लघुकथा: कन्या के रूप में क्या दुबारा धरती पर आना पसंद करोगी !

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एक लड़की

अंत में उसे एक परछाईं महसूस हुई, इसे भी वो दरिंदा समझी।
अक्स से वो डर कर इशारों में बोली- अब तो छोड़ दो !

नहीं बेटी मैं यमराज हूं। तुम्हें लेने आया हूं।

सुनकर उसे तसल्ली हुई, रोते हुए उसने इशारों से कहा- अच्छा हुआ आप आ गये। मेरी जीभ भी काट दी गई है। मैं बोल नहीं सकती। मेरे मन की बात समझये।
मुझे आप का ही इंतेज़ार था। ले चलिये मुझे यहां से।
चलो।
लेकिन बेटी दुबारा तुम्हें किसी भी रूप में नया जन्म लेकर इस धरती पर आना होगा। तुमने बहुत दर्द और पीढ़ा सही है। इसलिए तुम्हें वरदान मिला है। अपनी इच्छा से तुम किसी भी रूप में जन्म लोगी।

कन्या के रूप में क्या दुबारा धरती पर आना पसंद करोगी !

क़तई नहीं।

तो फिर।

गाय.. हथिनी.. या किसी भी रूप मे नया जन्म ले लूंगी।
बस लड़की नहीं।

लघु कथा: मीडिया की जीभ और रीढ़

पहले तुम्हारी जीभ काटी, ताकि जीभ कटने का सच नहीं बयान कर सको।
उससे पहले तुम्हारी रीढ़ तोड़ी, ताकि उनके आगे हमेशां झुके रहो। तन कर खड़े होकर सवाल उठाने लायक़ नहीं रहो।

लेकिन मीडिया का बलात्कार करने की ज़रूरत नहीं पड़ी, स्वेच्छा से ये बिस्तर पर लेटी है।

मुझे याद है पहले ज़माने के चोर-उचक्के एक रात बल्ब फोड़ देते थे। दूसरी रात अंधेरे में चोरी करते थे। – नवेद शिकोह

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