सेवानिवृत्त अफसर को डिजिटल अरेस्ट कर 98 लाख हड़पे
लखनऊ: प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में साइबर ठगों ने नेवी से रिटायर्ड ऑनरी सब लेफ्टिनेंट को 22 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर कभी पुलिस अफसर, कभी जज और कभी जांच अधिकारी बनकर टॉर्चर किया। ठग ने इससे पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की फोटो वॉट्सऐप की डीपी में लगाकर कॉल करते थे और मनी लॉन्डिंग केस में फंसाने की धमकी देकर डराया और इसी डर से उन्होंने ठगों के बताये गये बैंक खाते में 98 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए। इतना ही नहीं उन्होंने एफडी तक तोड़वा दी।
पुलिस के मुताबिक सेवनिवृत्त सब- लेफ्टिनेंट का बेटा नेवी में अफसर है और वर्तमान में एक देश की सीमा पर तैनात था। जब कई दिनों तक पिता से बात नहीं हुई, तो वह छुट्टी लेकर घर पहुंचा। पिता की हालत देखकर पूछताछ की तो पूरी सच्चाई सामने आई इसके बाद बेटे ने पुलिस से शिकायत की। मामला वाराणसी के सारनाथ थाना क्षेत्र का है।
माधव नगर कॉलोनी में रहने वाले अनुज यादव जल सेना में ऑनरी सब- लेफ्टिनेंट थे। 31 जुलाई, 2024 को रिटायर होने के बाद वह अपने पैतृक गांव बलिया के मरगूपुर फेफना में रह रहे थे। कुछ दिन पहले वह वाराणसी में आशापुर माधव नगर स्थित अपने घर पर आ गए। अनुज यादव ने पुलिस को बताया- मोबाइल पर 11 नवंबर को सुबह 11 बजे अनजान नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (टीआरएआई) का अफसर बोल रहा हूं आपके नंबर से गैरकानूनी गतिविधियां की जा रही हैं। आप कोलाबा पुलिस स्टेशन पर संपर्क करने की बात कहकर उसने फोन काट दिया। यह सुनते ही डर गया उसी नंबर पर कई बार फोन किया, लेकिन उठा नहीं।
पीड़ित ने बताया कि करीब 1 घंटे बाद दोबारा कॉल आई जिसमें बताया कि आपके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। केस के विवेचना अधिकारी विजय खन्ना के मोबाइल पर अपना वॉट्सएप नंबर वॉट्सऐप करिए, वह आपसे संपर्क करेंगे। थोड़ी देर बाद विवेचना अधिकारी के नाम पर एक व्यक्ति का फोन आया। उसने कहा- आपके खिलाफ मनी लॉन्डिंग का केस है। आपके खातों से बहुत सारा ट्रांजेक्शन हुआ है।







