संकट में लोमड़ी का धैर्य

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शेर और लोमड़ी की कहानी

भारत के दक्षिण, पूर्व व पश्चिमी हिस्से में सटे नेपाल में एक विशाल जंगल है। उस जंगल में खुरैट नामक एक शेर रहता था ।

वह शेर जंगल के जानवरों को मारकर अपनी भूख मिटाया करता था ।

एक बार वह शिकार करने निकला लेकिन अनेको प्रयत्न करने पर भी उसके हाथ कोई भी शिकार नहीं लगा। वह मारे भूख के परेशान और खिन्न उजड़ा-उजड़ा जंगल जंगल घूम रहा था कि अचानक उसे जंगल के मध्य भाग में एक गुफा नजर आयी, शेर सोचने लगा कि इस गुफा में कोई न कोई जानवर अवश्य रहता होगा। यह सोच कर शेर धीरे से इसके समीप की एक झड़ी में छुप कर बैठ गया और अपने शिकार का इंतजार करने लगा। जैसा कि उसने सोचा कि जैसे ही इस गुफा में से कोई शिकार बाहर निकलेगा, मैं उसे धर दबोचूंगा।

शेर बहुत देर तक गुफा के बाहर बैठा इंतजार करता रहा मगर कोई न तो कोई जानवर गुफा से बाहर निकला और नही कोई गुफा के अंदर प्रवेश किया।

अचानक शेर ने सोचा कि हो सकता है कोई भी जानवर इस वक्त गुफा में ना हो वह कहीं बाहर गया हो। इसलिए मुझे गुफा के अंदर जाकर उसका इंतजार करना चाहिए और जैसे ही वह गुफा के अंदर आएगा मैं उसे खा जाऊंगा।

ऐसा सोचते हुए शेर ने गुफा के अंदर प्रवेश किया और इसके एक कोने में जा छिपा।

उस गुफा में लोमड़ी रहा करती थी। थोड़ी देर बाद जब लोमड़ी वापस अपने घर आयी तो उसे गुफा के बाहर किसी के पैरों के निशान दिखाई दिए।

उसे इस तरह के बड़े पंजो के निशान देख कर यह समझते देर न लगी कि यह किसी बड़े खतरनाक जानवर के पंजे प्रतीत होते हैं।

लोमड़ी बहुत धूर्त और होशियार थी।

उसने गुफा के अंदर जाने से पहले जोर से एक आवाज लगाई।

‘गुफा ओ गुफा’ लेकिन कोई भी जवाब नही आया वैसे गुफा आवाज कैसे देता वह तो निर्जीव पत्थर था ऐसे में उत्तर कौन देता ? लोमड़ी ने इसी तरह दो-तीन बार जोर जोर से आवाज लगाई।

‘अरे मेरी गुफा तू जवाब क्यों नहीं देती?
आज तुझे क्या हो गया?
हमेशा मेरे लौटने पर तुम मेरा स्वागत करती है।
अगर तूने जवाब नहीं दिया तो मैं किसी दूसरी गुफा में चली जाऊंगी।

लोमड़ी की बात सुनकर शेर ने सोचा कि आज मेरे यहां होने के कारण शायद गुफा डर गई है और इसीलिए आज वह लोमड़ी की स्वागत करने की हिम्मत नही जुटा पा रही है अगर गुफा ने उसका स्वागत नहीं किया तो वह यहां से चली जाएगी।

यह बात शेर के मष्तिक में आते ही वह अपनी भारी आवाज में जोर से बोला,
आओ आओ मेरे दोस्त, तुम्हारा स्वागत है।

शेर की आवाज सुनकर लोमड़ी वहां से भाग निकली लेकिन शेर अभी भी गुफा के अंदर उसका इंतजार कर रहा था।

बच्चों इस कहानी से तुम्हे क्या सबक मिला – असमंजस की स्थिति में धैर्य एवं बुद्धि से काम लेना चाहिए।
और अपनी बुद्धिमानी से आने वाले संकट से बचा जा सकता है।

प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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