साहित्य के संग कलाओं को सहेजने संवारने वाली किताबें

0
783

संगीत नाटक अकादमी गोमतीनगर में चल रहा पुस्तक मेला व अंकुरम शिक्षा महोत्सव

लखनऊ, 06 फरवरी 2019: रिजर्व बैंक के सामने संगीत नाटक अकादमी परिसर गोमतीनगर में 10 फरवरी तक चलने वाले लखनऊ पुस्तक मेले के आयोजनों में पुस्तक प्रेमियों की उमड़ने वाली भीड़ में राजुल और मेहनाज जैसे लोग भी हैं जो कला, संगीत और नाटक सम्बंधित तलाष में पुस्तक मेले का दूसरी-तीसरा चक्कर काट रहे हैं। पुस्तक मेले में कलाकारों के लिए खासी सामग्री है। यहां आने वाले बच्चों को अंकुरम शिक्षा महोत्सव सूबे के 11 जिलों से आई बाल प्रतिभाओं के कार्यक्रम भी देखने को मिल रहे हैं तो साहित्य प्रेमियों के लिए साहित्यक आयोजन भी चल रहे है। सुबह 11 बजे से रात नौ बजे और 10 फरवरी तक चल रहे इस पुस्तक मेले में प्रवेश निःशुल्क मिल रहा है।

‘महापर्व कुम्भ’ थीम पर आधारित पुस्तक मेले में कलाकृतियों की प्रदर्षनी तो चल ही रही है, यहां साहित्य और पाठयक्रम की किताबों के संग ही कला विषयक किताबें भी खूब हैं। इंदिरा गांधी कला केन्द्र नई दिल्ली की अच्छी शोधपरक पुस्तकों व सामग्री के साथ ही यहां उ.प्र.संगीत नाटक अकादमी के स्टाल में संगीत और नाट्य कला पर छायानट पत्रिका के नये-पुराने अंकों के साथ रवीन्द्रनाथ बहोरे की लोकनाट्य नौटंकी, डा.एलजी तिवारी की आल्हखण्ड की परम्परा, सुरेषव्रत राय की सारंगी, इन्द्राणी चक्रवर्ती की संगीत मंजूषा, कृष्णनारायण तैलंग की तराना संग्रह व सत्या गुप्त की कौरवी लोकगीत जैसी कई किताबें भी हैं।

आई-केअर के अंकुरम शिक्षा महोत्सव के छठे दिन आशीष व जीतेष श्रीवास्तव के संचालन में जुग्गौर प्राथमिक विद्यालय के बच्चों वंदना गौतम, विवेक राज, शाजिया बानो, प्रतिभा यादव, खुषी गुप्ता, महजबीं, अनुष्का यादव, गुलफिषां बानो, सनी व दामिनी ने नुक्कड़ नाटिका प्रस्तुत की तो कमलाबाद बधौली, मोअज्जमनगर, सथवारा गोसईगंज व कुवेरपुर बनवारी के वंषिका सिंह, कविता व प्रिया शर्मा जैसे बच्चों की नृत्य और गायन की उत्साह भरी प्रस्तुतियां देखने को मिलीं। इनके साथ ही स्वरा, सृजाम्य, शौर्य दिवाकर, अनिरुद्ध, गौरव कष्यप, अंकुर सोनी, विभांषु वर्मा, खुशी सोनकर, शुभम कष्यप, प्राची रावत, विष्वम श्रीवास्तव, सान्या रावत, षिवा शुक्ला, नितिन अवस्थी, अभिषेक शुक्ला आर्ची, लवी, दक्षिता, तान्या, निहारिका, प्रांजलि व संचिता ने मंच पर अपनी प्रतिभा दिखायी। इससे पहले महिला काव्य मंच की ओर से हुए काव्य समारोह में शोभा त्रिपाठी ने- सखियां समझ गईं मुझे प्यार हो गया…. और डा.पूनम भटनागर ने- प्रम जब स्वार्थ से परिपूर्ण होता है तो स्वार्थ बन जाता है…. जैसी पंक्तियां डा.रचना श्रीवास्तव डा.माण्डवी सिंह, डा. षिफाअत जहरा, डा.राजेषकुमारी, डा.चन्द्रा पाण्डेय, प्रो.कैलाषदेवी सिंह, डा.उषा चौधरी जैसे कवयित्रियों की रचनाओं के बीच पढ़ीं। शाम को सांस्कृतिक मंच पर अ ओपेन माइक सेशन में बहुतों ने अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ विचार भी प्रस्तुत किये। सामाजिक व मानवीय विषयों पर केन्द्रित पुस्तक लोकार्पण व सम्मान समारोह के बाद देर शाम तक मुशायरे में शायरों के कलाम गूंजते रहे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here