चाचा-भतीजा की एकता मैनपुरी में दिला सकती डिंपल यादव को रिकॉर्ड तोड़ जीत !

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पारिवारिक एकता भाजपा के लिए चुनौती, रामगोपाल, धर्मेंद्र , तेजप्रताप भी लगे हैं पूरी दमखम से


वेदव्रत गुप्ता

जसवंतनगर/सैफई (इटावा)। मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव पर प्रदेश भर की निगाहें केंद्र हो गई। नेताजी के निधन के दो महीने के अंदर-अंदर हो रहे इस चुनाव में मुलायम सिंह यादव की विरासत इस सीट पर अखिलेश यादव की पत्नी और स्व. मुलायम की पुत्र बधू के मैदान में उतरे होने से मतदाताओं में नेता जी के प्रति संवेदना एक बड़ा रोल अदा करेगी। ऐसे में लोगों की निगाह है कि मतदाता डिंपल यादव को क्या ऐसी जीत दिलाएंगे कि नेता जी के जीत के अंतर के भी पिछले रिकार्ड टूट जाएं।

डिंपल के सामने बीजेपी के रघुराज शाक्य सहित 6 प्रत्यासी मैदान में अवश्य हैं। मगर सीधा मुकाबला भाजपा और सपा प्रत्याशी के मध्य ही हों रहा है।

मैनपुरी के मैदान में उतरी डिंपल के सामने मुलायम सिंह यादव की सियासी विरासत सुरक्षित रखने का ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीत का एक नया रिकार्ड स्थापित करना भी है। मुलायम सिंह यादव की परंपरागत सीट पर सैफई परिवार के धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप सिंह यादव भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

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ऐसे में सबकी निगाह है कि डिंपल अपने ससुर मुलायम सिंह, देवर धर्मेंद्र यादव और भतीजे तेज प्रताप यादव के रिकार्ड को क्या ध्वस्त उस स्थिति में करने में कामयाब होंगी, जबकि सर्वत्र नेता जी के निधन की संवेदना है।

मैनपुरी लोकसभा सीट पर पिछले 25 वर्षों से सपा को समर्पित है। मुलायम कुनबे की तीन पीढ़िया इस सीट से सांसद रह चुकी हैं. ऐसे में डिंपल यादव के सामने मैनपुरी सीट जीतकर सिर्फ नेता जी की विरासत को बचाने की नहीं, बल्कि अपने ससुर-देवर और भतीजे के जीत के रिकार्ड को भी तोड़ने का चैलेंज है?

Imageसमाजवादी पार्टी स्थापना के बाद पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव उतरे थे। इस बाद चार बार वह सांसद रहे। उन्होंने जीत के कई रिकार्ड कायम किए। उनके भतीजे धर्मेंद्र यादव और पौत्र तेज प्रताप यादव मैनपुरी सीट से जीतकर संसद में पहुंचे यानि परिवार के तीन सदस्यों ने यहां से चुनाव लड़ा, लेकिन बड़ी जीत का रिकार्ड मुलायम सिंह यादव के पास ही रहा।

मुलायम सिंह के निधन के बाद अब डिंपल के सामने अपने ससुर और धरतीपुत्र नाम से जग विख्यात नेता जी की विरासत को आगे ले जाने चुनौती है। भाजपा ने रघुराज शाक्य को उतारकर इस सीट पर गंभीर चुनौती दी है। कन्नौज लोकसभा सीट से डिंपल निर्विरोध एक बार चुनी गईं थीं और एक इतिहास बनाया था।

मैनपुरी लोकसभा सीट पर नेताजी पहली बार 1996 के लोकसभा चुनाव में उतरे थे, तब उन्होंने भाजपा के उपेंद्र सिंह चौहान को 51,958 वोटों से हराया था और पहली बार संसद में पहुंचे थे।

नेताजी का 364,666 वोटो से जीतने का है रिकॉर्ड:

बाद में वह मैनपुरी सीट से चार बार सांसद रहे। उन्होंने 2014 के चुनाव में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने का रिकॉर्ड कायम किया ,जबकि मैनपुरी सीट के साथ-साथ आजमगढ़ से भी वह चुनाव लड़े थे। 2014 में मैनपुरी सीट पर कुल 999427 मतों की वोटिंग हुई थी। अकेले मुलायम सिंह यादव को 595918 वोट पड़े थे। बीजेपी के चौहान 231252 वोट मिले। बसपा की डॉ. संघमित्रा मौर्य को 142833 वोट मिले थे। इस तरह से मुलायम 364666 रिकार्ड वोटों से जीते थे, जो मैनपुरी सीट पर जीतने का रिकार्ड है। इतने ज्यादा वोटों से अभी तक कोई दूसरा जीत दर्ज नहीं कर सका।

