बृज की होली के रंग, मनायें राधा-कृष्ण के संग

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लखनऊ, 04 मार्च। फागुन का महीना आते ही माहौल रंग-उमंग से सराबोर हो जाता है इससे गीता परिवार भी अछूता नहीं रहा। गीता परिवार उ.प्र. के तत्वावधान में रविवार को शास्त्रीनगर केन्द्र होलिकोत्सव (फूलों की होली नन्हें-मुन्नों के संग) श्री दुर्गाजी मंदिर, कल्याणकारी आश्रम लखनऊ में धूमधाम से मनाया गया। मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्यागिरी मुख्य अतिथि के रूप में पधारकर सभी को आशीर्वाद प्रदान किया।

इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की गयी। सभी बालक प्रार्थना (सद्गुणों की साधना), गीता अध्याय, देशभक्ति गीत (चंदन है इस देश की माटी) का भी गायन किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र गोयल होलिकोत्सव में प्रश्नोत्तरी व कहानी के माध्यम से सभी को बताया कि होली का पर्व क्यों मनाते हैं ? बुराई पर अच्छाई की जीत के कारण होली मनाई जाती है।

कार्यक्रम संयोजक ज्योति शुक्ला ने बताया कि वृन्दावन की खुशबू को समेटे फूलों की होली सुरभि प्रवाह के लिए बच्चों को राधा-कृष्ण व गोपियां का भव्य स्वरूप सज्जित किया गया, राधा- माही वर्मा, कृष्ण- टिसा श्रीवास्तव और गोपियां- अक्षता श्रीवास्तव, जान्हवी तिवारी, कशिश तिवारी, मान्हवीराज साहू ने होली खेल रहे नंदलाल, वृंदावन की कुंज गलिन में गीत पर बच्चों ने रंगारंग नृत्य प्रस्तुति दी। राधा-कृष्ण का फूलों से ढक जाना मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा। आज बिरज में होरी रे रसिया…, रंग बरसे, गुलाल बरसे… जैसे गीतों पर श्रोताओं ने भी धमाल मचाया। रूपल शुक्ला ने बताया कि दो सौ किलो गुलाब, गेंदा, बेला सहित अन्य खुशबूदार फूलां की पंखुड़ियों का प्रयोग होली खेलने में किया गया। इसका उद्देश्य केमिकल रंगों का इस्तेमाल न करके फूलों की होली खेलने के लिए प्रोत्साहित करना है।