एक बेहतर श्रोता और विचारक थे महात्मा गांधी, वे आमजन की समस्याओं से थे परिचित : प्रोफेसर लेस्टर कर्ट्ज़

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बीबीएयू ने कराया आनलाइन वेबिनार, जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी, कोरिया के प्रोफेसर लेस्टर कर्ट्ज रहे मुख्य वक्ता

बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर “अगले 150 वर्षों के लिए गांधीवादी सीख (गांधियन लेसंस फ़ॉर द नेक्स्ट 150 इयर्स)” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन, सिल्वर जुबली कमेटी द्वारा किया गया। ऑनलाइन माध्यम से आयोजित इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रोफेसर लेस्टर कर्ट्ज़, जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी कोरिया, साउथ कोरिया ने गांधीवाद पर विस्तार से चर्चा की।

उन्होंने बताया कि महात्मा गांधी में विभिन्न संस्कृतियों को व अगल-अलग राजनीतिक विचारधारा के लोगों को एक साथ लाने की समझ थी। उनके काम करने के तरीकों पर अध्ययन के बाद यह बात समझ आती है कि वे एक बेहतर श्रोता और विचारक थे, वे आम जन की समस्याओं से भली भांति परिचित थे। किसी समस्या के समाधान के लिए उसकी जड़ को समझना ज़रूरी है। इसके लिए महात्मा गांधी ने पूरे भारत का भ्रमण भी किया, लोगों की समस्याओं को सुना और समझा।

प्रोफेसर लेस्टर कर्ट्ज ने कहा कि पूरे देश को एक सूत्र में बांधने और लोगों को सत्य- अहिंसा के मार्ग पर बढ़ने के लिए प्रेरित करने की काबिलियत गांधी में थी। उनके अन्याय से लड़ने के लिए सत्याग्रह और अहिंसा के तरीकों से समाजशास्त्री जॉन गैलटंग बेहद प्रभावित थें और अपने लेखों में विस्तार से गांधीवादी विचारधारा पर चर्चा की है। उन्होंने कहा कि बेहतर भविष्य के लिए हमें गांधीवादी विचारधारा के साथ ही आगे बढ़ना होगा जिसमें न्याय के लिए शांतिप्रिय तरीकों को अपनाने की सीख है।

बीबीएयू के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर शशिकांत पांडेय ने व्याख्यान की विषयवस्तु का संक्षिप्त में विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमें महात्मा गांधी के सबक “आंख के बदले आंख, पूरे विश्व को अंधा बना देगा” को याद रखकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। प्रकृति, जीव जंतु सभी के हितों की रक्षा करते हुए न्याय के लिए सदैव अहिंसा का मार्ग चुनने की आवश्यकता है।

प्रो. सनातन नायक, अध्यक्ष, सिल्वर जुबली कमेटी, ने कार्यक्रम का संचालन किया और इस व्याख्यान में उपस्थित सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने कार्यक्रम के संरक्षक, विवि के कुलपति आचार्य संजय सिंह का धन्यवाद किया। भारत, चीन, कोरिया, अफ्रीका समेत अन्य देशों के विद्यार्थी इस व्याख्यान का हिस्सा बने। कार्यक्रम के अंत मे प्रो. सनातन नायक ने व्याख्यान में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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