पचमढ़ी गुफाएं: जहां भगवान शिव ने भस्मासुर से खुद को बचाने के लिए इन गुफाओं की शरण ली !

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कहते हैं इतिहास बोलता है वह अपनी पिछली बीती कहानियां हर उस ट्रैवेलर को सुनाता है जो उसे महसूस करने आता है, देखने आता है। कुछ इसी तरह का इतिहास मध्य प्रदेश राज्य के पचमढ़ी गुफाओं का है जो अपने अंदर कई कहानियां समेटे है। लेकिन यह धार्मिक रूप से इतनी प्रचलित है कि लोग इन गुफाओं को पूजने आते है।

भारत के मध्य प्रदेश राज्य के होशंगाबाद जिले में स्तिथ, एक खूबसूरत हिल स्टेशन है। श्री पांच पांडव गुफा पंचमढी, जटाशंकर, सतपुड़ा राष्ट्रीय अभयारण्य यहां के मुख्य आकर्षण है यह ब्रिटिश राज के बाद एक छावनी (पचमढ़ी छावनी) का स्थान रहा है। यहां मध्य प्रदेश और सतपुड़ा रेंज का सबसे ऊंचा बिंदु, धुपगढ़ (1,352 मीटर) स्थित है जो कि पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व का एक हिस्सा है। पचमढ़ी सतपुड़ा रेंज में 1067 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

पचमढ़ी में घूमने के लिए कई खास जगह हैं जैसे कि ऐतिहासिक स्मारक, झरने, प्राकृतिक क्षेत्र, गुफा, जंगल, और कई अन्य दर्शनीय स्थल। जहां प्रकृति प्रेमी पंचमढ़ी कि सुन्दरता का अनुभव कर सकते है। पचमढ़ी हिल स्टेशन पर बने घर औपनिवेशिक वास्तुकला शैली में बने हुए हैं।

माना जाता है कि पचमढ़ी का नाम हिंदी शब्द पंच (पांच) और मढ़ी (गुफाओं) से लिया गया है। एक पौराणिक कथा के अनुसार, इन गुफाओं को महाभारत युग के पांच पांडव भाइयों ने अपने तेरह वर्ष के निर्वासन के दौरान बनाया था। यह गुफाएं पहाड़ी की चोटी पर स्थित हैं।

ब्रिटिश आगमन के समय, पचमढ़ी क्षेत्र गोंड राजा भभूत सिंह के राज्य में था, हालांकि उस समय यह एक कम आबादी वाला गांव या शहर था। सूबेदार मेजर नाथू रामजी पोवार के साथ ब्रिटिश सेना के कप्तान जेम्स फोर्सिथ, जिन्हें बाद में कोटवाल बनाया गया, इन दोनों ने मिलकर सन 1857 में पचमढ़ी कि पहाड़ों की खोज अपनी झांसी कि यात्रा के दौरान की थी। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल तेजी से भारत के केंद्रीय प्रांतों के रूप में विकसित हुआ और यहां ब्रिटिश सैनिकों के लिए हिल स्टेशन और सेनिटेरियम बनाये गए।

पचमढी में देखने के लिए बी फॉल ये उन प्राकृतिक झरनों में से एक हैं जहां का पानी पीने योग्य है। इसके आसपास के शांत और हरे-भरे पहाड़ों कि सुन्दरता देखते ही बनती है। अपने पचमढ़ी टूर पर, आप इन झरनों पर दिन का समय व्यतीत कर सकते हैं। ये प्राकृतिक झरने हैं जो नीचे की घाटी में जाकर मिलते हैं। ये झरना एक बाथिंग पूल भी है जो कि इसे एक आकर्षक पिकनिक स्पॉट बनाता है जहां आप अपने परिवार और दोस्तों के साथ आनंद उठा सकते हैं। ऐसे कई पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल हैं जिनमें कई सुंदर स्थान और ऐतिहासिक महत्व कि धरोहरें हैं। ये प्राचीन गुफाएं हैं जो पूजी जाती हैं और इनका एक ऐतिहासिक महत्व हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव ने राक्षस भस्मासुर से खुद को बचाने के लिए इन गुफाओं में शरण ली थी। इन गुफाओं के अंदर, एक शिवलिंग है जो स्वाभाविक रूप से गठित होता है और इस गुफा का आकार में सांप देवता शेषनाग के आकार का है जिसका हिंदू पौराणिक कथाओं में वर्णन एक खगोलीय हजार मुंह वाले सांप के जैसा है।

ऐसा कहा जाता है कि गुफा की चट्टान का गठन भगवान शिव के बालों की तरह दिखता है। यह गुफा पचमढ़ी में देखने के लिए प्रसिद्ध स्थानों में से एक है और भक्त इन गुफाओं में जाकर भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पांडव निर्वासित हुए तो ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने इन गुफाओं के अंदर आश्रय लिया था।

