बिजली कंपनियों ने गांव के उपभोक्ताओं का करोड़ों छूट का पैसा हड़पा: उपभोक्ता परिषद

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टैरिफ आदेशों का उलघन कर प्रदेश के लगभग 20 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं जो मीटर्ड में हुये सिफ्ट उन्हें मार्च 2015 से नहीं दिया गया

लखनऊ,14 जुलाई 2019: उपभोक्ता परिषद ने कहा कि प्रदेश के लगभग 20 लाख ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ता जो मीटर्ड में शिफ्ट हुये थे, जिन्हें अनमीटर्ड से मीटर्ड में सिफ्ट होने पर 10 प्रतिशत की छूट का प्राविधान था, आयोग आदेश के तहत उपभोक्ताओं को लाभ नहीं दिया गया, जनवरी 2019 में जब इस मुद्दे को उपभोक्ता परिषद ने माननीय ऊर्जा मंत्री जी और विद्युत नियामक आयोग के सामने उठाया ऊर्जा मंत्री जी ने आयोग आदेश को लागू करने का आदेश दिया आयोग ने रिपोर्ट मांगी इसके बाद भी आज तक उपभोक्ताओ को कोई छूट का पैसा नहीं दिया गया जो यह सिद्ध करता है की बिजली कम्पनिया गांव के उपभोक्तओ का करोङो छूट का पैसा हड़पना चाह रही है।

गौरतलब है कि उप्र विद्युत नियामक आयोग द्वारा सभी टैरिफ आदेशों में वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17 2017-18 व वित्तीय वर्ष 2018-19 के अन्त तक प्रदेश के सभी ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं जो मीटर्ड में शिफ्ट होंगे उन्हें बिजली बिल में 10 प्रतिशत छूट का प्राविधान किया था, जिसे बिजली कम्पनियों ने लागू न करके छूट का करोड़ो रूपया हड़पने की कोशिश की, जिसका विगत दिनों उपभोक्ता परिषद ने खुलासा किया तो हड़कम्प मच गया। बिजली कम्पनियों ने आयोग आदेशों का उल्लंघन करते हुये ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं का करोड़ों रूपया हड़पने की कोशिश की इसके लिये जो भी वरिष्ठ अधिकारी व अभियन्ता दोषी है उनके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाय और उपभोक्ताओं को न्याय दिया जाय।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जनवरी 2019 में उपभोक्ता परिषद् ने जब इसका खुलासा किया था तो पॉवर कॉपोरशन ने अपनी गलती स्वीकार कर उपभोक्तओ को छूट का पैसा फरवरी के बिलो में समायोजित करने हेतु प्रेस नोट तक जारी कर दिया था, फिर इस मामले को गुपचुप तरीके से दबा दिया गया।

उन्होंने कहा कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रदेश के ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं जिन्हें अनमीटर्ड से मीटर्ड में शिफ्ट होने पर 10 प्रतिशत की छूट का प्राविधान किया है उसके आधार पर ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं को हर हाल में बिजली कम्पनियों को लाभ देना होगा। इस पूरे मामले में किस स्तर पर उदासीनता बरती गयी और आयोग आदेश के तहत उपभोक्ताओं को लाभ नहीं दिया गया, इसके लिये जो भी अधिकारी दोषी होगें उन्हें चिन्हित कर कार्यवाही कार्यवाही की जाय मार्च 2015 के बाद ऐसे विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 15 से 20 लाख के बीच होना तय है और उन्हें जो लाभ देना पड़ेगा वह करोड़ो में होगा।

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