ऐतिहासिक फैसले के बाद यूपी सरकार पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था करे बहाल नहीं तो फिर सड़कों पर उतरेगें आरक्षण समर्थक: संघर्ष समिति

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा कल सुनाये गये ऐतिहासिक फैसले के बाद आरक्षण समर्थक बोले: यूपी सरकार पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था करे बहाल अन्यथा जून 2019 से सड़को पर उतरेगें आरक्षण समर्थक
लखनऊ, 11 मई 2019: पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ द्वारा सुनाये गये ऐतिहासिक फैसले के बाद कल कर्नाटका हाईकोर्ट के एक फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ द्वारा पदोन्नतियों में आरक्षण को जायज बताते हुये उसे संवैधानिक करार दिया गया हैै।
आरक्षण समर्थक बोले ऐसे में अब उप्र सरकार को अविलम्ब प्रदेश में पदोन्नतियों में आरक्षण की व्यवस्था बहाल कर पूर्व में रिवर्ट कार्मिकों को उनके पूर्व पदों पर पुर्नस्थापित कराया जाय। जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद प्रदेश में दलित कार्मिकों को रिवर्ट किया गया उसी प्रकार अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेश के तहत सभी का रिवर्सन वापस किया जाय। अन्यथा की स्थिति में आरक्षण बचाओं संघर्ष समिति के पास आन्दोलन के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं है।
नई सरकार गठन के तुरन्त बाद आरक्षण समर्थक अपना संवैधानिक हक लेने के लिये आन्दोलन के लिये पूरी तरह कमर कसे हैं। करो-मरो की तर्ज पर सड़कों पर उतरकर आन्दोलन होगा और अब लम्बित पदोन्नति बिल पास कराने के बाद ही आरक्षण समर्थक सांस  लेगें। जून 2019 से आरक्षण समर्थक आन्दोलन करने के लिये अपनी कार्य योजना को अन्तिम रूप देने में लगे है।
बैठक के उपरान्त आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, श्याम लाल, प्रेमचन्द्र, अशोक सोनकर, राव साहब गौतम एवं अरविन्द फरसोवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पदोन्नतियों में आरक्षण दिये जाने हेतु 10 मई को पारित आदेश एवं पूर्व में संवैधानिक पीठ द्वारा पारित आदेश को प्रदेश में लागू कराने को लेकर आज संघर्ष समिति की प्रान्तीय कार्य समिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह ऐलान किया गया है कि सरकार द्वारा समय रहते यदि दलित कार्मिकों के साथ न्याय न किया गया तो जून 2019 के महीने में पूरे प्रदेश के आरक्षण समर्थक कार्मिक सड़कों पर उतरकर संवैधानिक तरीके से अपना हक लेने के लिये विशाल धरना प्रदर्शन करेगें। संघर्ष समिति प्रत्येक जिलों में प्रान्तीय सम्मेलन कर आने वाली नई सरकार पर दबाव बनाने के लिये अपना आन्दोलन तेज करेगें जिससे पिछले 6 वर्षो से ज्यादा समय से लोक सभा में लम्बित 117वां पदोन्नति में आरक्षण बिल पास हो सके।

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