इक बगल में चाँद होगा, इक बगल में रोटियाँ

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रेल की पटरियों पर 17 मजदूरों की मौत बेहद हृदय को झकझोर देने वाली घटना है। घटना महाराष्ट्र के औरंगाबाद की है। वे कोरोना से बच गए थे और उन्हें भूख भी नहीं मार पाई थी। रेल की पटरियों के साथ-साथ चलते वह सभी अपने घर पैदल जा रहे थे। जब वे पटरियों पर थक कर गहरी नींद में सो गए। सोते-सोते ही मालगाड़ी उनपर से गुजर गयी। इस निशब्द घटना पर कुछ दर्द जो लोगों ने महसूस किये उन्हें कविता के माध्यम से पेश किया –

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इक बगल में चाँद होगा, इक बगल में रोटियाँ
इक बगल में नींद होगी, इक बगल में लोरियाँ,
हम चाँद पे, रोटी की चादर डाल के सो जाएँगे
और नींद से कह देंगे लोरी कल सुनाने आएँगे।

  • विनायक राजहंस
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साभार: सोशल मीडिया
रोटी को अपने ही खून में डुबो के खाते हुए देखा है
हाँ, मज़दूरों को रोटी के लिए मर जाते हुए देखा है.
  • राज कुमार सिंह

 

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