पत्रकारों पर लगा प्रशासनिक अधिकारियों से मनमाफिक काम करवाने का आरोप

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जमीन के बंटबारे मे पुलिस कैसे कोई निर्णय ले सकती है जबकि केस अदालत में विचाराधीन है: पत्रकार दीपक गुप्ता

फर्रुखाबाद, 12 मार्च। पत्रकारिता जगत भी अब भ्रस्टाचार से अछूता नहीं है एक ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में सामने आया है जहां बालागंज के पत्रकार दीपक गुप्ता ने बताया कि यहां कुछ स्थानीय पत्रकार लोग संघटन बनाकर प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बना कर अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे है उन्होंने बताया कि उनके मन मुताबिक कार्य न होने स्थिति में पत्रकार खुलेआम प्रशासनिक अधिकारियों को देख लेने एवं पत्रकारिता की आड़ मे डराने धमकाने का भी कार्य कर रहे है।

श्री दीपक गुप्ता के अनुसार नगर के प्रधानिया टोला स्थित रहने वाले पत्रकार अपने निजी घरेलू मामले को इस समय ऐसे पत्रकारिता की आड़ मे तूल दे रहे है उन्होंने बताया कि अभी हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसमे एक खबर निजी वेव पोर्टल पर प्रकाशित की गई और उसमें शमसाबाद थानाध्यक्ष को ही दोषी ठहरा दिया गया जबकि इन अनुभव विहीन पत्रकारों को यह भी नही पता पुलिस के क्या- क्या कार्य है और क्या नही जमीन के मामले और सम्पति के बंटबारे पर थानाध्यक्ष से न्याय मांग रहे है और न देने पर आत्मदाह धरना जैसी घृणित धमकियां तक जिला प्रशासन एवं शासन को दी जा रही है क्या पुलिस के पास समुचित अधिकार है की जमीन के बंटबारे के मामले मे कोई निर्णय ले ले, जमीन के बंटबारे मे पुलिस भला कैसे कोई निर्णय ले सकती है जबकि केस अदालत में विचाराधीन है।

इसी से यह साबित होता है कि पत्रकारिता किस दर्जे की तथाकथित लोग कर रहे है। श्री दीपक गुप्ता का कहना है कि मै पत्रकारों से निवेदन करता हूं कि पत्रकार अपने उल्लेखनीय कार्य से समाज की कुरीतियों और गरीब तबके के लोगों के साथ हो रहे अन्याय को उजागर करें। ताकि आम जनमानस की पत्रकारिता जगत के प्रति डगमगाई आस्था वापस आ सके।

.श्री दीपक गुप्ता के द्वारा भेजी गयी एक रिपोर्ट के आधार पर आधारित खबर

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