स्मार्ट मीटर से दो कदम आगे निकला सौभाग्या में लगने वाला इलेक्ट्रॉनिक मीटर, बिना लगे ही लाखों यूनिट चला, अभियंताओं के होश उड़े, रिपोर्ट कार्यवाही के लिए भेजा

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गबन के लिए लिखा पत्र कहा क्यों न करे प्राथमिकी दर्ज

यूपी प्रदेश में लग रहे इलेक्ट्रॉनिक मीटर व स्मार्ट मीटर जंपिंग का बवाल बढ़ता जा रहा है आज उपभोक्ता परिषद ने एक प्रेससनोटे के माध्यम से दावा किया कि यह देश के ऊर्जा अभियंताओ के लिए रिसर्च का मामला बनता है उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अभी तक उपभोक्ताओ के घर में लगने वाला इलेक्ट्रॉनिक मीटर व स्मार्ट मीटर जम्प करता पकड़ा गया लेकिन अब पावर टेक कंपनी के इलेक्ट्रॉनिक मीटर इटावा में उपभोक्ताओ के परिसर में बिना लगाये ही मीटर में लाखों यूनिट स्वता बन रही अभियंताओ ने जब 6 मीटर को चेक किया तो उनके होश उड़ गये मीटर में स्वत: हजारो और लाखों यूनिट बन गया। उपभोक्ता परिषद ने कहा कि इसका मतलब मीटर तकनीकी रूप से फैल है और उसमे लगी तकनीकी कमियों के चलते जो बैटरी लगी है वह रीडिंग स्वत: बढ़ा रही है जो अपने आप में बहुत गंभीर मामला है कि सौभाग्या में कैसे मीटर खरीद लिए गये और उसका वेंडर अनुमोदन अभियंताओ द्वारा ही दिया गया है।

उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अब एक दूसरा बढ़ा मामला जो और सभी को चिंता में डाल देगा। रायबरेली में जीनस कंपनी को इलेक्ट्रॉनिक मीटर लगाने का काम दिया गया कंपनी ने उपभोक्ताओ के घरो में बिना मीटर लगाए ही ऑनलाइन सिस्टम में मीटर फीड कर दिया । जब उपभोक्ताओ के गलत बिल बने तो हंगामा मच गया तुरंत अधिशाषी अभियंता परीक्षण ने जीनस कंपनी को पत्र लिख कहा गया कि आप द्वारा फोर्जरी गबन जैसा कृत्य किया गया और मीटरों का दुरुपयोग कर लाखों रुपये की हानि पहुचायी गयी मीटर गबन किया गया। क्यों न आपके खिलाफ प्रथिमिकी दर्ज कराई जाय।

विभाग के कुछ उच्चाधिकारी मीटर निर्माता कम्पनियो के साथ खड़े हैं: अवधेश वर्मा

इस मामले पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा प्रदेश में उपभोक्ता के घर में लगने वाला मीटर रूपी तराजू जब संदेह के घेरे में है ऐसे में बिजली निगमों की छवि धूमिल होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जब तक मीटर निर्माता कम्पनियो के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाया जायेगा यह खेल ऐसे ही चलता रहेगा और सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिजली विभाग के कुछ उच्चाधिकारी मीटर निर्माता कम्पनियो के साथ खड़े हैं जबकि उन्हे अपने उपभोक्ताओ के साथ खड़ा होना चाहिए जब कभी मीटर निर्माता कम्पनियो के खिलाफ कार्यवाही की बात होती है तो उच्चाधिकारी बहुत तकनीकी ज्ञान बघारते हुए मीटर कितना खराब हुवा उसका प्रतिशत निकलाने में लग जाते है मीटर लेबोटरी में फेल साबित हुआ तुरंत मीटर निर्माता कम्पनियो को बचने के लिए उनका दूसरा मीटर जाँच करने के लिए लेबोटरी में भेज कर उसकी रिपोर्ट मीटर निर्माता कंपनी अपने मुताबिक करवा लेते जो बहुत बढ़ा रैकेट है इसका खुलासा होना जरूरी है इसीलिए उपभोक्ता परिषद सीबीआई जाँच की मांग लगातार कर रहा है।

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