सांप और चिड़िया

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शगुन सिंह, क्लास सिक्स, सिटी कान्वेंट राजाजी पुरम लखनऊ

एक जंगल में मुनमुन नाम की एक चिड़िया रहती थी । वह चिड़िया रोज अपने बच्चों के लिए खाना लेने जाती थी एक दिन उसे अपने घोसले की तरफ सांप दिखाई दिया। वह बहुत काला और भयानक था। उसे देखकर चिड़िया बहुत डर गयी। उसने सोचा यह तो बहुत ही भयानक और खतरनाक सांप है यह मेरे बच्चों को आज खा जाएगा मुझे कुछ उपाय करना पड़ेगा।

यही सोचकर वह कुछ उपाय ढूंढने लगी। वह अपने घोंसले के आसपास बार-बार जाकर मंडराने लगी उसके बच्चे ची ची ची कर रहे थे। वह बेहद परेशान घूम रही थी तभी उसे पेड़ों के आसपास दो बंदर दिखाई दिए उसने सोचा क्यों न इनसे मदद मांगी जाए, यही सोचकर वह उन बंदरों के पास पहुंची और उनसे हाथ जोड़कर पूरी बात बता दी।

वे दोनों बंदर बेहद चंचल स्वभाव के थे उन्होंने कहा देखने में तो यह काफी भयानक लग रहा है लेकिन चिड़िया रानी तुम चिंता मत करो हम इससे निपट लेंगे और इसे इस जगह से भगा देंगे।

यहां से यह कहकर दोनों बंदर पेड़ से नीचे उतर उतर आए, और इसके बाद वह उस तरफ पहुंचे जहां सांप जा रहा था उन्होंने देखा वह सांप उस पेड़ पर चढ़ रहा था जिस पर चिड़िया के बच्चे घोसले में बैठे ची ची कर रहे थे। सांप पेड़ पर धीरे- धीरे चढ़ने लगा।

यह देखकर दोनों बंदर झट से उसके आसपास पहुंच गए और एक ने उसकी पूंछ पकड़कर खींची सांप ने फुफकार मारा और उन बंधुओं को हट जाने के लिए कहा लेकिन बंदर बेहद चालाक और चंचल के साथ खुराफाती दिमाग के थे।

उन्होंने एक लकड़ी जो डंडे की तरह थी उससे उसकी पीठ पर वार कर दिया। सांप तिलमिला उठा लेकिन दर्द सहने के बाद भी वह पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करने लगा। तभी दूसरे बंदर ने फिर सांप की पूंछ पकड़कर खींचा तो सांप चिल्लाया और बोला – ‘चलो भागो यहां से बंदरों नहीं तो मैं तुम्हें खा जाऊंगा !’

यह बात सुनकर बंदर हंस पड़े और उन्होंने पुनः उसकी पीठ पर फिर से डंडा दे मारा। सांप ने देखा कि यह तो मुझे ऊपर चढ़ने ही नहीं दे रहे हैं तो वह एक जगह स्थिर होकर उन दोनों को घूरकर उन्हें बार-बार डरा रहा था और भाग जाने के लिए बोल रहा था।

लेकिन ऐसे तो वह भागने वाले नहीं थे वह उसके पीछे ही पड़ गए। एक बंदर उसकी पीठ पर डंडा मारता तो दूसरा पूंछ पकड़ कर नीचे खींचने की कोशिश करता।

इससे सांप परेशान होकर ऊपर की ओर चढ़ने की कोशिश करता लेकिन दोनों के डंडा मारने और पूंछ पकड़कर खींचने से वह धड़ाम से नीचे बेहाल होकर गिर पड़ा।

तभी एक बंदर ने उसके सर पर डंडा मारा सांप बोला क्या कर रहे हो दूर हो जाओ नहीं तो मैं तुम दोनों को मार दूंगा !

यह बोलकर सांप ने हमला करने की कोशिश की और उन दोनों बंदरों को काटने की कोशिश की लेकिन बंदर फौरन दूर भागकर जा खड़े होते थे।

सांप पुनः चढ़ने की कोशिश करता तो बंदर फिर से पूछ पकड़ कर खींचते हैं और डंडे से मारते । बार-बार यही क्रम चलता रहा तो सांप बुरी तरह घायल हो गया उसके सर से और पीठ से खून निकलने लगा।

अंततः उसने पेड़ पर चढ़ने का इरादा छोड़कर जंगल की ओर ओर भाग गया।

इस तरह चिड़िया के बच्चों की जान बच गयी। चिड़िया ने उन मददगार बंदरों को बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया और सदैव संकट में साथ देने का वादा किया। बंदरों ने भी उसे कहा कि बहन अब तुम्हें कोई परेशान नहीं करेगा हम लोग यही पर तब तक रहेंगे जब तक तुम्हारे बच्चे बड़े नहीं हो जाएंगे। और इस प्रकार वे सभी आपस में प्रेम से रहने लगे।

शिक्षा : संकट में एक दूसरे का जरूर साथ देना चाहिए।

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