2004 के चुनाव में मैनपुरी सीट पर मुलायम को 460470 वोट मिले थे बसपा के अशोक शाक्य को 122600 वोट, मुलायम सिंह ने 337870 वोटों से जीत दर्ज की थी। 2009 के चुनाव में सपा प्रत्याशी मुलायम सिंह ने 173096 वोटों से जीत दर्ज की थी। नेता जी की जीत का रिकार्ड 2019 के चुनाव में घटकर एक लाख से नीचे आ गया। भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य को मात्र 94389 वोटों से हराया था।

2004 में जब मुलायम सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने मैनपुरी सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद हुए उपचुनाव में उनके युवा भतीजे धर्मेंद्र यादव, जो इलाहाबाद से वकालत डिग्री लेकर आए ही थे, मैदान में उतरे। उन्होंने 348999 वोट हासिल करते बसपा के अशोक शाक्य को। 179713 वोटों से हराते जीत दर्ज की वह मुलायम सिंह के जीत का रिकार्ड के आसपास भी नही पहुंचे। 2014 में मुलायम के पौत्र तेजप्रताप सिंह यादव ने चुनाव लडा था।

मुलायम सिंह यादव तब दो क्षेत्रों आजमगढ़ और मैनपुरी सीट से सांसद के रूप में जीते थे। मैनपुरी सीट उन्होंने छोड़ दी थी।तेज प्रताप ने 2014 के उपचुनाव में मैनपुरी सीट पर 653786 वोट हासिल किये और भाजपा के प्रेम सिंह शाक्य 332537 ही पा सके थे। तेज प्रताप यादव 321249 वोट हासिल कर नेता जी के रिकॉर्ड के करीब पहुंचे थे और धर्मेंद्र यादव की जीत का रिकार्ड तोड़ दिया था।

अखिलेश खुद संभाले हैं मैनपुरी की कमान:

अभी 11 अक्तूबर को नेता जी के निधन से मैनपुरी में उपचुनाव हो रहा। अब डिंपल यादव चुनावी मैदान में हैं। मैनपुरी से उपचुनाव लड़ रही अपनी धर्मपत्नी डिंपल के चुनाव मैदान में सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद मोर्चा संभाले हैं।डिंपल को रिकार्ड वोटों से जिताने के लिए सपा के छोटे बड़े सभी नेता घर घर दस्तक दे रहे। धर्मेंद्र यादव से लेकर तेज प्रताप यादव, आदित्य यादव, प्रो राम गोपाल यादव और शिवपाल सिंह यादव तक ने विधानसभा बार पूरे संसदीय इलाके में डेरा जमाया हुआ है।

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हालांकि 6 प्रत्याशी मैदान में हैं, मगर डिंपल और रघुराज के बीच सीधी लड़ाई है, कांग्रेस और बसपा मैदान में नही है।इसलिए डिंपल के लिए यह सीट और भी चुनौती पूर्ण बन गई है, क्योंकि मैनपुरी सीट पर दो लाख दलित वोट हैं और बसपा को इस सीट पर अबत77 क ज्यादा से ज्यादा तीस फीसदी वोट ही मिला है तो कम से कम 10 फीसदी।इस तरह से मैनपुरी सीट पर बसपा का एवरेज वोट 16 फीसदी के करीब है।

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2019 के चुनाव में सपा और बीजेपी के बीच महज 11 फीसदी वोटों का ही अंतर रहा था।ऐसे में मायावती का वोट उपचुनाव में काफी निर्णायक भूमिका में है। ऐसे में बीजेपी के लेकर सपा तक दलित वोटों को साधने की कवायद कर रही है।अखिलेश के लिए ऐसी स्थिति में डिंपल यादव को सिर्फ जिताना ही नहीं बल्कि मैनपुरी में मुलायम परिवार के बाकी सदस्यों से ज्यादा वोट पाने के रिकार्ड को भी तोड़ने की चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे में देखना है कि डिंपल यादव क्या अपने ससुर मुलायम सिंह, देवर धर्मेंद्र यादव और भतीजे तेज प्रताप यादव के जीत का रिकार्ड तोड़ पाएंगी। अब तो परिवार उसी तरह एक है, जैसे नेताजी, धर्मेंद्र, तेज प्रताप द्वारा बने रिकार्ड्स के दौरान था।अखिलेश, रामगोपाल, शिवपाल एक जुट प्रचार अभियान में जुटे हैं।

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