यपाल है। इस रूप में भी वह अनेक सार्थक सुझाव देती है। महिलाओं,बच्चों के कल्याण में उनकी विशेष रुचि भी है। वह अक्सर बच्चों के स्कूल जाकर उनसे मिलती है। विश्विद्यालयों के दीक्षांत समारोह में वह छोटे क्लास के बच्चों को भी आमंत्रित करने का निर्देश देती है। जिससे उनको प्रेरणा मिल सके।

महिला कल्याण, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की बैठक में भी उन्होंने अनेक उपयोगी सुझाव दिए। यह भी कहा कि इसके अनुपालन हेतु वार्षिक कलेंडर भी बनाया जा सकता है। उसी के अनुरूप कार्यक्रम चलाया जाय। उन्होंने कहा कि गुजरात माॅडल के तर्ज पर प्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों को विकसित किया जाए। इससे आंगनवाड़ी केन्द्र सुदृढ़ बनेंगे।

राज्यपाल ने वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से जनपद वाराणसी के आंगनवाड़ी केन्द्रों को गुजरात माॅडल के तर्ज पर सुचारू रूप से चलाने के लिये अपने अनुभव साझा किया। राज्यपाल ने बैठक में कहा कि इन केंद्रों में पर्याप्त सुविधा होनी चाहिए। बच्चों की सुविधानुसार शौचालय, पेयजल का नल,प्लेट रखने का स्टैण्ड तथा डस्टबिन रखने का स्थान बच्चों की ऊंचाई के अनुरूप ही होना चाहिए। आंगनवाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को पौष्टिक पोषाहार उपलब्ध कराया जाय। पौष्टिक आहार देने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच निश्चित रूप से होनी चाहिए। इसमें भरपूर पौषक तत्व मौजूद होने चाहिए।

बच्चों को प्रेरित करने के लिये दीवारों पर उनकी अवस्था के अनुसार सद्वाक्य लिखे जायं। आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवनों को बाहर से आकर्षक रंगों से रंगा होना चाहिए। अंदर की दीवारों पर नीचे की तरफ से तीन फीट तक काला रंग करना चाहिए ताकि बच्चे कुछ लिख या चित्र बना सकें। इन पर प्रेरणा देने वाली पेन्टिंग करानी चाहिए। इन पेंटिंग के माध्यम से भी बच्चों को उपयोगी जानकारी मिल सकती है। इनमें पर्यावरण संबन्धी जानकारी, पक्षियों और शाकभाजी आदि के नाम भी होने चाहिए। हिन्दी अंग्रेजी वर्णमाला के साथ गिनती के अंकों को भी दर्शाया जाय।

बच्चों की जानकारी हेतु उनके परिवार से संबंधित परिवार वृक्ष भी दीवार पर बनाया जाय,जिसमें उनके माता पिता के साथ ही दादा, दादी, नाना,नानी आदि सभी को दर्शाया जाय। एक निश्चित तिथि पर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों का प्रवेश उत्सव मनाया जाय। इस प्रवेश उत्सव के अवसर पर गांव के सभी लोग, जनप्रतिनिधि व अधिकारी भी सम्मिलित होने चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि गर्भवती महिलाओं का भी ध्यान रखा जाय। उनको पौष्टिक आहार के अलावा अच्छी कहानियां सुनायी जाय।

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