पानी रे पानी तेरा रंग कैसा

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जी के चक्रवर्ती

आज अचानक एक गाने का मुखड़ा ‘ सुनाई दिया ‘पानी रे पानी तेरा रंग कैसा’ पानी अर्थात जल! यह तो एक गाने का मुखड़ा है, लेकिन वास्तव में पानी अपने आप मे एक विशाल तरल पदार्थ है जो हम इंसानों के भौतिक जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हमारे पृथ्वी के वायुमंडल के परतों में उपस्थित अधिकांश पानी महासागर व नमकीन समुद्री जल का अंश है, जबकि शुद्ध ताजे पानी का अंश 2.5% हिस्सा ही होता है। चूंकि पृथ्वी के लगभग 78% क्षेत्र तक फैले पानी महासागरों में नीली रोशनी विखेरती है, इसलिए पृथ्वी अंतरिक्ष से नीली दिखाई देती है, और इसे एक नीले ग्रह और पीले ब्लू डॉट के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। महासागरों में पानी की मात्रा 1.5 से 11 गुना पृथ्वी के आंतरिक गर्भ में सैकड़ों मील गहरी तक पाई जाती है, हालांकि तरल रूप में नहीं।

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जल जो सम्पूर्ण पृथ्वी पर उपस्थित प्राणी जगत से पूर्व अस्तित्व में आया है। जल इस ब्रह्मण्ड में पाया जाने वाला एक मात्र ऐसा तरल पदार्थ है जिसका स्वयं का न तो कोई रूप, रंग और न गंध होता है बल्कि यह जिस वर्तन, नदी, नाले या पोखरो के अलावा जैसे बर्तन में रखा जाता या होता है यह उसी का रूप धारण कर लेती है। सबसे मृदुल सबसे, सरल और तरल होने जैसा गुण अपने अंतःकरण में समेटे इस धरती पर एक छत्र राज करने वाला यह पानी जिसकी एक-एक बूंद प्राणी जगत के लिये जीवनदायनी है। यह पानी पृथ्वी के गर्भ में मौजूद होने के अतिरिक्त बादलों के रूप में आसमान से गरज चमक के साथ पृथ्वी पर बरसती है, जो जल प्रलय लाता है तो दूसरी तरफ इससे संहार भी होता है वहीं प्राणीमात्र का पालन हार भी यही पानी है।

सम्पूर्ण दुनिया मे फैले महासागरों ने पृथ्वी का लगभग तीन चौथाई भाग घेरे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के द्वरा किये गए एक आंकलन के अनुसार पृथ्वी पर पानी की कुल मात्रा लगभग 1400 मिलियन घन किलोमीटर है जिससे पृथ्वी पर पानी की 3000 मीटर मोटी परत बिछाई जा सकती है। लेकिन इस जल क्षेत्र में मीठे जल का अनुपात बहुत थोड़ा सा ही है।

पानी विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों को चुनौती देता, इस संसार के चारो तरफ फैली हुई एक अनबुझ, अनसुलझी द्रव्य पानी अपने आसपास होने वाले हलचलों परिवर्तनों को वर्षों वर्ष तक एक कंप्यूटर की भांति किसी भी भाषा मे बोले गये शब्दों को अपने पास हजारों लाखों वर्षों तक संजोकर सुरक्षित रखने एवं एक इंसानी मष्तिष्क की तरह सोचने और उसी के सदृश्य अपने संरचना में परिवर्तन कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करने जैसी विलक्षण प्रतिभा रखती है।

सम्पूर्ण प्राणी जगत ही क्या बल्कि ब्रह्मांड मे पानी का कितना महत्वपूर्ण भूमिका है, यह बात किसी से छुपी हुई नही है। हम आप मे से अधिकतर लोगों को शायद यह ज्ञात नही होगा कि जल के अंदर भी एक संग्रहीय और स्मरण शक्ति जैसे मानविक गुणों से सम्पन्न तरल पदार्थ है और आप मे से अधिकतर व्यक्तियों को शायद यह ज्ञात हो कि प्रत्येक वस्तु की एक आंतरिक संरचना होती है। रासायनिक दृष्टि से जल आक्सीजन और हाइड्रोजन का मिश्रण (1ः2 अनुपात में) होता है। इसका अणुसूत्र H2O है। जल की संरचना में हाइड्रोजन के दो परमाणु और आक्सीजन के एक परमाणु से सहसंयोजक बन्ध (Covalent Bond) द्वारा जुड़े रहते हैं। खैर यह विज्ञान का विषय वस्तु है। पानी सम्पूर्ण पृथ्वी पर तरल अवस्था द्रव के रूप में, ठोस अवस्था बर्फ के रूप में और तीसरी भाप के रूप के रूप में पाया जाता है।

जल का प्राणी जगत का एक महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि वैज्ञानिकों का मानना है कि जीवन की उत्पत्ति जल से ही हुई है। जल हम मनुष्यों की मूलभूत आवश्यकता है। मनुष्य के शरीर में जल बहुतायात में पाया जाता है। शरीर में जैविक क्रियाएं जल के ही द्वारा सम्पन्न होती है। जल शरीर के तापमान को सामान्य बनाये रखने में सहायता करता है। साथ ही शरीर के अनुपयोगी, विषैले अवयवों को बाहर निकालने में एक महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाता है। एक व्यक्ति के शरीर में 70 प्रतिशत तक जल पाया जाता है।

जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। जल जीवन में आनन्द उत्साह, प्रेरणा श्रोत है, अन्यथा मनुष्य का जीवन अभिशाप हो जाता है।

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