निजीकरण के विरोध में ‘रेड एलर्ट’ जारी, 27 मार्च को होगा बड़ा आन्दोलन

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एसोसिएशन का बड़ा आरोप जो वर्तमान सरकार पिछली सरकारों के फैसलों की करती है आलोचना और वहीं दूसरी ओर टोरेन्ट पावर के पूर्व सरकार के निर्णय को आधार बनाकर 5 शहरों का ले लिया कार्मिक विरोधी निजीकरण का फैसला
लखनऊ, 25 मार्च। निजीकरण के विरोध में उप्र पावर आफीसर्स एसोसिएशन की प्रान्तीय कार्य समिति की बैठक में आज पूरे आन्दोलन की समीक्षा की गयी और प्रदेश भर के दलित व पिछड़े वर्ग के अभियन्ताओं के लिये यह रेड एलर्ट जारी किया गया है कि वह 27 मार्च को आन्दोलन में भाग लेकर अपनी पूरी ताकत दिखाकर सरकार को यह दिखा दें कि निजीकरण का फैसला सरकार के लिये पूरी तरह असंभव साबित होगा। जो वर्तमान भाजपा सरकार एक तरफ सपा व बसपा सरकार में लिये गये निर्णयों की हर मौके पर आलोचना से नहीं चूकती, वही उप्र की सरकार अब पिछली सरकारों में कार्मिक विरोधी टोरेन्ट पावर के निर्णय को आधार बनाकर 5 शहरों के निजीकरण का फैसला ले रही है।
इससे ऐसा साबित होता है कि वर्तमान सरकार का निजीकरण का फैसला उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिये है, क्योंकि टोरेन्ट पावर के मामले में सीएजी रिर्पोट में यह खुलासा हो चुका है कि गलत निर्णय व अनुबन्ध में अनियमितता के चलते कुल लगभग 5 हजार करोड़ का घाटा टोरेन्ट पावर का अनुबन्ध पूरा होने तक हो जायेगा।
उप्र पावर आफिसर्स एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, अति. महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपी केन, संगठन सचिव, एस पी सिंह  अजय कुमार, दिग्विजय सिंह, पीपी सिंह ने कहा कि अभी भी समय है उप्र की सरकार को निजीकरण के अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन मनमाने तरीके से बिजली विभाग में निर्णय करा रहा है, उससे आने वाले समय में ऊर्जा क्षेत्र को तबाही के रास्ते पर जाने से कोई नहीं रोक पायेगा। एक तरफ पावर कार्पोरेशन उदय स्कीम की सफलता के नाम पर पूरे प्रदेश के अभियन्ताओं से रात दिन काम कराने पर आमादा है और वहीं दूसरी ओर निजीकरण का फैसला लेकर यह साबित कर दिया है कि पावर कार्पोरेशन को निजी घरानों की ज्यादा चिन्ता है, जिसे एसोसिएशन कामयाब नहीं होने देगा।

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