डिबेट या प्रायोजित डिबेट, वीवर्स सब जानता है !

0
215
Spread the love

सतर्तकता वैसे तो हर मामले में जरुरी होती है। लेकिन सतर्कता कैसे बरती जाती है यह देश का मीडिया भली भांति जानता है? हमारे देश के समाचार माध्यमों में टीवी चैनलों की अपनी अलग जगह है। जिसके आधार पर उनकी साख ही नहीं बल्कि उन पर आने वाले लोगों एवं नेताओं तथा तमाम विज्ञापनों में दिखाई जाने वाली सामग्री की बाजार की निर्धारित होती है।

यही कारण है कि टीवी में होने वाली बहसों के अलावा अब तो उनके समाचार भी कभी-कभी पूरी तरह प्रायोजित लगते हैं। बहस में भाग लेने वाले प्रतिभागी भी अक्सर सीमा लाँघकर थोथे आक्रोश कुतर्क तथा बेतुकी बातें करते दिखाई देते हैं। कभी-कभी तो इन लोगों की बातों को सुनकर लगता है मानो श्रोताओं, दर्शकों को इन्होंने पूरी तरह से बेवकूफ ही समझ लिया है।

कहते हैं ताली एक हाथ से ही नहीं बल्कि श्रोता, दर्शक भी प्राय: लाइव कार्यक्रम में ऐसी बेतुकी बहस में पूरी शिद्दत तथा रुचि के साथ हिस्सा लेते हैं। दीर्घकालीन परिपेक्ष में ऐसे मामले कतिपय बेहद गंभीर घटनाओं का कारण भी बन जाते हैं।

बता दें कि इस समय देशव्यापी प्रभाव की घटना अयोध्या विवाद पर न्यायालय में बुधवार तक चली सुनवाई तथा अगले माह आने वाला फैसला है। इनको लेकर टीवी पर गरम बहस की पूरी गुंजाइश बनती है। बहुत सलीके दार ढंग से कुछ चैनलों पर इसके बारे में किसी न किसी रूप में प्रसारण भी हो रहा है। यही कारण है कि समाचार प्रसारण मानक प्राधिकरण में सभी टेलीविजन चैनलों को एक एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि अयोध्या मामले में समाचार देते वक्त सतर्कता बरतें और तनाव पैदा करने वाली भड़काऊ बहस से दूर रहें।

सच तो यह है कि पूरा खेल बेहद भोलेपन के साथ जहर बुझी बातों को शराफत और इंसानियत के मुल्लमत में पेश करने का होता है। इसे सभी लोग जानते हैं और अपने अपने हिसाब से इस्तेमाल करते हैं ऐसे में अब फैसले की दहलीज पर आ चुके मामलों को लेकर बेहद सतर्कता के साथ चलने की जरूरत है, ताकि इसे लेकर किसी तरह बेमतलब की चाले नहीं खेली जा सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here