आज तक किसी भी उपभोक्ता को नही मिला मुआवजा, आयोग करे विचार: उपभोक्ता परिषद

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  • उपभोक्ताओं से अपील मुआवजा प्राविधान के तहत बिजली कम्पनियों पर ठोकें दावा
  • 2006 से अनेकों उपभोक्ता समस्याओं के लिये मुआवजा लागू, उपभोक्ता लें उसका लाभ कम्पनियाॅं घाटे के नाम पर जिस तरह वसूल रही रेग्यूलेटरी सरचार्ज उपभोक्ता भी जागरूक होकर मांगे मुआवजा और करें अपना हिसाब बराबर

प्रदेश की बिजली कम्पनियाॅं जहाॅं बिजली दरों में बढोत्तरी कराने के साथ साथ अपने पुराने घाटे के नाम पर उपभोक्ताओं पर रेग्यूलेटरी सरचार्ज लगवा रही हैं वहीं उपभोक्ता परिषद अपने प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं से यह अपील करता है कि विद्युत वितरण संहिता 2005 के प्राविधानों के अनुसार मीटर, फयूज उडना, लाइन टूटना, मीटर रीडिंग न देना, भार में कमी, भार में वृद्धि व नये संयोजनों का प्रथम बिल 2 बिलिंग साइकिलिंग के अन्तर्गत न दिये जाने के लिये बिजली कम्पनियों से मुआवजा की मांग करें।

विद्युत वितरण संहिता में सभी समस्याओं के लिये एक नियत समय तय किया गया है उस समय के अन्तर्गत यदि दोष का निवारण नही होता तो बिजली कम्पनियों को मुआवजा देना होगा । वह तभी संभव हो सकेगा जब प्रदेश के उपभोक्ता जागरूक होकर मुआवजे के लिये दावा ठोकें। उदाहरण के तौर पर सबसे बडी समस्या यह होती है कि उपभोक्ता जब भी नया कनेक्शन लेते हैं तो उनका प्रथम बिल समय से जनरेट नही किया जाता उसके लिये भी मुआवजे का प्राविधान है। प्रथम बिल यदि 2 बिलिंग साइकिल के अन्तर्गत नही दिया जाता तो प्रत्येक बिल चक्र के लिये बिजली कम्पनियों को उपभोक्ता को 500 रू0 का मुआवजा देना होगा। अर्थात शहरी क्षेत्र की बिलिंग साइकिल 1 माह की है तो 2 माह बाद मुआवजा माॅंगना चाहिये और वही ग्रामीण क्षेत्र की बिलिंग साइकिल 2 माह की है तो ऐेसे मामलेां में 4 माह के बाद मुआवजा की माॅंग की जानी चाहिये। दुर्भाग्य की बात यह है कि आज तक किसी भी उपभोक्ता को मानकों के उलंघन के लिये मुआवजा नही मिला इस पर नियामक आयोग को भी सोचना होगा।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस तरीके से बिजली कम्पनियाॅं ट्रू अप दाखिल कर प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं से 4.28 प्रतिशत का रेग्यूलेटरी सरचार्ज वसूल रही हैं। इसी तरह अब उपभोक्ता परिषद प्रदेश के अपने उपभोक्ताओं को जागरूक करेगा कि उनके द्वारा मुआवजा क्लाज का उपयोग कर बिजली कम्पनियों से हर दोष के लिये जिसमें मुआवजा का प्राविधान है कम्पनियों से मुआवजा वसूल करें। जहाॅं कम्पनियाॅं अपने घाटे को छोडने के लिये तैयार नही है। वहीं प्रदेश के उपभोक्ताओं को भी अपनी समस्याओं जिनके लिये उनके द्वारा बिजली विभाग का चक्कर लगाया जाता है मुआवजा मांगा जाना चाहिये।  उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि वर्ष 2006 के बाद से विद्युत वितरण संहिता के ज्यादातर प्राविधानों के तहत मुआवजा मिलने का प्राविधान है और कुछ मामलों मे वर्ष 2011 के बाद मुआवजा मिलने का प्राविधान किया गया ऐसे में सभी उपभोक्ताओं को जागरूक होकर बिजली कम्पनियों पर अपना दावा ठोंकना चाहिये। जिस दिन प्रदेश का उपभोक्ता जागरूक हो जायेगा बिजली कम्पनियों को अंदाजा लग जायेगा कि कानून में दिया गया प्राविधान सर्वोपरि है और उसे हर किसी को हर हाल मंे मानना ही होगा। मुख्य सेवा क्षेत्र के लिये विद्युत वितरण संहिता 2005 में तय समयानुसार दोष का निवारण न होने पर मुआवजा निम्नवत है जिसको नियामक आयोग की वेबसाइट पर देखा जा सकता है।

सेवा क्षेत्र                                 देय मुआवजा प्रति बिल चक्र के अनुसार 
  • मीटर विशुद्धता                                            दोष के प्रत्येक मामले में 50
  • रूमीटर रीडिंग न देना                                     दोष के प्रत्येक मामले में 50 रू
  • भार में कमी                                                दोष के प्रत्येक मामले में 100 रू
  • भार में वृद्धि                                                दोष के प्रत्येक मामले में 100 रू
  • कनेक्शन का ट्रांसफर                                     दोष के प्रत्येक मामले में 100 रू
  • हाई वोल्टेज                                                उपभोक्ता द्वारा नुकसान के अनुसार दावा
  • जले हुये मीटर को बदलना                               दोष के प्रत्येक मामले में 50 रू