मेरी छोटी यात्रा: आदर्श प्रताप सिंह
यूपी के बाराबंकी जनपद में महादेवा में भोलेनाथ के दर्शन के बाद हम पारिजात के ऐतिहासिक वृक्ष को देखने को उत्सुक थे। लखनऊ से बहराइच मार्ग पर रामनगर पड़ता हैं। ट्रेन रूट पर यह बुढवल जंक्शन के नाम से जाना जाता है। यहां से 12 किमी दूर पारिजात है। यह वृक्ष महाभारत काल से जुड़ा है। बताते हैं कि इसे पांडव भाइयों ने लगाया था। प्रदेश का वन विभाग इसकी देख रेख करता है। पारिजात परिसर पहुंच कर हमने इस विशाल वृक्ष को देखा।
ऐसी जगहों को पर्यटन के लिहाज से और विकसित करने की जरूरत है। जानकारी देने वाला कोई शिला लेख भी वहां नहीं दिखा। जबकि इसके इतिहास से लोगों को अवगत कराना चाहिए। वहीं से कुछ दूर बदोसराय के पास कुन्तेश्वर महादेव मंदिर भी हम गए। जनश्रुति के अनुसार पांडव भाइयों की मां कुंती ने यहां शंकर भगवान की पूजा की थी।

इस बारे में वहां एक शिला पट पर लिखा था। जिसे मैंने पूरा पढ़ा। कुंती के पूजा करने से इस मंदिर का नाम कुन्तेश्वर महादेव पड़ गया। वहां से 4 किमी दूर कोटवा धाम है। हमारी गाड़ी उधर भी मुड़ गई। यहां संत जगजीवन दास की समाधि है जिसका लोग दर्शन करते हैं। प्रसाद देने वाले दुकानदार ने बताया कि संत जगजीवन दास को पुरी के भगवान जगन्नाथ का अवतार कहा जाता है। ये सभी जगहें आसपास ही हैं। बाराबंकी में देवा शरीफ भी है जहां हम दो बार जा चुके हैं।








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