2 करोड 10 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को मिलेगा उनकी जमा सिक्योरिटी पर 6.75% ब्याज

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  • उपभोक्ता परिषद के जनहित प्रत्यावेदन पर आयोग का बडा फैसला
  • उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं से की अपील कि वह अपने आगामी बिलों में सुनिश्चित कर लें कि उन्हें ब्याज मिला कि नही
लखनऊ, 10 मई। प्रदेश के लगभग 2 करोड़ 10 लाख विद्युत उपभोक्ताओं को उनके द्वारा जमा की गयी सिक्योरिटी पर 2017-18 में ब्याज दिये जाने के मामले में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा द्वारा कल नियामक आयोग में दाखिल जनहित प्रत्यावेदन पर नियामक आयोग अध्यक्ष एस के अग्रवाल व सदस्य कौशल किशोर शर्मा द्वारा अपना फैसला सुनाते हुये सभी बिजली कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (4) के अन्तर्गत प्राविधानित विद्युत वितरण संहिता 2005 की धारा 4.20 (1) के तहत आरबीआई 1 अप्रैल को बैंक दर 6.75 प्रतिशत ब्याज दिये जाने का आदेश प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं के लिया कर दिया है। आयोग के सचिव संजय श्रीवास्तव द्वारा आदेश को सभी प्रबन्ध निदेशकों व उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष को भेज दिया गया है।
आदेश पारित होने के बाद उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष व सदस्य से मुलाकात कर उनका प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से आभार व्यक्त करते हुये कहा कि अब आयोग का यह नैतिक कर्तव्य है कि वह यह भी सुनिश्चित कराये कि पूर्व वर्षों में बडे पैमाने पर जिन विद्युत उपभोक्ताओं को उनकी सिक्यूरिटी पर ब्याज नही मिला है उसे भी उन्हें दिलाया जाये। आज आयोग द्वारा जारी आदेश से प्रदेश के सभी विद्युत उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलेगा यदि 1 किलोवाट का उपभोक्ता रू0 300 प्रति किलोवाट कनेक्शन लेते वक्त जो सिक्योरिटी विभाग के पास जमा की है उस पर उसे 6.75 प्रतिशत ब्याज के आधार पर लगभग रू0 20 उसके आगामी बिल में समायोजित होगा। इसी प्रकार जिन उपभोक्ताओं द्वारा प्रति किलोवाट के हिसाब से अधिक सिक्योरिटी जमा की है उनको उसी अनुपात मंे ब्याज उनके बिल में प्राप्त होगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की वर्ष 2017-18 में टैरिफ आदेश के तहत जो कुल सिक्यूरिटी समस्त श्रेणी के उपभोक्ताओं की जमा है वह लगभग 3072 करोड़ है। ऐसे में वर्ष 2017-18 में प्रदेश के समस्त उपभोक्ताआं को लगभग रू0 227 करोड़ सिक्योरिटी पर ब्याज के रूप में उनके बिलों में समायोजित होगा।

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