पहली शताब्दी के दौरान बौद्ध भिक्षुओं ने भी इन गुफाओं में आश्रय लिया था। तब से, इन गुफाओं ने हिंदुओं और बौद्धों के लिए धार्मिक महत्व ले लिया है। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल में पांडव गुफा को जरुर देखने जाएं। पचमढ़ी हिल स्टेशन को ‘सतपुड़ा की रानी’ के नाम से जाना जाता है।

पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा में आप धूपगढ़ सनराइज और सनसेट जरुर देखने जाए यह एक सुंदर पहाड़ की चोटी है। यह ट्रेकिंग, हाइकिंग और पचमढ़ी के स्थलों के भ्रमण के लिए एक लोकप्रिय जगह है। प्रकृति और एडवेंचर लवर्स इस जगह पर खूबसूरत तस्वीरें ले सकते हैं और इसके साथ ही ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। ट्रेक करने के लिए यहां पर सुंदर घाटियों और मनमोहक परिदृश्य मौजूद हैं। पचमढ़ी का लोकप्रिय पर्यटक स्थल हांडी खोह-यह पचमढ़ी पहाड़ी स्टेशन में स्थित सबसे खूबसूरत घाटियों में से एक है। यह जमीन से 300 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। हांडी खोह घने जंगलों से ढका हुआ है और यहां पर एक समृद्ध पौराणिक इतिहास देखने को मिलता है।

ऐसा कहा जाता है कि एक जहरीले सांप ने इस भूमि को ढंक लिया था जिसे फिर भगवान शिव ने नष्ट कर दिया। इसमें एक झील थी जो सांप को खत्म करने के बाद सूख गई थी। यहां शांति भरा वातावरण है और यहां आकर आप एक पुराने आकर्षण का अनुभव कर सकते है। महादेव हिल्स (पहाड़ी) में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर बना हुआ है। इसमें भगवान शिव और शालिग्राम की एक मूर्ति है जो हिंदूओं द्वारा प्राचीन और पवित्र मानी जाती है। इस पहाड़ी इलाके में एक गुफा भी मौजूद है जिसमें चित्र बने हुए हैं,

और इसके अलावा एक तालाब है जिसमें पवित्र पानी बहता है और यहां भक्त डुबकी लगा सकते हैं। पचमढ़ी के दर्शनीय स्थल में डचस फाल्स-ये पचमढ़ी हिल स्टेशन में स्तिथ वाटर फॉल है जो राजसी महानता को दर्शाता है। यह कुछ सौ मीटर से अधिक सीमा तक झरने के रूप में गिरता है। इसमें गिरता हुआ पानी अलग-अलग कैस्केड में बदल जाता है और यहां आपको एक सुंदर दृश्य देखने को मिलता है। आप इन झरनों को देखने के लिए जा सकते हैं और तस्वीरें ले कर अपने पचमढ़ी हिल स्टेशन की यात्रा को और भी रोमांचक बना सकते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान एक बाघ अभयारण्य है और यहां आपको विभिन्न वनस्पतियों और जानवरों को देखने का मौका मिलेगा। यह एक वन्यजीव अभयारण्य है जो सतपुड़ा रेंज के पहाड़ों में स्थित है। यह पार्क 202 वर्ग मील से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें कई लुप्तप्राय प्रजातियां रहती हैं, और यहां विभिन्न प्रकार के जानवर जैसे पोर्कयूपिन, जंगली सूअर, मगरमच्छ, लंगूर, सफेद बाइसन, भारतीय विशाल गिलहरी, और इसके अलावा घास के मैदान, औषधीय पौधे, और जल निकाय मौजूद हैं।

यदि आप नवंबर और दिसंबर के महीने में इस राष्ट्रीय उद्यान में जाते हैं तो आप प्रवासी पक्षियों को भी देख सकते हैं। सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान पचमढ़ी पर्यटन स्थल में जाने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है। पचमढ़ी में प्रियदर्शिनी प्वाइंट वह जगह है जो आपको पूरे पचमढ़ी हिल स्टेशन के बारे में एक मन मोह लेने वाला बर्ड आई व्यू देता है जहां आप यहां से कई सुंदर स्थान और क्षेत्रों को देख सकते हैं। इस स्थान को 18 वीं शताब्दी में खोजा गया था और यह तब से पचमढ़ी हिल स्टेशन का सुंदर दृश्य देखने के लिए एक लोकप्रिय पर्यटक स्थल बन गया है। यहां एक शांत परिदृश्य है और तस्वीरों को लेने के लिए कैमरा लवर्स के लिए एक उत्तम स्थान है। यह पचमढ़ी हिल स्टेशन में मौजूद एक प्राचीन और सबसे सम्मानित मंदिरों में से एक है। इस मंदिर में जाने के लिए आपको 1300 सीढ़ियों को चढ़ना होगा। मंदिर के अंदर, आपको हजारों त्रिशूल मिलेंगें जो इस मंदिर की दीवार पर फंसे हुए हैं।

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