कामयाबी की ओर ले जाता है जुनून

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जुनून का नाम जीत है। जुनून जीत से कम की बात ही नहीं करता है। जुनून आज तक शिखर पर पहुंचा है, उसे न तो बाधाओं ने रोका और न ही कम योग्यताओं ने, वह हर हाल में जीता है और शिखर पर पहुंचा है। ऐसे ही एक जुनूनी का नाम है-जोशवॉल मैन एक मध्यम वर्गीय परिवार का युवा। इसका खुद से ही एक सपना था कि मुझे टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कुछ तो विशेष करना ही चाहिए और इसी के चलते उसने टेक्नोलॉजिस्ट बनने का सपना पाला, जुनून पाला अपने मन-मस्तिष्क में। जैसा नाम वैसा ही जोश।

उसने अपने घर में ही पुराने सामान, खिलौनों के पुराने पाटर्स से अनेक तरह के रोबोट डिजाइन करने शुरू कर दिये। और देखते ही देखते उसने एक से बढक़र रोबोट बनाने शुरू कर दिये और उनको विभिन्न प्रतियोगिताओं में ले जाने लग गया। बहुत सारे इंजीनियरिंग कम्पिटीशनस में हिस्सा लिया और कई प्रतियोगिताएं जीती भी। उनके पिता भी केमिकल इंजीनियर थे जो समय-समय पर उनको मार्ग निर्देशन देते थे। अब धीरे-धीरे जोश बहुत सारी प्रतियोगिताएं जीतने लगा और उस राशि को इक्ट्ठा करने लगा और देखते ही देखते उसके पास पाँच सौ डालर की बचत हो गई और इस राशि को उसने चीन भेजा और वहाँ से रीयल कंपानेंट्स मंगवाये। और इन्हीं कंपोनेट्स से उसने अपना पहला प्रोफेशनल रोबोट मंगवाया और यहीं से उसका इंजीनियरिंग से गहरा लगाव होता गया।

मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र में तो वे कई बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फ्रीलांस कंसल्टेंसी देने लगे थे, लेकिन बावजूद इसके उनको किसी भी यूनिवर्सिटी में दाखिला नहीं मिल पाया, लेकिन बावजूद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और यह उनकी हिम्मत का ही परिणाम है कि जोश को जहां एडमिशन नहीं मिला, उन्हीं विश्वविद्यालयों में बतौर वॉलमैन आज भाषण देते हैं, और उन्होंने फ्रीलांसिंग करते हुए प्रथम कंपनी मिप्रोतो बनाई।

और फिर ‘आरपीडी इंटरनेशनल’ नाम से नई कंपनी बनाई है जो अब चालीस देशों में सप्लाय चेन का काम करती है और बहुत ही क्रियटिव मॉडल बनाती है और जोश ने मात्र अपनी लगन-निष्ठा और जुनून से छह माह में इसे छह करोड़ की कंपनी में परिवर्तन कर युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गये हैं। आइए, अपनी स्वयं की क्षमताओं को बाहर आने दें, उन्हें विकसित होने दें और उड़ने दें, उन्मुक्त आकाश में क्योंकि क्षमताओं को जुनून चाहिए फिर तो वे आपको बुलंदियों की ओर लेकर ही जायेंगी। बस दूसरों की तरफ मत देखिए, अपनी ओर ही देखिए।


प्रेरणा:

खुद को आजमाया कर, तूफां से टकराया कर
अपनों को मत आजमाना, बने भ्रम को बचाया कर
जलते सूरज में जलना मत, चंदा से आँख मिलाया कर
खुद का दर्द तो दर्द ही क्या, औरों के दर्द को बंटाया कर।

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