पांच साल में लगाए जाएंगे सौर ऊर्जा के 10,700 मेगावॉट के प्रोजेक्ट

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लखनऊ,30 जनवरी। उत्तर प्रदेश सरकार सूबे को बिजली के कमी को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास करने में जुटी है। सरकार पारम्परिक ऊर्जा के विकल्प के रूप सौर ऊर्जा की ओर देख रही है। सूबे के क्षेत्रफल और यहां पड़ने वाली सूरज की रोशनी का अध्ययन करने के बाद अब इस दिशा में सार्थक कदम उठाने की योगी सरकार ने ठान ली है। यही वजह है कि आगामी पांच वर्ष में सूबे में 10,700 मेगावॉट सौर बिजली पैदा करने का लक्ष्य सरकार ने तय किया है। उत्तर प्रदेश अतिरिक्त ऊर्जा स्त्रोत विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि सरकार ने नई नीति भी लागू कर दी है। सरकार ने 6000 सोलर पॉवर प्लांट्स लगाने का फैसला लिया है।

उन्होंने बताया कि लक्ष्य को दो हिस्सो में बांटा गया है। इसमें 6400 मेगावॉट के बड़े प्रोजेक्ट लगाए जाएंगे। वही बाकी के 3400 मेगावॉट के प्रोजेक्ट घरेलू हो सकते हैं। यही नहीं घरेलू उपभोक्ता आपसी सहमति से भी प्रोजेक्ट लगा सकते हैं। पहले सौर प्रोजेक्ट शुरू कराने के लिए सीआईजी निदेशालय के एनओसी की आवश्यकता पड़ती थी। लेकिन अब सौर ऊर्जा के ग्राहकों को निदेशालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। अधिकारी ने बताया कि अब बिना एनओसी के भी प्लांट्स को शुरू किया जा सकेगा।

जानकारी के मुताबिक, सूबे के पास सौर ऊर्जा से 22,300 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता है। इसके लिए सरकार ने सूबे की ऊर्जा क्षमताओं का दोहन करने का फैसला किया है। केन्द्र सरकार के बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट एमएनआरई के तहत सरकार को 10,700 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य दिया गया है। विशेषज्ञों की मानंे तो 1985 में ही वैकल्पिक ऊर्जा विभाग की स्थापना की गयी थी। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। विभाग को हमेशा बतौर विकल्प ही समझा गया।

सरकार का सारा जोर बुंदेलखंड व पूर्वांचल को लेकर है। अधिकारी ने बताया कि इस ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पहल शुरू कर दी है। जिसमे प्राधिकरण 50 से 150 मेगावॉट के सोलर प्रोजक्ट प्लांट्स के लिए 15 किलोमीटर तक की ट्रांसमिशन लाइन मुहैया कराएगा। ऐसा इसलिए क्योंकि आमजन के लिए ट्रांसमिशन लाइन महंगा सौदा हो सकता है। इसलिए इसके लिए सरकार मदद करेगी।

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