शिक्षक दिवस: राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह

0
139
डॉ दिलीप अग्निहोत्री
शिक्षक दिवस पर मुख्य समारोह लखनऊ के लोकभवन में  आयोजित किया गया। इसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और व्यवहारिक विषयों पर भी ध्यान देने का आह्वान किया। किताबी ज्ञान के साथ साथ स्वछता, स्वास्थ, सद्भावना, समरसता जैसे विचारों को शिक्षक दे सकते है। जिससे बड़े होकर विद्यार्थी अच्छे नागरिक भी बनें।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि शिक्षक संवेदनशील बनें।बच्चे की प्रतिभा को पहचानकर आगे बढ़ायें। विद्यार्थियों में स्वाभिमान व आत्म सम्मान की नींव डालें। शिक्षक गलतियों को सुधारता है। एक शिक्षक को विद्यार्थी की पारिवारिक स्थिति को समझना चाहिए। बच्चों के विकास के लिये उनके सामने कोई विषय रखें। उसके बारे में बच्चों में लिखने की आदत डालें। छोटी छोटी बातें भी बड़ी सीख देती हैं। सुयोग्य एवं कुशल शिक्षको से विद्यार्थियों का भविष्य बनता है। बच्चों में स्वच्छता की आदत डालें। आनन्दी बेन स्वयं बचपन से शिक्षकों के साथ विद्यालय की सफाई के लिये श्रमदान करती थीं। स्वच्छता और सफाई का भाव महात्मा गांधी ने शुरू किया था। जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आगे बढ़ाया।
उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों से उन्हें ज्ञात हुआ कि एक शिक्षक ने अपने एक माह के वेतन रूपये अस्सी हजार से बालिकाओं के लिये विद्यालय में शौचालय का निर्माण कराया। यह संवेदना और विचार का विषय है। ऐसे अच्छे शिक्षकों को समाज के सामने प्रस्तुत करने की जरूरत है। जिससे शिक्षक और विद्यार्थी दोनों प्रेरणा लें। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की सराहना की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कहा कि जीवन का लम्बा अनुभव ही शिक्षा की वास्तविकता होती है। हम सबका जीवन सीखने के लिये है, हर घटना हमें सीखाती है। आवश्यकता इस बात की है कि उसे हम स्वयं से कैसे जोड़ें। उत्तर प्रदेश में नकल विहीन परीक्षा, पठन पाठन के लिये उपयुक्त वातावरण, प्रतिस्पर्धा के लिये प्रोत्साहन आदि से लोगों के नजरिये में बदलाव आया है। सरकार ने शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती भी प्रारम्भ कर दी है।  निजी शिक्षण संस्थान प्रदेश के सहयोगी हैं, सरकार ने उनके लिये भी नियमावली बनायी है। निजी विश्वविद्यालय अधिनियम भी बनाया है।
शिक्षा में परिवर्तन दिखना चाहिए। केवल डिग्री नहीं, विद्यार्थियों का भविष्य भी उज्जवल होना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने विषय का ज्ञान होना चाहिए। शिक्षक लेखन का कार्य करें जिससे आगे आने वाली पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले। केवल सिद्धांतिक नहीं बल्कि व्यवहारिक ज्ञान भी अर्जित करें। महिला सशक्तीकरण पर विचार करने की आवश्यकता है। देश के विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। अध्यापक अपनी जिम्मेदारी को महसूस करते हुये भावी पीढ़ी का निर्माण करें। केन्द्र एवं राज्य सरकार के महत्वपूर्ण निर्णयों पर विद्यालयों में चर्चा होनी चाहिए। उप मुख्यमंत्री डाॅ दिनेश शर्मा ने कहा कि शिक्षक नई पीढ़ी का सृजन करते हैं। सरकार ने शिक्षा के उन्नयन के लिये अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाये हैं। सरकार ने सेवा शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here