पाकिस्तान बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है लेकिन फिर भी बाज़ नहीं आ रहा

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मुद्दे की बात: पंकज चतुर्वेदी की वॉल से
हर दिन की तरह आज भी देश -दुनिया के ऑनलाइन अखबार के साथ-साथ पाकिस्तान के दो प्रमुख अखबार- थे डौन और ट्रिब्यून एक्सप्रेस देख रहा हूँ , कश्मीर के नाम पर गजब का स्यापा है, भले ही भारतीय हिंदी टीवी के अतिरेक ड्रामा को तवज्जो न दें लेकिन यह सही है कि पाकिस्तान बहुत बुरे दौर से गुजर रहा है. उसकी आर्थिक हालत खराब है, सिंध और बलूचिस्तान में तनाव है, सियासती दुश्मनियों के चलते खींचा तान है , उधर सेना भी इमरान खान को तेवर दिखा रही है. ऐसे में इमरान खान सरकार के लिए कश्मीर का मसला जरुर थोड़े दिनों की राहत है .
यह जान लें कि कश्मीर में अभी कोई निर्धारित अंतर्राष्ट्रीय सीमा नहीं हैं, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पर, यदि सं 47 से पहले के हालात और दस्तावेज देखें तो इंडिया का ही अधिकार है और इस पर कई बार, हर सरकार में संकल्प, संसद में आये हैं –मनमोहन सिंह सरकार में भी .
धारा 370 के 35 ए का प्रावधान हमारी संसद का, उसमें संशोधन का हक हमारा, कश्मीर हमारा — फिर आप क्यों इतने बौखला रहे हैं .
असलियत तो यह है कि दोनों मुल्कों की सियासत को इस समय राष्ट्रवाद का ही सहारा है और दोनों मुल्कों के बच्चों को जन्म से एक दुसरे के दुश्मन होने का पाठ पढ़ा दिया जाता है .
आम पाकिस्तान के बाशेंदे के दिल में भारत धडकता है
मैं दो बार पाकिस्तान गया हूँ, मैं कोई ऐसा चेहरा या शख्स नहीं जिसके लिए पाकिस्तान कोई ख़ास दिखावे कि व्यवस्था करता लेकिन यकीन माने आम पाकिस्तान के बाशेंदे के दिल में भारत धडकता है- खाने में, कपड़ों में, फिल्म में – बाज़ार में पता चल जाए कि कोई इंडिया से आया है तो तोहफों की भीड़ लग जाती है , कुछ कि यादें हैं कुछ के सपने — हाँ आम पाकिस्तानी युवा के लिए इंडिया की तरक्की उनका सपना है
इमरान खान साहब खुदा के वास्ते ईद और राखी के त्यौहार पर आम लोगों को मिलने से मत रोको- ये क्या छिछोरापन , बचकाना हरकत है समझौता और थार एक्सप्रेस ट्रेन रोक दी, ननकाना साहब जाने वाली  बसे और दिल्ली से चलने वाली सदा- ए- सरहद रोक दी , कश्मीर के जाफराबाद-मुजफ्फराबाद से तिजारत रोक दी– यदि आप जम्हूरियत या डेमोक्रेसी में एतबार रखते हैं तो दोनों तरफ के आम लोगों को आपस में मिलने जुलने दें– वे नफरतें घटा देंगे– तनाव कम होगा तो सेना और अस्लाहा पर खर्च कम करना होगा- इससे रोटी व् नान कि कीमत बढ़नी नहीं पड़ेगी
अभी परसों तक जो भी बस- ट्रेन इधर से उधर आई गयी हैं उनमें चालीस फीसदी लोग गैर मुस्लिम थे , बहुत से लोगों  के आज  भी सीमा  पार रिश्ते हैं, दर्द हैं, यारी है —
एक बात और – भारत में जिस तरीके से, स्थानीय लोगों को भरोसे में लिए बगैर जो हुआ , उसकी मजम्मत  की जा सकती है लेकिन क्या यह सही समय नहीं हैं कि इमरान खान और  मोदी जी , बिलावल और नवाज शरीफ की पार्टी और कान्ग्रे-कम्युनिस्ट, नेशनल कांफ्रेंस आदि एक साथ बैठे और कश्मीर के तनाव को सदा के लिए सुलझा लें, भारत में अखबार रूस से समर्थन  पर बल्लियाँ  उछल रहे हैं तो पाकिस्तान के खबार यु एन सेकुरिटी काउन्सिल में  चाईना के समर्थन मिलने के भरोसे को उछल रहे  हैं, अरे भाई , आप दोनों गले लगे पडोसी हो खुद ही क्यों नहीं मिलते ?
हमने खूब युध्ध लड़े, दोनों तरफ के कई सौ लोग आज भी  हर महीने मारे जा रहे हैं लेकिन हर आर बातचीत को टेबल पर आना ही  पड़ा न ? फिर आओगे, फिर आ लगों को मिलने जुलने, धार्मिक यात्रा में अड़ंगे शोभा नहीं देते .
दोनों देश यदि कश्मीर और आपसी संबंधों के बाबस्ता सुरक्षा, ख़ुफ़िया और सेना के अफसरानों को अलहदा  कर  दें तो आज  सारे मसाईल हल हो जायेंगे . इनके अपने स्वार्थ हैं . किसी का अपना पाकिस्तानी के साथ कम्पनी चलाता  है तो कोई पॉवर में डील कर रहा है . इनके तनाव में अपने  स्वार्थ हैं . हथियार तभी बिकेंगे जब हम पडोसी लड़ते रहेंगे .
ट्रेन- बस- सिनेमा  की बहाली करो – लोगों को अपने नज़रिए से एक दुसरे को समझने दो .
गोली नहीं, बोली चाहिए
बम नहीं अमन चाहिए
युध्द नहीं बुध्ध चाहिए
ये हम ही हैं सं 2007 में क्लिफ्टन, कराची के समुद्र तट पर . जल्दी ही कराची के रत्नेश्वर महादेव मंदिर , वहां की हाट के भी चित्र दिखायेंगे.

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