अकेलापन
मैं अज्ञातवास में हूं
इसलिए अपने पास हूं
जो दुनिया से जोड़े
उन सबके दरवाजे बंद कर दिये हैं
नितांत एकाकी हूं
आकाश में खिला चांद हूं
अदृश्य हूं
हवा हूं.. धूप हूं
चीड़ वन की बास हूं
खुद का खास हूं
इन दिनों
बहुत चुपचाप हूं
– आनंद अभिषेक







